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International Yoga Day पर श्री श्री रवि शंकर का संदेश, योग में अनुशासन है बहुत महत्वपूर्ण

Yoga And Discipline: पतंजलि योग सूत्र (योग के सिद्धांत और अभ्यास पर संस्कृत सूत्रों का एक संग्रह) का आरंभ ही अनुशासन से होता है, योग में कितना जरूरी है अनुशासन, आइए जानते हैं...

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International Yoga Day पर श्री श्री रवि शंकर का संदेश, योग में अनुशासन है बहुत महत्वपूर्ण

अंतरराष्ट्रीय योग दिवस 2024

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अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day) के मौके पर भारत समेत दुनियाभर के अलग अलग देशों में तरह-तरह के कार्यक्रमों का आयोजन किया गया है. योग का जीवन में बहुत ही महत्व माना गया है और सेहतमंद (Yoga Benefits) बने रहने के लिए योग, योगासन, सूर्य नमस्कार, व्यायाम, मेडिटेशन आदि को बहुत ही जरूरी बताया गया है. इन्हें रोजमर्रा के जीवन में शामिल कर आप 100 साल तक चुस्त दुरुस्त रह सकते हैं. 

आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर (Sri Sri Ravi Shankar) के अनुसार, पतंजलि योग सूत्र (योग के सिद्धांत और अभ्यास पर संस्कृत सूत्रों का एक संग्रह) का आरंभ ही अनुशासन से होता है- 'अथयोगानुशासनम्! ऐसे में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस (International Yoga Day 2024) के मौके पर आइए एक नजर डालते हैं योग के (Yoga And Discipline) अनुशासन पर...

कब पड़ती है अनुशासन की जरूरत?

अनुशासन का अर्थ है ऐसे नियम, जिन्हें आप स्वयं पर लगाते हो. जब आप स्वयं में दृढ़, आनंदित, शांत और प्रसन्न हो तब आपको किसी अनुशासन की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि इस समय आप पहले से ही स्वयं में स्थापित हो. लेकिन जब मन अपने स्वभावानुसार भटकता रहता है तब इस भटकाव को रोकने के लिए व्यक्ति को अनुशासन की जरूरत पड़ती है.


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वास्तविक आनंद के लिए अनुशासन है जरूरी

बता दें कि अनुशासन से आप आत्मकेंद्रित होंगे और परमानंद की ओर बढ़ेंगे, एक विशेष अनुशासन के बाद जो आनंद प्राप्त होता है वह सात्विक आनंद देने वाला होता है और वह आनंद जो शुरुआत में खुशी दे और अंत में दुःखदायी हो जाए वह सच्चा आनंद नहीं होता है. इसलिए वास्तविक आनंद को प्राप्त करने के लिए अनुशासन का पालन करना बहुत ही जरूरी होता है.

 आनंद की प्राप्ती है अनुशासन का उद्देश्य

आनंद तीन तरह के होते हैं. पहला है तामसिक आनंद, यानी जिस कार्य में आरंभ से अंत तक केवल दुःख ही दुःख हो लेकिन कार्य करने वाले को उसमें सुख मिले. दूसरा है राजसिक आनंद, जिसमें आरंभ में अत्यंत आकर्षण और आनंददायक तो होता है लेकिन उसका अंत दुखदायी होता है. तीसरा है सात्विक आनंद, ऐसी स्थिति में आरंभ में कोई आनंद न मिले लेकिन अंत में आनंद ही आनंद होता होता है. 


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महर्षि पतंजलि ने कहा है, 'अभी, इस क्षण में!' यानी जब जीवन स्पष्ट रूप से समझ में न आता हो, जब हृदय सही स्थान पर न हो, जब आपका मन अशांत हो तब 'योगानुशासनम्', मैं योग को प्रतिपादित करता हूं.. 


ऐसे में अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मौके योग संकल्प लें कि अनुशासन का पालन करते हुए योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएंगे. 

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