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महाराष्ट्र में नहीं थम रहा विधायकों की अयोग्यता का मामला, उद्धव और शिंदे गुट ने फिर कोर्ट में दी चुनौती

Eknath Shinde VS Uddhav Thackeray: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे गुट ने विधायकों की अयोग्यता को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है.

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महाराष्ट्र में नहीं थम रहा विधायकों की अयोग्यता का मामला, उद्धव और शिंदे गुट ने फिर कोर्ट में दी चुनौती

एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे. (फाइल फोटो-PTI)

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डीएनए हिंदी: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उद्धव ठाकरे के बीच टकराव कम नहीं हो रहा है. दोनों गुटों ने सोमवार को विधायकों की अयोग्यता की याचिका को खारिज करने के महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर के फैसले को कोर्ट में चुनौती दी है. उद्धव ठाकरे गुट ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. जबकि एकनाथ शिंदे गुट ने बम्बई हाईकोर्ट का रुख किया है.

बीते 10 जनवरी को महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली दल को असली शिवसेना बताया था और एकानथ शिंदे सहित सत्तारूढ़ खेमे के 16 विधायकों को अयोग्य ठहराने की उद्धव ठाकरे गुट की याचिका को खारिज कर दिया था. इस फैसले ने मुख्यमंत्री के रूप में शिंदे की स्थिति को और मजबूत कर दिया. शिंदे ने 18 महीने पहले उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था. उद्धव ने स्पीकर के इस फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है.

हाईकोर्ट पहुंचे एकनाथ शिंदे
उधर, सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने उद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायकों को अयोग्य नहीं ठहराने संबंधी स्पीकर राहुल नार्वेकर के फैसले को चुनौती देते हुए बम्बई हाईकोर्ट का रुख किया है. सत्तारूढ़ शिवसेना के मुख्य सचेतक भरत गोगावले की ओर से 14 विधायकों के खिलाफ 12 जनवरी को याचिकाएं दायर की गईं. इन याचिकाओं में कहा गया है कि वह विधानसभा अध्यक्ष नार्वेकर द्वारा प्रतिद्वंद्वी गुट के विधानसभा सदस्यों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को खारिज करने संबंधी 10 जनवरी के आदेश की वैधता और औचित्य को चुनौती दे रहे हैं.

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अयोग्यता याचिकाओं पर अपने फैसले में 10 जनवरी को विधानसभा अध्यक्ष ने प्रतिद्वंद्वी खेमों के किसी भी विधायक को अयोग्य नहीं ठहराया था. गोगावले ने याचिकाओं में कहा कि उद्धव गुट के विधायकों ने न केवल व्हिप का उल्लंघन किया, बल्कि जून 2022 में विभाजन के बाद स्वेच्छा से शिवसेना राजनीतिक दल की सदस्यता भी छोड़ दी थी. 

याचिकाओं में दावा किया गया है कि अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने इस बात पर भी विचार नहीं किया कि सदस्यता छोड़ने के साथ-साथ शिवसेना (यूबीटी) सदस्यों ने कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के साथ मिलकर शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार के खिलाफ मतदान किया और सत्तारूढ़ सरकार को गिराने की कोशिश की गई.

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