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Respiratory Diseases: इन लोगों के फेफड़े जल्दी हो जाते हैं खराब, होने लगती हैं सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां, बरतें सावधानी

Risk Of Respiratory Disease: दुनियाभर में लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियां एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रही है और कुछ लोगों में इसका जोखिम काफी ज्यादा होता है...

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Respiratory Diseases: इन लोगों के फेफड़े जल्दी हो जाते हैं खराब, होने लगती हैं सांस से जुड़ी गंभीर बीमारियां, बरतें सावधानी

सांस से जुड़ी बीमारियां

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बढ़ते प्रदूषण समेत अन्य कई कारणों की वजह से दुनियाभर में लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियां एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बनकर उभर रही है. बता दें कि श्वसन संबंधी समस्याओं में व्यक्ति के फेफड़ों की कार्यक्षमता धीरे-धीरे (Risk Of Respiratory Diseases) कम होने लगती है और इसकी वजह से मरीज को सांस लेने में परेशानी होने लगती है. 

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक कुछ लोगों में श्वसन संबंधी (Respiratory Diseases) समस्याओं का खतरा अधिक होता है. ऐसे में आज हम जानेगें कि किन लोगों को श्वसन संबंधी (Lung Health) रोग होने का जोखिम अधिक होता है और इसका कारण क्या है, ताकि आप इससे खुद को बचाए रख सकते हैं...

किन लोगों में होत है इसका जोखिम

व्यावसायिक एक्सपोजर के कारण

इसके अलावा खनन, किसी निर्माण स्थल, केमिकल फैक्टरी और मेटल की फैक्टरी में काम करने वाले लोगों को दूषित वातावरण में सांस लेने की वजह से फेफड़ों से संबंधित बीमारी होने का खतरा अधिक होता है. इतना ही नहीं इसके कारण व्यक्ति को अस्थमा और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसे रोग हो सकते हैं. 


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रोग में 

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा, सीओपीडी, सिस्टिक फाइब्रोसिस और हृदय रोग जैसी गंभीर समस्याएं होती है, उनमें फेफड़ों से जुड़े रोग होने का खतरा अधिक होता है.  इन बीमारियों में फेफड़ों की कार्यप्रणाली पर बुरा असर पड़ता है और यह इम्यून सिस्टम को भी कमजोर बना देते हैं. 

धूम्रपान के कारण 

हेल्थ एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जो लोग नियमित रूप से सिगरेट पीते हैं उनको फेफड़ों से जुड़ी समस्या का जोखिम सबसे अधिक होता है और सिगरेट के तंबाकू के हानिकारक केमिकल श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाते हैं. इतना ही नहीं यह फेफड़ों की कार्यप्रणाली को भी खराब कर सकते हैं. 


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बुजुर्ग

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक उम्र का बढ़ना श्वसन प्रणाली में बदलावों का कारण बन सकता है और इस स्थिति में फेफड़ों की कार्यक्षमता में कमी और श्वसन तंत्र की मांसपेशियों का कमजोर होना शामिल है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक उम्र से संबंधित ये परिवर्तन बुजुर्ग व्यक्ति को इन्फ्लूएंजा, निमोनिया और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी सीओपीडी जैसे श्वसन संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं और इसके कारण फेफड़ों से जुड़ी बीमारी का जोखिम बढ़ जाता है.

बच्चे

इसके अलावा शिशु और बच्चों को फेफड़ों से जुड़े रोगों का खतरा अधिक होता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक विकासशील प्रतिरक्षा प्रणालियां संक्रमणों से लड़ने में पूरी तरह सक्षम नहीं होती हैं और इसके कारण वह श्वसन संबंधी वायरस जैसे रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस (आरएसवी), इन्फ्लूएंजा और एडेनोवायरस के प्रति संवेदनशील हो जाते हैं.

(Disclaimer: यह लेख केवल आपकी जानकारी के लिए है. इस पर अमल करने से पहले अपने विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लें.)

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