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UCO बैंक में है खाता, क्या आपके भी अकाउंट में गलती से आया है पैसा, अब होगा ये

UCO बैंक ने हाल ही में गलती से ग्राहकों के खाते में 820 करोड़ रुपये डाल दिए. जिसमें से बैंक ने 649 करोड़ रुपये रिकवर कर लिए हैं. वहीं 171 करोड़ रुपये बाकी हैं.

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UCO बैंक में है खाता, क्या आपके भी अकाउंट में गलती से आया है पैसा, अब होगा ये

UCO Bank

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डीएनए हिंदी: UCO बैंक ने 820 करोड़ रुपये की गलती से जमा हुई रकम में से 649 करोड़ रुपये की वसूली कर ली है. शेष 171 करोड़ रुपये की वसूली के लिए बैंक ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

बैंक ने जिन खातों में गलती से रकम जमा हुई थी, उन खाताधारकों से संपर्क कर उन्हें रकम वापस करने के लिए कहा था. लेकिन कुछ खाताधारकों ने रकम वापस करने से इनकार कर दिया. ऐसे खाताधारकों के खिलाफ बैंक ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है.

बैंक का कहना है कि वह शेष 171 करोड़ रुपये की वसूली के लिए हर संभव प्रयास करेगा. अगर कानूनी कार्रवाई के बाद भी रकम वसूली नहीं हो पाती है, तो बैंक उसे अपने खर्चों में शामिल करेगा.

बैंक की इस कार्रवाई का स्वागत किया जा रहा है. यह दिखाता है कि बैंक अपने ग्राहकों के साथ पारदर्शी है और वह गलतियों के लिए जिम्मेदार लोगों से जवाबदेह है.

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बाकी 171 करोड़ रुपये की वसूली के लिए बैंक क्या कर सकता है?

बैंक शेष 171 करोड़ रुपये की वसूली के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकता है:

  • कानूनी कार्रवाई: बैंक खाताधारकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकता है. इसमें कोर्ट में केस करना, गिरफ्तारी वारंट जारी करना, संपत्ति जब्त करना आदि शामिल हैं.
  • बैंकिंग नियमों का उल्लंघन मानना: बैंक खाताधारकों द्वारा रकम वापस नहीं करने को बैंकिंग नियमों का उल्लंघन मान सकता है. ऐसे मामलों में बैंक खाताधारकों के खिलाफ जुर्माना या अन्य दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है.
  • बैंकिंग ग्राहक संरक्षण अधिनियम का इस्तेमाल करना: बैंकिंग ग्राहक संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत बैंक ग्राहकों के अधिकारों की रक्षा करता है. इस अधिनियम के तहत बैंक खाताधारकों के खिलाफ कार्रवाई करने से पहले उन्हें नोटिस देना आवश्यक है. बैंक इस अधिनियम का इस्तेमाल कर खाताधारकों को शेष रकम वापस करने के लिए नोटिस दे सकता है.

बैंक इनमें से किसी भी कदम को उठा सकता है. लेकिन यह भी संभव है कि बैंक और खाताधारकों के बीच समझौता हो जाए और शेष रकम का एक हिस्सा या पूरी रकम वापस कर दी जाए.

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