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तस्करी और नकली सामानों की बढ़ती घुसपैठ को रोकने के लिए 11 फरवरी को एंटी स्मगलिंग डे घोषित किया गया है.
डीएनए हिंदी: तस्करी और नकली सामानों की बढ़ती घुसपैठ को रोकने के लिए उद्योग जगत ने 11 फरवरी को एंटी स्मगलिंग डे घोषित किया है. लंबे समय से नकली सामानों और स्मगलिंग के खिलाफ मुहिम छेड़ने वाले फिक्की कैसकेड ने एंटी स्मगलिंग डे से सरकार, पॉलिसी मेकर्स और लोगों को ये समझाने की कोशिश की है कि इससे देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था को कितना नुकसान हो रहा है.
दरअसल, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक 2020 में नकली सामानों और स्मगलिंग से दुनियाभर में 2.2 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान हुआ जो दुनिया की GDP के 0.3 फीसदी के बराबर है. वहीं फिक्की कैसकेड के मुताबिक 2019 में केवल 5 सेक्टर्स में तस्करी की वजह से भारतीय इकोनॉमी को कुल 1.17 लाख करोड़ का नुकसान हुआ था. टेक्सटाइल्स, टोबैको उत्पाद, रेडीमेड गारमेंट्स, कैपिटल गुड्स और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स को इस तस्करी की वजह से सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है. फिक्की कैसकेड का मानना है कि नकली सामानों की घुसपैठ और तस्करी से आतंकवादी फंडिंग समेत तमाम तरह के नुकसान हो रहे हैं. एंटी स्मगलिंग डे मनाकर एक संदेश रोजगार को बचाने का भी दिया जा रहा है.
क्या कहता है आंकड़ा
आंकड़ों के मुताबिक 2017-18 में स्मगलिंग और नकली सामानों की वजह से करीब साढ़े 16 लाख लोगों की रोजी रोटी छिन गई थी. नकली सामानों के व्यापार और तस्करी की वजह से देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को विदेशी कंपनियों के साथ ही घरेलू मोर्चे पर भी कड़ा संघर्ष करना पड़ रहा है. जानकारों का मानना है कि 5 ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के सपने को भी नकली सामानों की घुसपैठ और तस्करी से काफी नुकसान हो रहा है. ऐसे में 11 फरवरी को एंटी स्मगलिंग डे मनाकर किस तरह से पॉलिसी निर्माताओं के बीच इस मुद्दे को हाईलाइट किया जा सकेगा ये देखना दिलचस्प होगा. अगर सरकार इस पर कोई ध्यान देती है तो फिर मुमकिन है कि देश में आर्थिक हालात में सुधार के साथ ही रोजगार में भी इजाफा हो सकता है.
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