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सेतु प्रकाशन के सालाना जलसे में हुआ कथाकार राजू शर्मा के उपन्यास 'मतिभ्रम' का लोकार्पण

Hindi novel Matibhram: नई दिल्ली में कथाकार राजू शर्मा को 'सेतु पाण्डुलिपि पुरस्कार योजना (2023)' से नवाजा गया. साथ ही उनके नए उपन्यास मतिभ्रम का लोकार्पण भी किया गया. इस मौके पर घोषणा की गई कि 'साहित्यकार निधि' का गठन किया जाएगा.

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सेतु प्रकाशन के सालाना जलसे में हुआ कथाकार राजू शर्मा के उपन्यास 'मतिभ्रम' का लोकार्पण

कथाकार राजू शर्मा को 'सेतु पाण्डुलिपि पुरस्कार योजना (2023)' से नवाजा गया.

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डीएनए हिंदी : कथाकार राजू शर्मा के नए उपन्यास 'मतिभ्रम' का लोकार्पण सेतु प्रकाशन के वार्षिकोत्सव के अवसर पर हुआ. यह कार्यक्रम नई दिल्ली के मंडी हाउस स्थित त्रिवेणी कला संगम सभागार में आयोजित किया गया था. इस मौके पर कथाकार राजू शर्मा को 'सेतु पाण्डुलिपि पुरस्कार योजना (2023)' से भी नवाजा गया. 'मतिभ्रम' के लेखक राजू शर्मा ने कहा कि पिछले करीब एक दशक में राष्ट्र के नाम पर जो तरह-तरह के नैरेटिव गढ़े और प्रचारित किए गए हैं वे बहुत खतरनाक हैं. हमें इस सब के प्रति सचेत होना होगा.
कथाकार राजू शर्मा का अभिनंदन करते हुए अमिताभ राय ने सेतु प्रकाशन से सम्बद्ध दो पहल के बारे में बताया. पहली, बालिका शिक्षा के क्षेत्र में सेतु प्रकाशन अपनी भागीदारी सुनिश्चित करेगा, और दूसरी, साहित्यकारों के हित में एक ऐसी 'साहित्यकार निधि' का गठन करेगा, जो साहित्यकारों के हितों के प्रति एकाग्र और सुचिंतित हो. इस साहित्यकार निधि कमिटी के अध्यक्ष अशोक वाजपेयी होंगे और उनके नेतृत्व में ही इस योजना को व्यावहारिक रूप दिया जाएगा.

'गांधी को फिर-फिर पढ़ने की जरूरत'

कार्यक्रम की शुरुआत 'सेतु-वाग्देवी व्याख्यान' सत्र से हुई. इसमें गांधीवादी चिंतक कुमार प्रशांत ने 'गांधी की ये जो अक्षर देह है…' पर के बीज वक्तव्य दिया. उन्होंने कहा कि गांधी के अक्षर एक हथियार हैं, जिसे वे अहिंसा की सीढ़ी के तौर पर देखते हैं. गांधी के अक्षर साहित्यिक अक्षरों से इन मायनों में भिन्न हैं कि वे महज अभिव्यक्ति नहीं हैं, वे कर्म की आंच में तपे हैं. गांधी के अक्षर वज्र की तरह कठोर हैं और गहरी चुनौती देते हैं. कुमार प्रशांत ने सामाजिक -राजनीतिक परिदृश्यों में गांधी को फिर-फिर पढ़ने की जरूरत बताई. 

उपन्यास 'मतिभ्रम' पर चर्चा के लिए मंच पर मौजूद वक्तागण.

'मतिभ्रम उपन्यास में जमीनी हकीकत'

कार्यक्रम के दूसरे सत्र की शुरुआत पुरस्कृत पुस्तक 'मतिभ्रम' के लोकार्पण से हुई. प्रो. विद्या सिन्हा ने कथाकार राजू शर्मा को स्मृति चिह्न और मानपत्र देकर सम्मानित किया. साथ ही सत्र के सभी वक्ताओं को भी सम्मानित किया गया. लोकार्पण के बाद पुरस्कृत पुस्तक पर परिचर्चा की शुरुआत करते हुए आलोचक डॉ संजीव कुमार ने कहा, राजू शर्मा हिंदी की दुनिया में अपनी तरह के अनोखे उपन्यासकार हैं, ये उनके लेखन के मिजाज से पता चलता है. नवउदारवादी स्टेट के भीतर की साजिशों या उसके भीतर की अंधेरी जालसाज दुनिया में 'मतिभ्रम' उपन्यास हमें ले जाता है. जो स्टेट के दावे हैं जमीनी हकीकत उससे उलट है. दोनों के बीच के अंतराल को इस उपन्यास में बहुत अच्छे से व्यक्त किया गया है. भारत की अर्थव्यवस्था अमीरों के पक्ष में गहरी दुर्भिसन्धि का शिकार है - इस उपन्यास में यह बात साबित होती है. 

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'हर किसी के लेखन में राजू शर्मा सी हिम्मत नहीं'

वरिष्ठ कवि मदन कश्यप ने कहा कि राजू शर्मा ने हमारे समय की विसंगतियों और विडंबनाओं को सामने रखा है. यह बहुत ही महत्त्वपूर्ण है, उन्होंने नौकरशाही के अपने अनुभवों को प्रामाणिक तरीके से इस उपन्यास में उकेरा है. तद्भव पत्रिका के संपादक व कथाकार अखिलेश ने पुस्तक परिचर्चा में कहा कि राजू शर्मा एक अनोखे किस्सागो हैं. नए किस्म का जादू है उनके कथ्य में. यथार्थ का विस्तार है. राजू शर्मा के कथा संसार में एक शक्ति संरचना है, नौकरशाह होने की वजह से जो माहौल उनके आसपास रहा वो उनके उपन्यासों में भी प्रतिबिंबित होता दिखता है. राजू शर्मा की तरह लिखने का साहस हर किसी में नहीं है. आलोचक रवींद्र त्रिपाठी ने डिस्टोपिया की चर्चा करते हुए कहा कि राजू शर्मा का नया उपन्यास 'मतिभ्रम' दु:स्वप्न की कथा है. इस उपन्यास के बहाने उन्होंने जॉर्ज आरवेल के '1984' और श्रीलाल शुक्ल के उपन्यास 'राग दरबारी' का भी जिक्र किया.

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'विसंगतियों के अनुभव की कथा है मतिभ्रम'

वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया ने सम्मानित कृति का जिक्र करते हुए कहा कि लेखक ने बड़े ही धारदार तरीके से अफसरशाही की कठोरता और निरुपायता दोनों को चित्रित किया है. यह उपन्यास दरअसल नौकरशाही में आने का मतिभ्रम भी है, जहां व्यक्ति कहने को एकदम स्वतंत्र और ताकतवर हो जाता है. जबकि ईमानदारी से काम करने पर उसको दमन झेलना पड़ता है. वह विसंगतियों में रहता है और 'मतिभ्रम'  उसी अनुभव की कथा है. कार्यक्रम का समापन सेतु प्रकाशन समूह की प्रबंधक अमिता पांडेय के वक्तव्य से हुआ. उन्होंने सेतु प्रकाशन की स्थापना से अब तक की प्रगति और 'सेतु' के उद्देश्यों व प्रतिबद्धताओं के बारे में बताते हुए सभी वक्ताओं और श्रोताओं के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया. कार्यक्रम का संचालन शोभा अक्षर ने किया.

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