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Go First ने लेंडर्स से की 100 करोड़ रुपये के इमरजेंसी फंड की डिमांड, मई से ठप पड़ी है एयरलाइन

Go First Airlines Crisis: गो फर्स्ट ने एयरलाइन के संचालन को बनाए रखने के 100 करोड़ रुपये की लेंडर्स से मांग की है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला.

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Go First ने लेंडर्स से की 100 करोड़ रुपये के इमरजेंसी फंड की डिमांड, मई से ठप पड़ी है एयरलाइन
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डीएनए हिंदी: लोगों की पसंदीदी बजट फ्रेंडली प्राइवेट एयरलाइन गो फर्स्ट (Go First)  को तत्काल धन की आवश्यकता है. आपको बता दें कि काफी लंबे समय से इस एयरलाइन की सभी उड़ाने बंद थी. लगातार दौबारा उड़ान भरने के लिए संघर्ष कर रही गो फर्स्ट एयरलाइन ने रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल शैलेंद्र अजमेरा ने ऋणदाताओं (lenders) से तत्काल 100 करोड़ रुपये की फंडिंग मांगी है. सीओसी यानी लेनदारों की समिति में शैलेन्द्र अजमेरा ने ऋणदाताओं (lenders) से कहा कि इस इमरजेंसी फंडिंग के इस्तेमाल से बीमा और अन्य आवश्यक खर्चों को कवर किया जाएगा.

क्या कहती है रिपोर्ट
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में के मुताबिक, शैलेन्द्र अजमेरा ने बैंकों से सीओसी के भीतर उनके वोटिंग शेयर के आधार पर पैसे मांगे हैं. कथित तौर पर इमरजेंसी फंडिंग के लिए सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ बड़ौदा के कॉर्पोरेट कार्यालयों को रिक्वेस्ट भेजी गई है  और अगले एक या दो दिनों के भीतर फैसला सामने आने की उम्मीद है.

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गोफर्स्ट की याचिका खारिज
आपको बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को गोफर्स्ट की याचिका खारिज कर दी थी. एयरलाइन कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इस याचिका में निरीक्षण के लिए लीज होल्डर्स को अपने विमान तक पहुंच की अनुमति दी गई थी.

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3 मई से ठप है Go First
आपको बता दें कि गोफर्स्ट की उड़ान सेवाएं 3 मई से निलंबित हैं.एयरलाइन के अनुसार, 16 अगस्त, 2023 तक गोफर्स्ट की सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. गोफर्स्ट ने स्वैच्छिक दिवाला प्रक्रिया (voluntary insolvency process) के लिए एक आवेदन भी प्रस्तुत किया था. एनसीएलटी की मंजूरी के बाद इस आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है.
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