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Cyrus Mistry Last Rites: गिद्धों के बिना पूरा नहीं माना जाता पारसी समुदाय में अंतिम संस्कार! जानिए क्यों?

Last Rites Ritual Parsi Community : जल, अग्नि या धरती में अंतिम संस्कार करने को अपवित्र मानते हैं,जानिए उनकी अंतिम संस्कार की प्रथा में गिद्ध का महत्व

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डीएनए हिंदी: टाटा सन्स के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री (Tata Sons Ex Chairman Cyrus Mistry Cremation in Hindi) का अंतिम संस्कार पारसी संप्रदाय (Parsi Rituals) के अनुसार नहीं किया गया. मुम्बई के एक विद्युत शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया. गौरतलब है कि पारसी धर्म में अग्नि की पूजा होती है पर शव का दाह-संस्कार उचित नहीं माना जाता है.

इस धर्म में टावर ऑफ साइलेंस (Tower of Silence Rules) में अंतिम संस्कार किया जाता है. इसे दखमा भी कहा जाता है.यह एक खास गोलाकार जगह होती है जिसकी चोटी पर शवों को रखकर छोड़ दिया जाता है और उसे आसमान के हवाले कर दिया जाता है और गिद्ध, चील उसे खा लेते हैं. इस तरह से अंतिम संस्‍कार करने की यह परंपरा पारसी धर्म में 3 हजार साल से ज्‍यादा समय से चली आ रही है लेकिन अब यह परंपरा कम होती जा रही है. 

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क्यों पारसी संप्रदाय में ऐसी परंपरा है (Why Parsi's Cremation rituals are different from others)

जैसे हिंदू धर्म में शवों को अग्नि या जल को सौंपते हैं. शव को जलाया जाता है या फिर जल में प्रवाहित कर दिया जाता है. कुछ जगहों पर शव को दफन करने की परंपरा भी है, वहीं,मुस्लिम व ईसाई धर्म में शव को धरती को सौंप दिया जाता है, मतलब दफन कर दिया जाता है. वहीं,पारसी संप्रदाय में अंतिम संस्कार इन तरीकों से नहीं होता है. पारसी लोग जल अग्नि को देवता मानते हैं इसलिए प्रकृति को अशुद्ध नहीं करते. ऐसे में उनका मानना है कि शव को जलाने, प्रवाहित करने या दफन करने से अग्नि, जल या धरती अपवित्र हो जाती है. ऐसा करने से ईश्वर की संरचना प्रदूषित होती है. इसलिए इस समुदाय में शव को आसमान के हवाले कर दिया जाता है और गिद्ध और चील उसे खा लेते हैं. 

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इनका मानना है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो अंतिम संस्कार की विधि अधूरी रह जाती है. हालांकि यह प्रक्रिया इतनी भी आसान नहीं है. इनके मुताबिक टावर ऑफ साइलेंस में एक बड़ा सा होल है, जो दिखने में काफी बड़ा कुएं जैसा है, वहां शव को लटका दिया जाता है और गिद्ध, कौए और चील उसे खाते हैं, इसके बाद ही यह प्रक्रिया पूरी होती है

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