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कौन हैं Vikramaditya Singh जिन्होंने सुक्खू कैबिनेट से दिया इस्तीफा, विवादों से रहा है पुराना नाता

Vikramaditya Singh सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं. वे मौजूदा कांग्रेस सरकार से बेहद नाराज हैं. उन्होंने कांग्रेस के खिलाफ बगावत छेड़ दी है.

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Congress नेता विक्रमादित्य सिंह.

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हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में राज्यसभा चुनावों (Rajya Sabha Elections 2024) के नतीजों ने कांग्रेस (Congress) पार्टी की भीतरी कलह को सार्वजनिक कर दिया है. कैबिनेट मंत्री विक्रमादित्य सिंह (Vikramaditya Singh) के इस्तीफे के बाद सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की सियासी मुश्किलें और बढ़ गई हैं.  

विक्रमादित्य सिंह ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावती रुख अख्तियार कर लिया है. उन्होंने राज्य सरकार से उनकी मांगों को अनदेखा करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है कि जिन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है, उन्हें नजरअंदाज किया गया है. 

क्यों पार्टी से दिया इस्तीफा?
विक्रमादित्य सिंह ने कहा, 'हमने हमेशा कांग्रेस आलाकमान का सम्मान किया है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का सम्मान किया है, लेकिन विधायकों की शिकायत का समाधान नहीं हुआ, ये विधायकों की अनदेखी का ही नतीजा है कि हम राज्यसभा चुनाव हारे हैं. उन्होंने कहा कि मेरी निष्ठा पार्टी के साथ है, इसलिए खुलकर बोल रहा हूं.'

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हिमाचल कांग्रेस में भूचाल लाने वाले विक्रमादित्य हैं कौन, आइए जानते हैं.

कौन हैं विक्रमादित्य सिंह?
विक्रमादित्य सिंह, हिमाचल प्रदेश के पूर्वमुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और वर्तमान हिमाचल कांग्रेस प्रमुख प्रतिभा सिंह के बेटे हैं. वह सुखविंद सिंह सुक्खू सरकार में लोक निर्माण मंत्री थे.

1989 में जन्मे विक्रमादित्य सिंह शिमला ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्र से विधायक हैं. वह अब दिवंगत वीरभद्र सिंह का उत्तराधिकार संभाल रहे हैं. उनकी मां प्रतिभा सिंह मंडी से सांसद हैं. वह राज्य कांग्रेस की प्रमुख भी हैं.

विक्रमादित्य सिंह बुशहर राजघराने से आते हैं. वे इस रियासत के मानद राजा भी हैं. उन्होंने अपना ग्रेजुएशन सेंट स्टीफंस कॉलेज दिल्ली से किया है. वे इतिहास में MA हैं. उनके पिता विरभद्र सिंह को लोग 'राजा साहब' कहकर बुलाते थे.

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विक्रमादित्य सिंह राज्य में कांग्रेस के बड़े नेता हैं. साल 2013 से 2017 के बीच राज्य युवा कांग्रेस के चीफ रह चुके हैं. वह 2 बार से विधायक हैं. साल 2017 में उन्होंने अपना पहला चुनाव जीता. उन्होंने 2023 में भी शानदार जीत हासिल की.

राम मंदिर उद्घाटन पर भी दिखाया था बगावती तेवर
अयोध्या में जब राम मंदिर में 22 जनवरी को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा हो रही थी, तो विक्रमादित्य सिंह को न्योता भेजा गया था. वे कांग्रेस के मंत्री थे, पूरी पार्टी इस आयोजन से दूरी बना रही थी, वे पार्टी के लाइन से हटकर अयोध्या पहुंचे थे. उन्होंने राम मंदिर के भव्य समारोह में भाग लिया. उनके जाने पर हंगामा हुआ था.

पत्नी संग विवाद में आया था नाम
विक्रमादित्य की पत्नी सुदर्शना उन पर घरेलू हिंसा का आरोप लगा चुकी हैं. इस केस में जयपुर कोर्ट ने विक्रमादित्य के अलावा, उनकी मां प्रतिभा सिंह, बहन अपराजिता और जीजा अंगद सिंह के खिलाफ नोटिस जारी किया था.

सुदर्शना और विक्रमादित्य की शादी मार्च 2019 में हुई थी. सुदर्शना मेवाड़ के शाही आमेट राजघराने से आती हैं. यहीं दोनों की शादी भी हुई थी.

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