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ED चीफ के कार्यकाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और CVC से क्यों मांगा जवाब?

प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख का कार्यकाल बढ़ाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर है. याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और सेंट्रल विजिलेंस कमेटी से जवाब मांगा है.

ED चीफ के कार्यकाल पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और CVC से क्यों मांगा जवाब?

सुप्रीम कोर्ट में सेम सेक्स मैरिज पर शुक्रवार को सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है.

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डीएनए हिंदी: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) के निदेशक का कार्यकाल बढ़ाए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर मंगलवार को नोटिस जारी करते हुए केंद्र और केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) से जवाब मांगा. इन याचिकाओं में उस संशोधित कानून को चुनौती दी गई है, जिसके तहत निदेशक के कार्यकाल में पांच साल तक के विस्तार की अनुमति दी गई है. 

चीफ जस्टिस एनवी रमन्ना (NV Ramana), जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस हिमा कोहली की पीठ ने आठ याचिकाओं पर केंद्र, सीवीसी और मौजूदा ईडी निदेशक सहित प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए. कांग्रेस नेताओं-रणदीप सिंह सुरजेवाला और जया ठाकुर तथा तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने भी याचिकाएं दाखिल की हैं. वकील एम एल शर्मा ने इस मामले पर पहली याचिका दायर की थी. 

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'कांग्रेस को सता रही पद के स्वतंत्रता की चिंता'

पीठ ने कहा, 'केंद्रीय कानून एजेंसी को नोटिस जारी किया जाए. मामले को 10 दिन बाद के लिए सूचीबद्ध किया जाए.' सुरजेवाला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ए एम सिंघवी ने शीर्ष अदालत के फैसलों का हवाला दिया और कहा कि निश्चित कार्यकाल स्वतंत्रता की पहचान है और इस तथ्य से कि पदाधिकारी को विस्तार मिल सकता है, पद की स्वतंत्रता ध्वस्त हो जाएगी. 

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सुनवाई के दौरान बेंच को सीवीसी और फेमा कानूनों के तहत ईडी निदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया के बारे में बताया गया. सिंघवी ने कहा कि CBI के विपरीत, ईडी निदेशक की नियुक्ति करने वाली समिति में केवल कार्यपालिका के लोग शामिल होते हैं. 

कार्यकाल बढ़ने के बाद भड़का विवाद

मामले में एक याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि वर्तमान ईडी निदेशक इस साल इस पद पर चार साल पूरे कर रहे हैं. पिछले साल 18 नवंबर को उनकी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले एक अध्यादेश जारी किया गया था, जिसमें उनके कार्यकाल को एक और साल के लिए बढ़ा दिया गया था. 

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कांग्रेस की मध्य प्रदेश इकाई की नेता जया ठाकुर की ओर से अधिवक्ता शशांक रत्नू और वरुण पेश हुए, जिन्होंने इस मामले में एक अलग जनहित याचिका दायर की है. अधिवक्ता एमएल शर्मा ने भी एक याचिका दायर की है. उन्होंने कहा है कि यह संवैधानिक योजना का उल्लंघन कर अध्यादेश पारित किया गया था. 

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कार्यकाल बढ़ाने के खिलाफ कुल 8 याचिकाएं दायर

कार्यकाल बढ़ाने के मुद्दे पर कुल आठ याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें से ज्यादातर में केंद्रीय सतर्कता आयोग (संशोधन) अधिनियम, 2021 को चुनौती दी गई है जिसमें ईडी निदेशक के कार्यकाल को पांच साल तक बढ़ाने का प्रावधान है. ईडी और सीबीआई निदेशकों को पद पर पांच साल तक रहने देने के लिए अध्यादेश लाए जाने के कुछ दिन बाद केंद्र ने 17 नवंबर, 2021 को ईडी प्रमुख संजय मिश्रा के कार्यकाल को 18 नवंबर, 2022 तक बढ़ा दिया था. (इनपुट: भाषा)

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