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Lok Sabha Elections 2024 से पहले लागू होगा CAA, जानिए क्या है ये कानून, क्यों है BJP का मास्टर स्ट्रोक

Lok Sabha Elections 2024 Updates: नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को साल 2019 में पड़ोसी देशों के गैर मुस्लिम शरणार्थियों को जल्द भारतीय नागरिकता देने के लिए लाया गया था. विपक्षी दल इसे मुस्लिम विरोधी बताते रहे हैं, जिसे भाजपा नकारती रही है.

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Lok Sabha Elections 2024 Updates: भाजपा ने लोकसभा चुनाव से पहले एक और बड़ा दांव खेलने की तैयारी कर ली है. सूत्रों के मुताबिक, चुनावी आचार संहिता लागू होने से पहले ही नागरिकता संशोधन कानून (CAA) 2019 के नियमों की अधिसूचना जारी हो सकती है. इसके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरी तैयारी कर ली है और कभी भी इस बात की घोषणा हो सकती है. ऐसा हुआ तो इसका बड़ा चुनावी प्रभाव हो सकता है, क्योंकि विपक्षी दल लगातार इस कानून को मुस्लिम विरोधी बताकर इसे खारिज करते रहे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार उनके आरोपों को गलत बताती रही है. CAA के विरोध में ही उत्तरपूर्वी दिल्ली में बड़ा दंगे समेत देश के कई हिस्सों में हिंसा भी हुई थी. ऐसे में अब इसे लागू करने पर चुनावों के समय सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की स्थिति बन सकती है, जिसका पूरा लाभ भाजपा और NDA में उसके सहयोगी दलों को मिलना तय माना जा रहा है.


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क्या है नागरिकता संशोधन कानून?

पीएम मोदी की सरकार ने साल 2019 में तत्कालीन नागरिकता नियमों में संशोधन वाला CAA (Citizenship Amendment Act) पेश किया था. इसका मकसद तीन मुस्लिम बहुल पड़ोसी देशों बांग्लादेश, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में प्रताड़ना के चलते पलायन कर भारत आने वाले गैरमुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को जल्द भारतीय नागरिकता देने का रास्ता साफ करना था. पड़ोसी देशों के प्रताड़ित अल्पसंख्यक समुदाय में हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, पारसी और ईसाई धर्म के लोगों को शामिल माना गया था, जबकि मुस्लिमों को इसके दायरे से बाहर रखा गया था.

इसके दायरे में उन्हीं शरणार्थियों को माना गया है, जो 31 दिसंबर, 2014 से पहले इन देशों से भारत में आकर शरणार्थी के तौर पर रजिस्टर्ड हुए हैं. संसद में दिसंबर, 2019 में CAA को हरी झंडी दिखा दी थी. इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह संशोधन कानून बन गया था. हालांकि इसके साथ ही पूरे देश में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन और हिंसा शुरू हो गई थी. CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस एक्शन में 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी. इसके बाद कोरोना महामारी आने से यह अब तक लागू नहीं हो सका था.


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अब लागू करने की हो गई है पूरी तैयारी

ANI के मुताबिक, गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा है कि CAA के प्रावधान किसी भी समय घोषित हो सकते हैं. यह काम आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) के लागू होने से पहले करने की तैयारी है. संभावना है कि आचार संहिता मार्च में किसी भी समय घोषित हो सकती है. केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के नोटिफिकेशन जारी करते ही CAA कानून लागू हो जाएगा, जिससे किसी भी व्यक्ति को भारतीय नागरिकता मिलना आसान हो जाएगा. 

शरणार्थी को नहीं देने होंगे फालतू दस्तावेज

सूत्र ने कहा, सीएए के प्रावधान तैयार हैं और नागरिकता देने की पूरी प्रक्रिया वाला ऑनलाइन पोर्टल पहले ही सेट किया जा चुका है. पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से ही पूरी होगी. आवेदक को बिना किसी दस्तावेज के भारत पहुंचने के साल की जानकारी देनी होगी. इसके अलावा कोई अतिरिक्त दस्तावेज देने की जरूरत नहीं होगी.

गृहमंत्री पहले ही कह चुके चुनाव से पहले ही लागू करने की घोषणा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने 27 दिसंबर CAA लागू करने की घोषणा की थी. उन्होंने कोलकाता में आयोजित पार्टी मीटिंग के दौरान यह घोषणा की थी. उन्होंने इस मामले में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) पर लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया था, जिनकी पार्टी TMC लगातार CAA का विरोध कर रही है. शाह ने कहा था कि सीएए को लागू होने से नहीं रोका जा सकता, क्योंकि यह देश की संसद से बना कानून है. 

भाजपा के लिए पहले ही रहा है ये चुनावी मुद्दा

देश में CAA लागू करने को भाजपा पहले से ही चुनावी मुद्दा बनाती रही है. BJP ने पिछले लोकसभा चुनाव (Lok Sabha Elections 2019) और पश्चिमी बंगाल विधानसभा चुनाव में भी इसे मुद्दा बनाया था. भगवा दल के नेताओं का मानना है कि इसे लागू करने से पश्चिमी बंगाल में भाजपा को बेहद लाभ होगा. 

क्या 4 साल बाद लागू करने में आएगी वैधानिक अड़चन?

  • संसदीय प्रक्रिया के मुताबिक, किसी भी कानून की गाइडलाइंस उसे राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के छह माह के अंदर जारी हो जानी चाहिए.
  • ऐसा नहीं होने की स्थिति में सरकार को लोकसभा और राज्यसभा की अधीनस्थ विधान पर स्थायी समितियों (Standing Committees on Subordinate Legislation) से एक्सटेंशन मांगना होता है.
  • केंद्रीय गृह मंत्रालय की तरफ से साल 2020 से लगातार CAA के नियमों को फ्रेमिंग करने की प्रक्रिया के लिए संसदीय समितियों से एक्सटेंशन लिया जाता रहा है.
  • इस एक्सटेंशन के कारण गृह मंत्रालय की तरफ से CAA को लागू करने की राह में कोई भी बाधा नहीं आएगी.

2021 में दी गई थी 1,414 शरणार्थियों को नागरिकता

केंद्रीय गृह मंत्रालय की 2021-22 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, 1 अप्रैल 2021 से 31 दिसंबर, 2021 के बीच पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए गैरमुस्लिम समुदाय के 1,414 शरणार्थियों को भारतीय नागरिकता मिली है. यह नागरिकता इन लोगों द्वारा नागरिकता कानून, 1955 के तहत किए गए आवेदन पर प्रक्रिया पूरी होने के बाद दी गई है.

क्या कहता है नागरिकता कानून, 1955

नागरिकता कानून, 1955 (Citizenship Act of 1955) के तहत 9 राज्यों में पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान से आने वाले गैर मुस्लिम शरणार्थियों को नागरिकता दी जा सकती है. इन 9 राज्यों में गुजरात, राजस्थान, छत्तीसगढ़, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र शामिल हैं. इन 9 राज्यों के गृह सचिव और 30 जिलों के जिलाधिकारियों को पिछले 2 साल के दौरान शरणार्थियों को इस कानून के तहत नागरिकता देने के लिए ऑथोराइज्ड किया गया है. असम और पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती जिलों में विदेशी शरणार्थी बड़ा ही संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है. इस कारण इन राज्यों के जिलों को नागरिकता देने का अधिकार अब तक नहीं दिया गया है. 

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