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क्या Russia कर रहा पश्चिमी देशों में जासूस भेजने की तैयारी?

रूस ने 1.74 लाख नए डिप्लोमैटिक पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया है. पढ़ें पुष्पेंद्र कुमार की रिपोर्ट

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (फाइल फोटो)

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 डीएनए हिंदीः यूक्रेन (Ukraine) पर रूस (Russia) के हमले के बाद से ही पश्चिमी देश लगातार रूस पर प्रतिबंध लगा रहे हैं. रूस दुनिया का सबसे ज्यादा प्रतिबंधों वाला देश बन गया है. राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित रूस के बड़े अधिकारियों और पुतिन के खास समझे जाने वाले लोगों पर तरह-तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. इन प्रतिबंधों से बचने के लिए रूस के विदेश मंत्रालय ने नई तरकीब निकाली है.

नए डिप्लोमैटिक पासपोर्ट प्रिंट करने के आदेश
रूस के विदेश मंत्रालय ने 1 लाख 74 हजार नए डिप्लोमैटिक पासपोर्ट को तेजी से प्रिंट करने के आदेश दिये हैं. इन पासपोर्ट को प्रिंट करने में करीब 3.3 मिलियन यूरो का खर्च आएगा. दिलचस्प बात ये है कि रूस के विदेश मंत्रालय में करीब 15 हजार कर्मचारी हैं. उनमें से भी सिर्फ एक तिहाई कर्मचारी ही डिप्लोमैटिक स्टेटस के काबिल है.

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इन्हें मिल सकता है डिप्लोमैटिक पासपोर्ट
ब्रिटेन के एक अखबार की रूस के मीडिया आउटलेट SOTA के हवाले से छपी रिपोर्ट के मुताबिक कानूनन रशिया की सिक्यूरिटी सर्विस FSB के कर्मचारी डिप्लोमैटिक पासपोर्ट ले सकते हैं लेकिन तब जब वो दूसरे देश में मिशन पर हों. इसी तरह FSO के अधिकारियों को भी डिप्लोमेटिक पासपोर्ट मिल सकता है. FSO यानि रशिया की वो एजेंसी जिसके कर्मचारी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित अन्य उच्च अधिकारियों की सुरक्षा में तैनात रहते हैं. रूस के सांसद, जज भी इस पासपोर्ट के हकदार हैं. जिसके पास ये पासपोर्ट होता है उसे कुछ देशों में वीज़ा की भी ज़रूरत नहीं होती. अधिकारियों के पति या पत्नी भी इस पासपोर्ट को हासिल कर सकते हैं. साथ ही वो खास सिविल सर्वेंट्स जो क्रेमिलन की ब्यूरोक्रेसी के लिए काम करते हैं वो भी इस पासपोर्ट के काबिल होते हैं.

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जासूसों और अधिकारियों को पश्चिम के देशों में भेजने की तैयारी?
रूस के विदेश मंत्रालय का नया आदेश ऐसे समय में आया है जब पश्चिमी देशों ने रूस के खास और एलीट वर्ग पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं जिससे उनके एक देश से दूसरे देश जाने पर लगाम लग गई है. सवाल उठता है कि आखिर विदेश मंत्रालय को 1 लाख 74 हजार डिप्लोमैटिक पासपोर्ट की जरूरत क्या है जब उसके पास सिर्फ 15 हजार अधिकारी ही हैं. उनमें से भी सिर्फ एक तिहाई कर्मचारी ही डिप्लोमेट हैं. शक होता है कि इन पासपोर्ट्स के जरिए रूस के अधिकारी और जासूस पश्चिम के देशों में जाने की फिराक में तो नहीं. अब दूसरा सवाल उठता है कि ये लोग पश्चिम के देशों में आखिर कहां जाने की योजना बना रहे हैं.

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