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Assassination of Shinzo Abe: इस बंदूक से हुई थी शिंजो आबे की हत्या, जापान में हैंडमेड हथियारों पर उठने लगे सवाल

Shinzo Abe killing: शिंजो आबे की हत्या के बाद एक बार फिर से जापान में हैंड मेड हथियारों के प्रोडक्शन पर सवाल खड़े हो रहे हैं. स्थानीय प्रशासन पर अनदेखी का आरोप भी लग रहा है.

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डीएनए हिंदी वेब डेस्क

Updated: Jul 10, 2022, 04:28 PM IST

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डीएनए हिंदी: जापान (Japan) के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे (Shinzo Abe) की हत्या ने देश को हिलाकर रख दिया है और इस घटना से कई सवाल खड़े हो रहे हैं. भीड़ से निकले एक व्यक्ति ने हाथ से बनी बंदूक से देश के सबसे दिग्गज नेताओं में शुमार आबे को गोली मार दी. यह बंदूक इतने बेतरतीब तरीके से बनी थी कि इसे टेप से जोड़ा गया था. 

पश्चिमी जापान के नारा शहर में शुक्रवार को सत्तारूढ़ पार्टी के प्रचार के दौरान आबे को मारने के लिए इस्तेमाल की गई 40 सेंटीमीटर लंबी बंदूक किसी नौसिखिये द्वारा निर्मित लग रही थी. यह टेप से लिपटे पाइप से बनी एक ऐसी प्रणोदक नजर आ रही थी, जो विस्फोटकों से भरी हुई थी. 

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पुलिस के मुताबिक, संदिग्ध के नारा स्थित एक कमरे वाले मकान की तलाशी के दौरान ऐसी कई और बंदूकें बरामद हुईं. पारंपरिक हथियारों के उलट हैंडमेड बंदूकों का पता लगाना व्यावहारिक रूप से असंभव होता है, जिससे जांच मुश्किल हो जाती है. 


जापान में कैसे होती हैं हत्याएं?

जापान में इस तरह के हथियारों का इस्तेमाल कम ही किया जाता है. देश में होने वाले ज्यादातर हमलों में या तो पीड़ित को चाकू घोंपने या वाहन से कुचलने या फिर गैसोलीन छिड़ककर आग लगाने जैसे तरीके अपनाए जाते रहे हैं. 

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हमलावर तेतसुया यामागामी ने संभवत: सख्त बंदूक नियंत्रण कानून के चलते हस्तनिर्मित हथियार चुना. वह जापान की नौसेना का पूर्व सदस्य है और हथियार बनाने व उनका इस्तेमाल करने की कला से वाकिफ है. 

3-डी प्रिंटर के जरिए तैयार हो रही है बंदू

शिंजो आबे पर हमले के बाद उसे घटनास्थल से ही गिरफ्तार कर लिया गया था. अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट पर बंदूक बनाने के दिशा-निर्देश आसानी से उपलब्ध हैं और 3-डी प्रिंटर के जरिए भी बंदूक तैयार की जा सकती है. 

कुछ विश्लेषकों ने शिंजो आबे पर हुए हमले को 'लोन-वोल्फ आतंकवाद' करार दिया है. ऐसे मामलों में साजिशकर्ता अकेले ही काम करता है, ज्यादातर मामलों में किसी राजनीतिक विचारधारा से प्रभावित होकर, जिससे अपराध का पहले से पता लगाना काफी मुश्किल हो जाता है. 

क्यों हुई थी शिंजो आबे की हत्या?

शिंजो आबे की हत्या के पीछे का मकसद अभी स्पष्ट नहीं है. जापानी मीडिया में प्रकाशित खबरों में दावा किया गया है कि संदिग्ध के मन में एक धार्मिक समूह के प्रति घृणा पैदा हो गई थी, जिससे उसकी मां इस कदर जुड़ी हुई थी कि उसके परिवार को आर्थिक दुश्वारियां झेलनी पड़ी थीं. 

खबरों में धार्मिक समूह का नाम जाहिर नहीं किया गया है. हालांकि, बताया जा रहा है कि आबे भी इस समूह के प्रति झुकाव रखते थे. जापान ने अतीत में भी कई नेताओं पर हमले देखे हैं. 1960 में आबे के दादा और तत्कालीन प्रधानमंत्री नोबुसुके किशी पर चाकू से हमला हुआ था, लेकिन वह बच गए थे. 

पहले भी हुई थी ऐसी हत्याएं

1975 में जब पूर्व प्रधानमंत्री इसाकु सातो के अंतिम संस्कार में तत्कालीन प्रधानमंत्री टेको मिकी पर हमला किया गया था, तब जापान ने अमेरिकी खुफिया सेवा की तर्ज पर एक सुरक्षा दल की स्थापना की थी. 

जापान में इंटरनेशनल बॉडीगार्ड एसोसिएशन के मुख्य कार्यकारी हिदेतो टेड ओसानाई और अन्य विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि जापानियों ने सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण रोकथाम मानसिकता के बजाय केवल सुरक्षा दस्ते के गठन जैसी सतही चीजें सीखी होंगी. 

जापान में सोते मिलते हैं सिक्योरिटी गार्ड

टोक्यो स्थित सुरक्षा कंपनी सेफ्टी-प्रो के अध्यक्ष यासुहिरो सासाकी ने कहा, ‘जापानी नागरिक इस कदर शांतिपूर्ण जीवन जीने के आदी हैं कि वहां सुरक्षागार्ड अकसर सोए हुए पाए जाते हैं.'

सासाकी के मुताबिक, उन्हें विश्वास नहीं हो रहा है कि पहली और दूसरी गोली मारे जाने के बीच की अवधि में कोई भी आबे की रक्षा के लिए आगे नहीं बढ़ा. यह एक ऐसा दृश्य है, जिसे राष्ट्रीय टेलीविजन पर बार-बार दिखाया गया. उन्होंने कहा कि सुरक्षाकर्मियों को आबे को खतरे से दूर खींचना चाहिए था. 

संदिग्ध व्यक्ति पर नजर रखने में फेल हुए सुरक्षाकर्मी

सासाकी के मुताबित इससे भी अहम यह है कि उन्हें सभा में एक संदिग्ध व्यक्ति के शामिल होने की जानकारी क्यों नहीं थी, जिसके बैग में हथियार था? इस तरह के जोखिमों पर काम करने वाले काउंसिल फॉर पब्लिक पॉलिसी के अनुसंधान प्रभाग के प्रमुख इसाओ इताबाशी ने कहा, 'प्रचार अभियान के दौरान सुरक्षा प्रदान करना चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि हमारे नेता लोगों के काफी करीब जाने की कोशिश करते हैं.'

जापान में बुलेटप्रूफ शीशे का नहीं होता है इस्तेमाल

इताबाशी के मुताबिक, अमेरिका के विपरीत जापान में बुलेटप्रूफ शीशे का इस्तेमाल न के बराबर होता है और सुरक्षा अधिकारी हमलावर को मारने का कदम भी कम ही उठाते हैं. उन्होंने कहा, 'यहां मान्यता है कि लोग हथियारबंद नहीं होते हैं.'

इताबाशी ने चिंता जताई कि 'कॉपीकैट अपराध' के तहत आने वाले दिनों में कुछ और लोग आबे की हत्या में इस्तेमाल हस्तनिर्मित बंदूक जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं. (AP इनपुट के साथ)

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