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कर्नाटक में अंग्रेजी साइन बोर्ड को लोगों ने तोड़ा, Viral वीडियो पर छिड़ी बहस

कर्नाटक में कन्नड़ भाषा के समर्थकों ने पहले भी दूसरी भाषाओं के इस्तेमाल पर नाराजगी जाहिर की है. एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

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कर्नाटक में अंग्रेजी साइन बोर्ड को लोगों ने तोड़ा, Viral वीडियो पर छिड़ी बहस

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो का स्क्रीनशॉट.

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कर्नाटक में अंग्रेजी साइन बोर्ड के खिलाफ कुछ लोग तोड़फोड़ पर उतर आए हैं. कुछ लोगों ने अंग्रेजी में लिखे कंपनियों के साइन बोर्ड को तोड़ा है. लाठी डंडों से लोग साइन बोर्ड तोड़ रहे हैं. यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. 

रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि अपराधी कांग्रेस पार्टी से जुड़े हुए हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को देखकर लोग नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. 

तोड़फोड़ कर रहे लोगों का कहना है कि साइन बोर्ड और होर्डिंग्स पर कन्नड़ भाषा का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो. ऐसा न करना मातृभाषा का अपमान है.


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देखिए कैसे साइन बोर्ड तोड़ रहे लोग

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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पहले भी हो चुकी है तोड़फोड़
दिसंबर 2023 में भी कर्नाटक में इसी तरह से तोड़फोड़ की गई थी. गैर-कन्नड़ बोर्ड और साइनेज वाली दुकानों और मॉल में पहले भी तोड़फोड़ की गई थी. तब कर्नाटक रक्षणा वेदिके के कार्यकर्ताओं ने लावेल रोड, एमजी रोड और ब्रिगेड रोड पर पर अंग्रेजी साइनबोर्ड और होर्डिंग तोड़ दिए थे.


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क्या है तोड़फोड़ की वजह
कर्नाटक में ऐसे आंदोलन की वजह कर्नाटक की आधिकारिक भाषा कन्नड़ का कथित अनादर रहा है. कन्नड़ समर्थकों का कहना है कि लोग साइनबोर्ड पर केवल कन्नड़ का इस्तेमाल करें.

कन्नड़ भाषाई संगठनों का कहना है कि व्यापारियों को साइनबोर्ड पर कन्नड़ का ही इस्तेमाल करना चाहिए. कर्नाटक में फीनिक्स मॉल ऑफ एशिया और व्हाइटफील्ड जैसे प्रतिष्ठानों पर पहले भी ऐसे हमले हुए हैं. मैकडॉनल्ड्स, स्टारबक्स, थर्ड वेव कॉफी, फॉरेस्ट एसेंशियल्स और थियोब्रोमा के आउटलेट पर भी हमले हो चुके हैं.

वायरल वीडियो पर क्या कह रहे हैं लोग
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो पर लोगों का कहना है कि ऐसे लोगों को सजा मिलनी चाहिए. कुछ यूजर्स ने लिखा कि क्या ऐसे लोग अपने स्मार्टफोन को भी कन्नड़ भाषा में चलाते हैं. कुछ लोगों ने कहा कि ऐसी भाषाई कट्टरता एक लोकतांत्रिक देश में ठीक नहीं है.

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