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मिसाल-18 साल की उम्र में यह लड़की बनी सेना में लेफ्टिनेंट, 80 दिन में किया 27 किलो वजन कम

ईशु यादव राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र के नावता गांव से है . इस गांव के ज्यादातर लोग सेना से जुड़े हैं. यहीं से ईशु को सेना में जाने की प्रेरणा मिली.

मिसाल-18 साल की उम्र में यह लड़की बनी सेना में लेफ्टिनेंट, 80 दिन में किया 27 किलो वजन कम

ishu yadav

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डीएनए हिंदी: वीर और वीरांगनाओं का क्षेत्र कहे जाने वाले शेखावाटी के हर गांव के लोग सेना से हैं. इस बार झुंझुनूं के नावता गांव की 18 साल की बेटी ईशु लेफ्टिनेंट बनीं है. ईशु गांव की पहली लड़की है, जिसका सेना में किसी बड़े पद पर चयन हुआ है. ईशु यादव ने मिलिट्री नर्सिंग सर्विस में लेफ्टिनेंट के पद पर 17वीं रैंक हासिल की है. आज उन्होंने लखनऊ में ट्रेनिंग की शुरुआत की है.  ईशु के आर्मी जॉइन करने की कहानी भी हैरान करने वाली है. जिस नावता गांव से ईशु है वहां से करीब 20 से 25 लोग सेना में हैं. बचपन में उसने जब शहीदों के किस्से सुने और गांव में इनकी प्रतिमा देखी तो आर्मी जॉइन करने की इच्छा परिवार के सामने रखीं.

ज्यादा वजन की वजह से फिजिकल टेस्ट में आई मुश्किल
28 जुलाई 2021 को एग्जाम दिया और क्लियर कर लिया. 28 अगस्त को इंटरव्यू और फिजिकल टेस्ट हुआ. लेकिन 27 किलो वजन ज्यादा होने से फिजिकल में पास नहीं हो पाईं. घरवालों को भी लगता था कि इतना वजन कैसे कम होगा. जब उनका चयन हुआ तो वजन 79 किलोग्राम वजन था. फिजिकल टेस्ट में उन्हें ओवर वेट का पॉइंट करके रेफर कर दिया. इसमें 27 किलोग्राम वजन ओवरवेट कंट्रोल करने का टास्क दिया गया, लेकिन ये बड़ी चुनौती थी. 

मंदिर की सीढ़ियां चढ़कर वजन कम किया
वजन कम करने के लिए ईशु ने गांव के ही सिद्ध बाबा मंदिर की सीढ़ियां चढ़नी शुरू की. ईशु ने बताया कि वजन कम करने के लिए रोजाना 880 सीढ़ियां चढ़ती और उतरतीं. इसके अलावा रोजाना 10 किलोमीटर तक दौड़ लगाना शुरू किया. डाइट का भी ध्यान रखा और दोपहर में एक चपाती के साथ सिर्फ जूस लिया. रिव्यू चांस में 40 दिन का और समय मिल गया. इस पर करीब 80 दिन में 27 किलो वेट कम कर फिजिकल भी क्वालिफाई कर लिया.

गांव वालों ने किया बेटी का स्वागत
लेफ्टिनेंट बनने के बाद गांववालों ने बेटी का स्वागत किया. इस गांव से अधिकांश युवा आर्मी में हैं. ईशु ने बताया कि मैं अकसर शहीदों के किस्से सुना करती थी. जब भी शहीदों की कहानियां और उनके बारे में पढ़ा-सुना तो मोटिवेशन मिला. ईशु ने बताया कि दादा प्रभाती लाल चाहते थे कि उनकी पोतियां डॉक्टर बनें. ईशु ने बताया कि ताऊ सुमेर सिंह, पापा जगदेव सिंह के मार्गदर्शन में 12वीं बायोलॉजी व मैथ्स एडिशनल से सीबीएसई बोर्ड से 2020 में 12वीं की परीक्षा दी. एमएनआईटी में प्रोफेसर रहे उनके फूफा आरपी यादव ने भी उन्हें पढ़ाया. ईशु ने मेडिकल एंट्रेस का एग्जाम भी दिया,लेकिन सलेक्शन नहीं हुआ. हालांकि अब वह सेना में लेफ्टिनेंट बनकर नाम रोशन कर रही हैं

रिपोर्ट- संदीप केडिया

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