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Kojagari Puja 2022: कोजागरी पूजा कब और कैसे करें, शुभ मुहूर्त, व्रत करने से मां लक्ष्मी की बरसेगी कृपा

Kojagari पूजा कैसे करें, कब करें, व्रत कब रखें और कैसे पूजा विधि पालन करें, शरद पूर्णिमा पर इसका महत्व क्या है, क्या है व्रत कथा

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डीएनए हिंदी वेब डेस्क

Updated: Oct 07, 2022, 11:09 AM IST

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डीएनए हिंदी: Kojagar Puja Vidhi, Shubh Muhurat And Vrat Katha- हिंदू धर्म में कोजागरी पूजा (Kojagari Puja) को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है. इसे कोजागर व्रत रखा जाता है. इस दिन यानि आश्विन मास की पूर्णिमा तिथि को माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है. बिहार, बंगाल, ओडिशा में महिलाएं यह व्रत रखती हैं. देशभर में यह दिन शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima 2022) के नाम से जाना जाता है. आईए जानते हैं कब है यह पूजा, विधि,महत्व और व्रत कथा क्या है. 

महत्व 

बंगाल में इसे लक्ष्मी पूजा भी कहते हैं, इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा होती है और कहते हैं मां की कृपा से कभी धन की कमी नहीं होती है. मान्यता के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी समुद्र मंथन के समय प्रकट हुई थीं,इसलिए शरद पूर्णिमा का त्योहार मां लक्ष्मी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.कहते हैं कि इस दिन रात में जागरण कर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने धन-धान्य की कोई कमी नहीं आती. कहते हैं शरद पूर्णिमा की रात अमृत बरसता है, इसलिए रात में चंद्रमा की रोशनी में खीर रखी जाती है फिर माता लक्ष्मी को भोग लगाया जाता है. ऐसा करने पर घर में सदा बरकत बने रहने का आशीर्वाद मिलता है.

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Kojagar Puja Shubh Muhurat 

कोजागर व्रत 9 अक्टूबर 2022 यानि रविवार के दिन मनाया जाएगा.
निशिता काल समय 23:44 से 24:33 तक
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - 08 अक्टूबर, 2022 को 27:42
पूर्णिमा तिथि समाप्त - 09 अक्टूबर, 2022 को 26:25

कोजागर व्रत पूजन विधि (Kojagar Pujan Vidhi in Hindi)

कोजागिरी व्रत वाले दिन प्रात:काल सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर लेना चाहिए.स्‍नान करने के बाद साफ स्‍वच्‍छ वस्‍त्र पहनने चाहिए.दिन भर व्रत का संकल्‍प लेन चाहिए.
मंदिर या पूजा स्‍थान पर लक्ष्‍मी जी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए. माता पर लाल रंग का वस्त्र अर्पित करना चाहिए.
देवी लक्ष्मी के मंत्र बोलते हुए घी का दीपक जलाना चाहिए.
माता लक्ष्मी पर फूल-माला अर्पित करने चाहिए करें.
मां लक्ष्मी को पंचामृत अर्पित करना चाहिए.
मां को पुष्‍प, ऋतुफल और नैवेद्य अर्पित करें उनकी आरती करनी चाहिए.
संध्या उपासना में भी इसी क्रम से पूजा करनी चाहिए.
माता को इस दिन मुख्य रुप से दूध से बनी खीर का भोग अवश्य लगाना चाहिए.
रात्रि में चंद्रमा के उदय होने पर घी 11 दीपक जलाने चाहिए.
चंद्रमा को कच्चे दूध और जल के मिश्रण से अर्घ्य देना चाहिए.
देवी लक्ष्‍मी की आरती करनी चाहिए. लक्ष्मी का श्रीसुक्त व लक्ष्मी स्तोत्र द्वारा लक्ष्मी को प्रसन्न करते हैं.
देवी लक्ष्मी को प्रसाद चढ़ाना चाहिए और प्रसाद को सभी लोगों में बांट देना चाहिए

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कोजागर व्रत कथा (Kojagar Vrat Katha in Hindi)

कोजागर व्रत करने के साथ-साथ इस दिन व्रत की कथा भी सुननी चाहिए. व्रत की कथा पढ़ने और सुनने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. प्राचीन समय की बात है मगध नामक एक राज्य हुआ करता था. उस राज्य में एक बहुत ही परोपकारी और श्रेष्ठ गुणों से युक्त ब्राह्मण रहा करता था. वह संपूर्ण गुणों से युक्त था किंतु गरीब था. वह ब्राह्मण जितना धार्मिक और परोपकारी था उसकी स्त्री उतनी उसके विपरित आचारण वाली थी. स्त्री उसकी कोई बात नही मानती थी और दुष्ट कार्यों को किया करती थी.ब्राह्मण की पत्नी गरीबी के चलते ब्राह्मण को बहुत अपशब्द कहा करती थी.वह अपने पति को दूसरों के सामने सदैव ही बुरा भला कहा करती थी उसे चोरी करने या गलत काम करने के लिए कहती थी.अपनी पत्नी के तानों से तंग आकर ब्राह्मण दुखी मन से जंगल की ओर चला जाता है.

उस स्थान पर उसकी भेंट नाग कन्याओं से होती है. नागकन्याओं ने ब्राह्मण का दुख पूछा और उसे आश्विन मास की पूर्णिमा को व्रत करने और रत में जागरण करने को कहा. लक्ष्मी को प्रसन्न करने वाला कोजागर व्रत बताने के बाद वह कन्याएं वहां से चली जाती हैं. ब्राह्मण घर लौट जाता है और आश्विन मास की कोजागर पूर्णिमा के दिन विधि-विधान के साथ देवी लक्ष्मी का पूजन करता है और रात्री जागरण भी करता है. व्रत के प्रभाव से ब्राह्मण के पास धन-सम्पत्ति आ जाती है और उसकी पत्नी की बुद्धि भी निर्मल हो जाती है. देवी लक्ष्मी के प्रभाव से वह दोनों सुख पूर्वक अपना जीवनयापन करने लगते हैं.

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. डीएनए हिंदी इसकी पुष्टि नहीं करता है.) 

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