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Himachal Pradesh: हिमाचल में जीतते ही बढ़ीं कांग्रेस की मुश्किलें, सीएम पद पर रार, कैसे थमेगा विवाद?

वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार हैं. सूबे की सियासत में उनकी मजबूत पैठ है लेकिन सत्ता के दावेदार कई हैं.

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हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ प्रियंका गांधी. (फोटो क्रेडिट- Twitter/INC)

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डीएनए हिंदी: हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में कांग्रेस (Congress)  के पास बहुमत है लेकिन नेतृत्व पर विधायक 'एकमत' नहीं हैं. राजस्थान और पंजाब की तरह अब सियासी कलह हिमाचल प्रदेश में भी सामने आ रहा है. सूबे की 68 विधानसभा सीटों में से 40 विधानसभा सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है. चुनावी जीत के क्रेडिट को लेकर सियासी खींचतान और गुटबंदी चल रही है. वीरभद्र सिंह की पत्नी प्रतिभा सिंह (Pratibha Singh), मुख्यमंत्री पद की सबसे प्रबल दावेदार हैं. उनका कहना है कि यह चुनाव उनके चेहरे पर लड़ा गया है, इसलिए सूबे की कमान उन्हें ही सौंपी जाए. वैसे भी वह राज्य कांग्रेस की अध्यक्ष हैं. 

शुक्रवार को दिनभर चली उठापटक के बाद पार्टी के भीतर लॉबिंग तेज हो गई है. नेतृत्व को लेकर रात करीब 8 बजे तक शिमला में बैठक चली लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला. बैठक में सिर्फ यही कहा गया है कि शीर्ष नेतृत्व पर फैसला पार्टी हाई कमान लेंगे. प्रतिभा सिंह के अलावा सुखविंदर सिंह सुक्खू और मुकेश अग्निहोत्री भी सीएम पद के दावेदार हैं.

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पर्यवेक्षक ले रहे हैं विधायकों की टोह

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने शिमला में अपने पर्यवेक्षक भेजे थे. सभी ने जीते हुए 40 विधायकों के अलग-अलग बातचीत की और उनसे मुख्यमंत्री पद के दावेदारों के बारे में कुछ सवाल पूछे गए. उनसे नेतृत्व को लेकर राय मांगी गई. पर्यपेक्षकों ने शुक्रवार को ही राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर से मुलाकात की थी. उन्होंने बताया कि कांग्रेस के पास बहुमत है. सरकार बनाने का दावा पेश करने से पहले विधायकों की औपचारिक बैठक भी बुलाई जाएगी. विधायक दल की बैठक से पहले कांग्रेस के सामने कई चुनौतियां हैं, जिन्हें नहीं संभाला गया तो स्थितियां राजस्थान और पंजाब जैसी हो सकती हैं.

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शिमला में कांग्रेस पार्टी के 12 दिग्गज पर्यवेक्षक पहुंचे हैं. उनमें छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, राज्य के कांग्रेस प्रभारी राजीव शुक्ला पहुंचे हैं. पर्यवेक्षकों का कहना है कि वे किसी का भी समर्थन नहीं करते हैं. उन्होंने 40 अलग-अलग विधायकों की राय ली है. अब किसे मुख्यमंत्री बनाया जाएगा,  इस पर फैसला आलाकमान करेगा.

हिमाचल प्रदेश में मुख्यमंत्री पद के कितने दावेदार?

राज्य कांग्रेस अध्यक्ष और मंडी से लोकसभा सांसद प्रतिभा सिंह, पूर्व अध्यक्ष सुखविंदर सिंह सुक्खू और निवर्तमान विधानसभा में विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री तीनों रेस में है. अगर सुखविंदर सिंह सुक्खू के बयानों को मानें तो उन्होंने साफ कहा है कि वे सीएम पद की रेस में नहीं हैं. ऐसा कहा जा रहा है कि ज्यादातर लोग चाहते हैं कि सुखविंद सिंह सुक्खू को नेतृत्व सौंपी जाए. कुछ प्रतिभा सिंह के समर्थक हैं और कुछ मुकेश अग्निहोत्री के. कांग्रेस का पर्यवेक्षक दल यह सोच ही नहीं पा रहा है कि किसे मुख्यमंत्री बनाया जाए.

प्रतिभा सिंह बढ़ा रही हैं कांग्रेस की मुश्किलें

कांग्रेस की जीत का सारा क्रेडिट प्रतिभा सिंह ले रही हैं. उनके एक बयान से कांग्रेस पशोपेश में पड़ गई है. प्रतिभा सिंह का कहना है मुख्यमंत्री पद की प्रबल दावेदार वही हैं. उन्होंने अपने पति और पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह का हवाला देते हुए दावेदारी पेश की. अब वे मुख्यमंत्री बनती हैं या नहीं इस पर फैसला मल्लिकार्जुन खड़गे को करना है. कांग्रेस अलाकमान ही तय करेगा कि सूबे की सत्ता कौन संभालेगा.

किस-किस में चल रही है टक्कर?

मुख्यमंत्री पद को लेकर लड़ाई सुखविंदर सिंह सुक्खू और प्रतिभा सिंह के बीच है. कांग्रेस चाहती है कि कमान एक ठाकुर नेता ही संभाले. दोनों इसी समुदाय से आते हैं. मुकेश अग्निहोत्री ब्राह्मण हैं. अब तक के इतिहास में हिमाचल प्रदेश में केवल एक ब्राह्मण मुख्यमंत्री रहा है. भारतीय जनता पार्टी के नेता शांता कुमार साल 1977 में और 1992 में मुख्यमंत्री बने थे. मुकेश अग्निहोत्री इस रेस में तो हैं लेकिन प्रबल दावेदार नहीं हैं.

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अब तक मंडी, हमीरपुर, शिमला और कांगड़ा से ही मुख्यमंत्री चुने जा रहे हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक दावा किया जा रहा है कि 12 विधायक मुकेश अग्निहोत्री के साथ हैं. सुखविंदर सिंह सुक्खू के पास करीब 15 विधायक हैं. प्रतिभा सिंह के पास भी करीब 20 विधायक हैं. यह अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. अभी तक कोई पुष्ट खबर इस संबंध में नहीं आई है.

प्रतिभा सिंह के एक बयान से मची खलबली

कांग्रेस विधायक दल की बैठक से पहले ही दावा ठोकते हुए प्रतिभा सिंह शुक्रवार को कुछ ऐसा कहा कि हंगामा हो गया. उन्होंने कहा, 'वे उनके परिवार की उपेक्षा नहीं कर सकते क्योंकि चुनाव उन्हीं के नाम पर, उनके चेहरे पर और उनके काम पर लड़ा गया था. ऐसा नहीं हो सकता कि आप उनका नाम, उनका चेहरा, उनके परिवार का इस्तेमाल करें और फिर उसका श्रेय किसी और को दें. आलाकमान ऐसा नहीं करेगा.'

तकरार पर तकरार, कैसे बनेगी सरकार?

मुख्यमंत्री पद की रेस से न तो बाहर सुखविंदर सिंह सुक्खू हुए हैं, न ही प्रतिभा सिंह. दोनों अड़े हुए हैं कि मुख्यमंत्री उन्हें ही बनाया जाए. कांग्रेस पर्यवेक्षक भी असमंजस में हैं कि क्या करें क्या न क्या करें. दोनों ने अलग-अलग पर्यवेक्षक दल से मुलाकात भी की है. अब देखते हैं कि गेंद किसके पाले में जाती है, कौन हिमाचल प्रदेश का मुख्यमंत्री बनता है.

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