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Wheat Export Ban: मैदा, सूजी और गेंहू के आटे के निर्यात पर लगी रोक, सरकार ने क्यों लिया यह फैसला

India Wheat Export: सरकार ने गेहूं के आटे, सूजी और मैदा के निर्यात पर रोक लगा दी है. इसके पहले मई में सरकार ने गेंहू के निर्यात पर रोक लगाई थी.

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डीएनए हिंदी: सरकार ने घरेलू स्तर पर गेंहू के आटे की कीमतों में वृद्धि देखते हुए अब एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने बढ़ती कीमतों पर रोक लगाने के लिए गेहूं के आटे, सूजी और मैदा के निर्यात (India Wheat Export) पर रोक लगा दी है. बता दें कि सरकार ने हाल ही में मई के महीने में गेहूं के निर्यात पर रोक लगाई थी. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (DGFT) ने एक नोटिफिकेशन जारी करते हुए बताया कि कुछ मामलों में भारत सरकार की अनुमति के मुताबिक इन वस्तुओं के निर्यात की इजाजत दी जाएगी.

दरअसल रूस और युक्रेन गेंहू के सबसे बड़े निर्यातक हैं. दुनिया भर में रूस और युक्रेन से लगभग एक चौथाई गेंहू का निर्यात होता है. दोनों देशों के बीच हो रहे युद्ध की वजह से गेंहू की सप्लाई (Wheat Export) में समस्या पैदा हो गई जिसका लाभ भारत को मिला. अब दूसरे देशों में गेंहू निर्यात करने की वजह से भारत में इसकी कमी बढ़ने की आशंका गहराने लगी और भारतीय मार्केट में इसके दाम में वृद्धि होने लगी जिसके बाद सरकार ने गेहूं के निर्यात (Wheat Export Ban) पर रोक लगा दी.

गेंहू के आटे में लगभग 17% की वृद्धि हुई

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के मुताबिक 22 अगस्त को भारत में गेंहू का खुदरा रेट 31.04 रुपये प्रति किलो था. यह पिछले साल के मुकाबले 22% ज्यादा है. एक साल पहले यानी अगस्त 2021 में  घरेलू बाजार में गेहूं का दाम 25.41 रुपये था. इस दौरान गेहूं के आटे की कीमत में एवरेज 17% की वृद्धि (Wheat Price Hike) दर्ज की गई है. गेंहू के आटे की कीमत में 5 रुपये का उछाल आया है. पहले इसकी कीमत 30.04 रुपये प्रति किलोग्राम थी जो अब 35.17 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है.

DGFT का नोटिफिकेशन

DGFT की नोटिफिकेशन के मुताबिक "वस्तुओं की निर्यात नीति (गेहूं या मेसलिन का आटा, मैदा, सूजी, साबुत आटा, और परिणामी आटा) को Free से निषिद्ध में संशोधित किया गया है." बता दें कि सूजी में रवा और सिरगी भी शामिल हैं. नोटिफिकेशन में कहा गया है कि विदेश व्यापार नीति 2015-20 के तहत संक्रमणकालीन व्यवस्था के प्रावधान इस नोटिफिकेशन के तहत लागू नहीं होंगे.

फसल के उत्पादन में 3% की गिरावट

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2021-22 में फसल के प्रोडक्शन में 3% की गिरावट दर्ज की गई है जिसकी वजह से खुदरा बाजार में गेहूं की कीमतों में वृद्धि हुई है.

यह भी पढ़ें:  Wheat Export Ban: भारत ने गेहूं के निर्यात पर लगाई रोक, जानिए सरकार को क्यों लेना पड़ा यह फैसला

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