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ITR Filing New Rule: अब शेयर बाजार में 10 लाख से ज्यादा निवेश पर रिटर्न दाखिल करना जरूरी, यहां जानिए नियम

ITR Filing: वित्तीय वर्ष 2022 के लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2022 थी. यदि आप इस समय सीमा को याद करते हैं तो आप 31 दिसंबर 2022 तक निर्धारित दंड के साथ अपना रिटर्न दाखिल कर सकते हैं.

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नेहा दुबे

Updated: Aug 03, 2022, 12:18 PM IST

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डीएनए हिंदी: क्या आप वित्त वर्ष 2022 के लिए रिटर्न (ITR) दाखिल करने से चूक गए हैं? घबराएं नहीं आपके पास 31 दिसंबर 2022 तक पेनल्टी के साथ आईटीआर (Income Tax Return) दाखिल करने का मौका है. अगर आप निवेशक हैं और शेयर बाजार में शेयरों और प्रतिभूतियों का सौदा करते हैं तो आपके लिए रिटर्न दाखिल करना जरूरी है. इनकम टैक्स के नियमों के मुताबिक अगर म्यूचुअल फंड (Mutual Fund), स्टॉक (Stock), बॉन्ड (Bond) या डिबेंचर (Debenture) में आपका निवेश एक वित्त वर्ष में 10 लाख रुपये से ज्यादा हो जाता है तो आपको अपने इनकम टैक्स रिटर्न में टैक्स डिपार्टमेंट को इसकी जानकारी देनी होगी. जानकारों का कहना है कि आपकी ओर से दर्ज किए गए इन उच्च-मूल्य वाले लेनदेन के बारे में आयकर विभाग को सब कुछ पता है चाहे आप खुद विभाग को सूचित करें या नहीं. एक वर्ष के दौरान किसी व्यक्ति द्वारा किए गए स्पेसिफिक वित्तीय लेनदेन पर नज़र रखने के लिए आयकर विभाग विभिन्न डेटा विश्लेषण तकनीकों (Data Analysis Techniques) का उपयोग करता है.

10 लाख रुपये से ज्यादा के निवेश पर ITR 

CA मनीष गुप्ता कहते हैं अगर एक वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड (Mutual Funds), स्टॉक, बॉन्ड या डिबेंचर में आपका निवेश 10 लाख रुपये से अधिक है तो आपको अपने आयकर रिटर्न में विभाग को सूचित करना होगा. अगर कोई करदाता ऐसे निवेश को आयकर विभाग से छिपाने की कोशिश भी करता ह, तो भी वह ऐसा नहीं कर पाएगा. ऐसा इसलिए है क्योंकि इस तरह के निवेश का विवरण करदाता के वार्षिक सूचना विवरण (AIS) और फॉर्म 26AS में आयकर पोर्टल पर खुद दिखाई देगा और विभाग को इसकी जानकारी मिल जाएगी.

धारा 143 और 148 में आ सकता है नोटिस

मनीष गुप्ता कहते हैं, अगर कोई व्यक्ति अपना आईटीआर फाइल नहीं करता है या जरूरत के मुताबिक निवेश के बारे में सही जानकारी नहीं देता है तो कर विभाग दंडात्मक कार्रवाई शुरू कर सकता है. निवेशक/करदाता आयकर अधिनियम की धारा 143 और 148 के तहत नोटिस प्राप्त कर सकते हैं. एक नोटिस जारी करके विभाग करदाता से ऐसे निवेशों के बारे में अलग-अलग विवरण मांग सकता है जैसे कि इस तरह के निवेश करने के लिए उपयोग किए जाने वाले धन का स्रोत क्या है.

इनकम टैक्स नोटिस से बचने का तरीका

निर्धारिती (Taxpayers/Investors) अक्सर अपनी आय का स्रोत दिखाने से बचते हैं या अपनी कर देयता को कम करने के लिए आईटीआर (ITR) में कम आय दिखाते हैं तो बता दें कि उनके वित्तीय लेनदेन की पूरी जानकारी आईटी विभाग के पास होती है. इसलिए बेहतर होगा कि इनकम टैक्स रिटर्न (Income Tax Return) दाखिल करते समय अपनी आय और निवेश के सभी स्रोतों का ठीक से खुलासा किया जाए. ऐसे में शेयरों या प्रतिभूतियों में निवेश पर नोटिस न मिले इसके लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

  • आपको नियत तारीख से पहले अपना आईटीआर दाखिल करना चाहिए.
  • आपको सभी TDS एंट्रीज़ को क्रॉस-चेक करना चाहिए और सत्यापित करना चाहिए कि आपके फॉर्म 26AS में रिपोर्ट किए गए उच्च मूल्य के लेनदेन सही हैं या नहीं.
  • आपको अपना आईटीआर दाखिल करने से पहले AIS सत्यापित करना चाहिए.
  • यदि एक वित्तीय वर्ष के दौरान आपकी निवेश राशि 10 लाख रुपये से अधिक है तो आपको शेयरों और प्रतिभूतियों में अपने निवेश का पूरा विवरण देना चाहिए.
  • आपको यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कर देयता, यदि कोई हो, की गणना सही ढंग से की जाती है और ऐसे लेनदेन पर कर का भुगतान किया जाता है.
  • आपको अपने सभी उच्च मूल्य वाले वित्तीय लेनदेन, निवेश और खर्चों का रिकॉर्ड रखना चाहिए.


अनुपालन के लिए कर विभाग का ई-अभियान

सीए मनीष गुप्ता कहते हैं, 'कर कानूनों के स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए आयकर विभाग ने करदाताओं की सुविधा के लिए एक ई-अभियान शुरू किया है.”

यह अभियान उन करदाताओं पर केंद्रित है जो रिटर्न दाखिल नहीं करते हैं या उनके आय विवरण में विसंगति/बेमेल है. इस ई-अभियान के तहत कर विभाग ने विभिन्न स्रोतों जैसे एसएफटी (SFT), टीडीएस (TDS), टीसीएस (TCS) आदि से प्राप्त जानकारी के आधार पर सत्यापन के बाद ईमेल या एसएमएस भेजा है.

ऐसी जानकारी मिलने पर करदाता को फीडबैक देना चाहिए, भले ही उसने अपना रिटर्न सही तरीके से दाखिल किया हो. इससे करदाता भविष्य में नोटिस से बच सकते हैं. अगर विभाग ई-अभियान संचार पर करदाता के जवाब से संतुष्ट नहीं है तो वह टैक्स रिटर्न की प्रक्रिया करेगा और धारा 143(1) के तहत उसे नोटिस जारी करेगा. इस तरह का नोटिस मिलने पर उसे उच्च मूल्य के लेनदेन पर अतिरिक्त कर देयता का भुगतान करना पड़ता है.


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