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एक आरटीआई के जवाब के अनुसार केंद्रीय बैंक ने 2020 में 2,000 रुपये की छपाई बंद कर दी थी.
डीएनए हिंदी: आपने आखिरी बार 2000 रुपये का नोट कब देखा था? शायद बहुत समय पहले. क्या इस दौरान आपको महसूस हुआ कि आखिर 2 हजार रुपये के नोट गायब कहां हो गए? अब तस्वीर थोड़ी साफ होती दिखाई दे रही है. दरअसल, पिछले तीन साल से 2,000 रुपये का एक भी नोट जारी नहीं किया गया है. ऐसे में यह नोट (2000 रुपये का नोट) प्रचलन में न के बराबर है. समाचार एजेंसी आईएएनएस द्वारा दायर सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई प्रतिक्रिया में यह खुलासा हुआ है.
आरबीआई का लक्ष्य अर्थव्यवस्था को तुरंत रीमोनेटाइज करना था. विमुद्रीकरण की घोषणा के समय प्रचलन में नोटों के कुल मूल्य का 80 फीसदी से अधिक अवैध रूप से रु. 500 और 1,000 रुपये करेंसी के नोट थे. यहां तक कि आरबीआई मुद्रा प्रेस में इन नोटों की प्रिंटिंग लगातािर हो रही थी, जिसकी वजह से इनती बड़ी संख्या में नोटों को बदलना लगभग असंभव था. 8 नवंबर 2016 को, सरकार ने 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों पर प्रतिबंध लगा दिया. उसके बाद नए नोटों की शुरुआत हुई, जिसमें 2,000 रुपये का नोट भी शामिल था.
बीते तीन सालों में 2,000 कितने जारी हुए?
आरटीआई के मुताबिक, 2019–20, 2020–21 या 2021–2022 में 2,000 रुपये के नोट की नहीं छापे गए हैं. वित्तीय वर्ष 2016-17 में, आरबीआई नोट मुद्रण (पी) लिमिटेड ने 2,000 रुपये के अंकित मूल्य के साथ 3,5429.91 करोड़ नोट छापे थे. इसके बाद, 2018-19 में सिर्फ 466.90 करोड़ नोट (2000 रुपये के नोट) छपे थे, जो 2017-18 में बहुत कम 1115.07 करोड़ के नोट छापे गए थे.
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नकली नोटों की मात्रा में भारी वृद्धि
2015 में, आरबीआई ने महात्मा गांधी सीरीज-2005 के सभी मूल्यवर्ग में एक नई नंबरिंग स्कीम वाले नए नोट जारी किए. विज़िबल सिक्योरिटी फंक्शन की बदौलत आम जनता रियल करेंसी से फेक करेंसी को जल्दी से अलग कर सकती है. फाइनेंशियल सिस्टम में खोजे गए अधिकांश नकली नोट (दो हजार रुपये के नोट) निम्न गुणवत्ता के थे, और किसी भी महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों का उल्लंघन नहीं किया गया था.
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार, संसद में हाल ही में सरकार ने जानकारी देते हुए बताया था कि देश में बरामद किए गए नकली 2,000 रुपये के नोटों की मात्रा 2016 और 2020 के बीच 2,272 से बढ़कर 2,44,834 हो गई है. रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में देश में कुल मिलाकर 2,272 नकली 2,000 रुपये के नोट पाए गए, 2017 में 74,898, 2019 में 90,566 और 2020 में 2,44,834 नोटों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई. आरटीआई प्रतिक्रिया के अनुसार, केंद्रीय बैंक ने 2020 में 2,000 रुपये की छपाई बंद कर दी थी.
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नकली नोटों को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया बैंकों को कई दिशा-निर्देश देता है. आरटीआई के अनुसार, केंद्रीय बैंक नियमित रूप से बड़ी मात्रा में नकदी संभालने वाले बैंकों और अन्य संस्थानों के कर्मचारियों/अधिकारियों के लिए जाली नोटों की पहचान पर ट्रेनिंग सेमिनार आयोजित करता है.
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