दुनिया
वायरस बेहद सूक्ष्म संक्रामक कारक है. यह जीवित कोशिकाओं में ही जन्म लेता है. इसी तरह का कोरोनवायरस था, जो एक से दूसरे में पहुंचकर उनके लिए जानलेवा साबित होता है, लेकिन दुनिया में सबसे घातक एक वायरल संक्रमण ऐसा है, जिसका पता मरीज की गंभीर स्थिति होने पर लगता है. यह जानलेवा होता है.
Most Dangerous Virus In World: कोविड से पहले दुनिया में ज्यादातर लोग वायरस को बहुत ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते थे, लेकिन कोरोना के बीच सैकड़ों मौतों की वजह बने वायरस ने सभी को डरा दिया. लोग कोरोना वायरस के नाम सुनते ही डर जाते हैं, लेकिन यही एक ऐसा वायरस नहीं हैं, जो बहुत घातक है. इसके अलावा भी एक और ऐसा वायरस है, जिसे दुनिया में सबसे खतरनाक माना जाता है. यह वायरस किसी लैब या गंदगी से नहीं, आपके आसपास घूमने वाले संक्रमित जानवरों से भी फैल सकता है. यह वायरस रेबीज है, जिसे दुनिया का सबसे घातक वायरल संक्रमण माना जाता है. यह इसलिए भी खतरनाक है क्योंकि इसमें मरीज को इसके लक्षण आने तक खुद पता नहीं लगता कि वह वायरस संक्रमित की चपेट में आ गया है. वहीं जब तक इसके लक्षण सामने आते हैं, तब तक मरीज के बचने की संभावन बेहद कम रह जाती है.
इसके संक्रमण के खतरनाक होने के पीछे इसका प्रभाव सबसे पहले व्यक्ति दिमाग और नर्वस सिस्टम पर अटैक करना है. ये वायरस शरीर में घुसते ही धीरे-धीरे नसों के जरिए मस्तिष्क तक पहुंचता है. इसी वजह से इसके असर को समझ पाना शुरुआत में बहुत मुश्किल होता है. डॉक्टर बताते हैं कि कई बार संक्रमित जानवर के काटने के बाद हफ्तों या महीनों बाद तक व्यक्ति सामान्य दिखाई देता है. लेकिन जैसे ही वायरस दिमाग तक पहुंचता है, स्थिति अचानक से बिगड़ने लगती है. यही वजह है कि रेबीज को “साइलेंट किलर वायरस” भी कहा जाता है.
रेबीज की सबसे खौफनाक बात इसकी लगभग 100 प्रतिशत मृत्यु दर मानी जाती है, खासकर तब जब लक्षण शुरू हो जाये. शुरुआत में बुखार, कमजोरी या घबराहट जैसे सामान्य संकेत दिख सकते हैं, लेकिन बाद में मरीज को पानी से डर लगना, बेचैनी, भ्रम और आक्रामक व्यवहार जैसी गंभीर समस्याएं होने लगती हैं, जो बेहद खतरनाक होती हैं. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि “हाइड्रोफोबिया” यानी पानी देखकर डरना रेबीज का सबसे बड़ा लक्षण है. मरीज पानी पीना चाहता है, लेकिन गले की मांसपेशियां अचानक सिकुड़ने लगती हैं. इससे दर्द और घबराहट बढ़ जाती है. कई मामलों में मरीज का व्यवहार इतना बदल जाता है कि परिवार वाले भी घबरा जाते हैं. यही वजह है कि अस्पतालों में ऐसे मरीजों की देखभाल करते समय डॉक्टर विशेष सावधानियां बरततें हैं.
आमतौर पर लोग रेबीज को सिर्फ कुत्तों से जोड़ते हैं, लेकिन यह वायरस कुत्तों के अलावा चमगादड़, लोमड़ी, बंदर समेत कई दूसरे जंगली जानवर से भी फैल सकता है. संक्रमण ज्यादातर संक्रमित जानवर की लार के जरिए फैलता है. यह लार अगर किसी व्यक्ति की स्किन पर कटे या घाव पर लग जाती है तो वहां संक्रमण फैलने का डर कई गुणा बढ़ जाता है. हालांकि सामान्य छूने, साथ बैठने या देखभाल करने से रेबीज नहीं फैलता. यही एक ऐसी गलतफहमी है, जिसके कारण कई लोग डर में मरीज से दूरी बना लेते हैं.
भारत में बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते होने की वजह से रेबीज सार्वजनिक स्वास्थ्य की बड़ी चुनौती बना हुआ है. गांवों और छोटे शहरों में कई लोग कुत्ते के काटने को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं. वहीं कई बच्चे तक घर में नहीं बताते हैं. यही लापरवाही बाद में जानलेवा साबित होती है. इससे बचाव के लिए कुत्ते या किसी भी अन्य जानवर के काटते ही सबसे पहले घाव को तुरंत ही साबुन और बहते पानी से साफ कर लें. डॉक्टर को दिखकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाये. सही समय पर वैक्सीन लगने से इस संक्रमण से बचाव संभव है.
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