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सूअर की किडनी और दिल लगवाया था, नहीं आए काम, 47 दिन बाद हुई इस महिला की मौत

महिला ने अप्रैल में अपना ट्रांसप्लांट कराया था. उस समय ही महिला का ऑपरेशन सफल रहने की कम संभावना जताई गई थी. इसके बावजूद महिला यह चांस लेने को तैयार हो गई थी.

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सूअर की किडनी और दिल लगवाया था, नहीं आए काम, 47 दिन बाद हुई इस महिला की मौत

Lisa Pisano का इस साल अप्रैल में ट्रांसप्लांट किया गया था.

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करीब ढाई महीने पहले स्वास्थ्य क्रांति कहा गया एक प्रयोग फेल हो गया है. अपने शरीर में सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाली महिला की सर्जरी के 47 दिन बाद मौत हो गई है. इस बात की घोषणा महिला के शरीर में सूअर की किडनी और उसके दिल की धड़कन चलाए रखने वाले एक हार्ट पंप को ट्रांसप्लांट करने वाले सर्जन ने की है. सर्जन ने कहा कि 54 वर्षीय बहादुर महिला लीसा पिसानो की मौत मंगलवार को उस समय हो गई, जब उसके अंगों ने काम करना बंद कर दिया. 

मौत के करीब थी महिला, तब कराया था ट्रांसप्लांट

लीसा पिसानो का अप्रैल में अमेरिका के NYU लैंगून हेल्थ सेंटर में एक के बाद एक लगातार दो सर्जरी करते हुए ट्रांसप्लांट किया गया था. न्यू जर्सी निवासी लीसा उस समय मौत के मुहाने पर खड़ी थीं और उन्हें रोजाना अपने गुर्दे (Kidney) का डायलासिस कराना पड़ रहा था. लीसा ने उस समय सूअर की किडनी अपने शरीर में ट्रांसप्लांट कराने के प्रयोग को मंजूरी दी थी. 

पहले से जानती थी कि मौत होगा परिणाम

लीसा ने कहा था कि मैं जानती हूं सूअर की किडनी शायद काम नहीं करेगी, लेकिन मैं बस एक चांस लेना चाहती हूं. बेहद खराब परिणाम रहने पर हो सकता है कि शायद यह मेरे लिए काम ना करे, लेकिन इससे मिली जानकारी की बदौलत यह किसी दूसरे के लिए काम आ सकता है.

सफल रहा था ऑपरेशन, दिल की दवाइयां पड़ गईं भारी

पिसानो का ट्रांसप्लांट करने वाले सर्जन डॉ. रॉबर्ट मांटगोमरी ने कहा, 'पिसानो के शरीर में सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट करने का प्रयोग पूरी तरह सफल रहा था. वह तेजी से रिकवर कर रही थीं, लेकिन 47 दिन बाद हमें उनके शरीर से दोबारा सूअर की किडनी हटाकर उन्हें डायलासिस पर रखना पड़ा, क्योंकि दिल के लिए दी जा रही दवाइयों ने उनके अंगों को डैमेज कर दिया था.' डॉ. रॉबर्ट ने पिसानो की तारीफ करते हुए कहा,'मैं पिसानो की बहादुरी को सलाम करता हूं, जिन्होंने लेटेस्ट पिग ऑर्गन-टू-ह्यूमन एक्सपेरिमेंट के लिए प्रयास करने में खुद का योगदान दिया. जेनोट्रांसप्लांटेशन (Xenotransplantation) कहलाने वाले इस प्रयोग का लक्ष्य इंसानों में ट्रांसप्लांटेशन के लिए अंगों की कमी को एक दिन खत्म करना है.'

दूसरी बार फेल हुआ है ये प्रयोग

किसी इंसान में सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट करने का प्रयोग फेल होने का यह दूसरा मामला है. इससे पहले रिचर्ड स्लेमैन नाम वाले एक मरीज को सूअर की किडनी ट्रांसप्लांट की गई थी, लेकिन उनकी भी दो महीने बाद मौत हो गई थी. उनकी मौत का कारण डॉक्टरों ने पहले से दिल की बीमारी से पीड़ित होना बताया था.

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