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Shocking News: महिला की मौत एक रेयर एलर्जी रिएक्शन के कारण हुई है, जो उन्हें सीटी स्कैन की प्रक्रिया के कारण हुआ था.
Shocking News: किसी भी बीमारी का पता लगाने के लिए आजकल एक्सरे, एमआरआई से लेकर CT Scan तक कराया जाना आम बात हो गई है. डॉक्टर छोटे-छोटे मामले में इन टेस्ट को कराने के लिए कहते हैं. अमूमन ये सारी प्रक्रिया पूरी तरह सुरक्षित मानी जाती हैं यानी इनका हेल्थ पर कोई साइड इफेक्ट नहीं होता है. लेकिन अब एक ऐसी घटना हुई है, जो इस पर दोबारा सोचने को मजबूर कर देगी. ब्रिटेन में एक महिला की मौत सीटी स्कैन के दौरान मशीन के अंदर ही हो गई. इसका कारण एक रेयर एलर्जी रिएक्शन को माना जा रहा है, जो महिला को सीटी स्कैन प्रक्रिया के कारण हुआ था. आइए आपको पूरी बात बताते हैं.
सीटी स्कैन के लिए पिलाया था लिक्विड
डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, यह शॉकिंग घटना ब्रिटेन के नॉर्थम्पटन जनरल हॉस्पिटल में हुई है, जहां 66 साल की एक महिला इवोन ग्राहम पेट में सूजन की जांच कराने आई थीं. ग्राहम की बेटी योलांडा के अनुसार, डॉक्टर ने उनकी मां को सीटी स्कैन कराने के लिए भेजा था. स्कैन में शरीर के अंदर के अंग स्पष्ट रूप से दिखाई दें. इसके लिए उनकी मां को एक विशेष कलर लिक्विड पिलाया गया था. यह लिक्विड ही उनकी मौत का कारण बन गया है.
स्कैन के दौरान ही आ गया महिला को कार्डियक अरेस्ट
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला को स्कैनिंग मशीन के अंदर ही लिक्विड इंजेक्ट होने के तत्काल बाद सांस लेने में दिक्कत होने लगी थी. इसके बाद उन्हें कार्डियक अरेस्ट आया और उनकी वहीं पर मौत हो गई. डॉक्टरों की उन्हें बचाने की सारी कोशिश फेल हो गई. यह घटना करीब 10 महीने पहले हुई थी, जिसकी ऑटोप्सी रिपोर्ट अब सामने आई है. इस ऑटोप्सी रिपोर्ट से ही परिवार को मौत का असली कारण पता चला है.
रेयर एलर्जी रिएक्शन के कारण आया था कार्डियक अरेस्ट
योलांडा ने बताया कि ऑटोप्सी रिपोर्ट में उनकी मां को एक रेयर एलर्जिक रिएक्शन के कारण कार्डियक अरेस्ट आया था. इसे 'एनाफिलेक्टिक रिएक्शन' कहते हैं. रिपोर्ट में साफ है कि सीटी स्कैन के दौरान दिए लिक्विड ने उनकी मां के शरीर के प्रति असामान्य और घातक प्रतिक्रिया दी, जिससे उनकी हालत तेजी से बिगड़ गई.
अस्पताल की लापरवाही है जिम्मेदार
इवोन की बेटी योलांडा ने अपनी मां की मौत के लिए अस्पताल की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि मेरी मां को किडनी की तीसरे चरण की बीमारी थी. ऐसे में उन्हें स्कैन के दौरान लिक्विड नहीं देना चाहिए था. स्कैन रूम में इमरजेंसी के लिए एपिपेन (Anaphylaxis के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन) मौजूद होता, तो भी मेरी मां की जान बचाई जा सकती थी. हमें कारण पता लगने में पूरा 10 महीने का समय लग गया. यह समय क्यों लगा? यह पूरी तरह अस्वीकार्य है और मैं इससे बेहद नाराज हूं. नॉर्थम्प्टनशायर यूनिवर्सिटी हॉस्पिटल्स की मुख्य नर्स जूली हॉग ने इस मामले को दुखद बताया है और भविष्य में ऐसी घटना रोकने के लिए उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है.
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