दुनिया
पाकिस्तान पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं. इसके बाद भी अंतरराष्ट्रीय संगठन बार-बार पाकिस्तान को कर्ज देते रहते हैं. क्या इसके पीछे इन संगठनों की कोई मजबूरी है?
एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने पाकिस्तान का 800 मिलियन डॉलर का कर्ज मंजूर कर दिया है. इससे पहले मई महीने की शुरुआत में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया है. अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पाकिस्तान को इस उम्मीद में कर्ज देती हैं कि वो इन पैसों का इस्तेमाल अपने देश की अर्थव्यस्था को मजबूत बनाने के लिए करेगा. हालांकि, कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि कर्ज का इस्तेमाल पाकिस्तान अपनी सेना को मजबूत करने के लिए करता है.
भारत ने ADB की तरफ से पाकिस्तान को दिए गए लोन का विरोध किया है. भारत का कहना है कि पाकिस्तान कर्ज के पैसों का गलत इस्तेमाल कर सकता है. भारत ने आशंका जताई है कि अंतरराष्ट्रीय संगठनों से मिलने वाले कर्ज का इस्तेमाल पाकिस्तान देश के विकास की जगह सेना पर कर सकता है. भारत ने कहा कि कर्ज मिलने के बाद भी पाकिस्तान आर्थिक रिफॉर्म नहीं कर रहा है. भारत ने पाकिस्तान की खराब गवर्नेंस और आर्थिक मामलों पर सेना के दखल को भी हाईलाइट किया. इसके साथ ही भारत ने ADB के सामने ये तर्क भी रखा कि पाकिस्तान FATF के नियमों का पालन नहीं कर रहा है.
सबसे बड़ा कारण तो ये है कि पाकिस्तान की माली हालत बेहद खराब है और उसने अंतरराष्ट्रीय संगठनों से भारी लोन लिया हुआ है. पाकिस्तान के ऊपर 130 अरब डॉलर से भी ज्यादा का कर्ज है. ऐसे में अगर पाकिस्तान डूबता है तो इन संस्थाओं के 130 अरब डॉलर भी डूब जाएंगे. इस वजह से अंतरराष्ट्रीय संगठन पाकिस्तान को बार-बार लोन देते हैं, ताकि वो आर्थिक सुधार कर सके और अपनी अर्थव्यवस्था को ट्रैक पर ला सके. अर्थव्यस्था ट्रैक पर आएगी तभी पाकिस्तान अपना कर्ज पूरा चुका पाएगा.
कर्ज देने का दूसरा बड़ा कारण अमेरिका और चीन के बीच तनाव है. चीन ने पाकिस्तान को बीते कुछ सालों में काफी लोन दिया है. अमेरिका चाहता है कि पाकिस्तान पर चीन का प्रभाव कम हो ताकि उसका दबदबा बना रहे. इस वजह से भी पश्चिमी देश पाकिस्तान को कर्ज देते हैं.
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