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भारत के मना करने के बावजूद पाकिस्तान संग सीजफायर के लिए क्यों ट्रंप को जिम्मेदार मान रहा है रूस?

पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव के अनुसार, ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को एक फ़ोन कॉल के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार सैन्य आक्रमण और जवाबी हमले पर बात की. उशाकोव के मुतबिक सीजफायर यदि हुआ तो ये सिर्फ ट्रंप के कारण ही संभव हुआ है.

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भारत के मना करने के बावजूद पाकिस्तान संग सीजफायर के लिए क्यों ट्रंप को जिम्मेदार मान रहा है रूस?
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नई दिल्ली की ओर से बार-बार खंडन के बावजूद, मॉस्को ने अब संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे का लगभग समर्थन कर दिया है कि पिछले महीने भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चली सीमा पार की झड़प को रोकने में उनकी भूमिका थी.

ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को एक फ़ोन कॉल के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार सैन्य आक्रमण और जवाबी हमले पर बात की. पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव के अनुसार,जहां उन्होंने मुख्य रूप से यूक्रेन में रूस के 'विशेष सैन्य अभियानों' और इस्तांबुल में दोनों पक्षों के बीच दूसरे दौर की सीधी वार्ता पर चर्चा की, वहीं दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति के साथ-साथ 'भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष' पर भी बात की.

पुतिन के वरिष्ठ सहयोगी ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध विराम कराने के अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों को विश्वसनीय बताया, वहीं विपक्षी कांग्रेस ने नई दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार पर निशाना साधा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से स्पष्टीकरण मांगा.

पिछले कुछ हफ्तों में नई दिल्ली ने बार-बार अमेरिका के दावे को खारिज किया और जोर देकर कहा कि भारत ने पाकिस्तान के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है और 10 मई को चार दिवसीय सीमा पार सैन्य हमले को रोकने के लिए द्विपक्षीय रूप से समझौता किया है.

ट्रंप  और पुतिन के बीच फोन कॉल के बारे में मॉस्को में क्रेमलिन में पत्रकारों को जानकारी देते हुए उशाकोव ने कहा, 'इसके अलावा, मध्य पूर्व के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र संघर्ष पर भी चर्चा हुई, जिसे राष्ट्रपति ट्रम्प की व्यक्तिगत भागीदारी से रोक दिया गया है.

गौरतलब है कि कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने एक्स पर पोस्ट किया, 'राष्ट्रपति पुतिन के सहयोगी यूरी उशाकोव ने अभी-अभी खुलासा किया है कि 4 जून को राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच 75 मिनट की टेलीफोनिक बातचीत में 4 दिवसीय भारत-पाकिस्तान संघर्ष का मुद्दा उठा था.'

'उशाकोव ने यह बता दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप की व्यक्तिगत भागीदारी के कारण ही भारत और पाकिस्तान के बीच सशस्त्र शत्रुता रुकी थी. क्या प्रधानमंत्री @नरेंद्र मोदी स्पष्टीकरण देंगे?' रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर पूछा.

ध्यान रहे कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने बार-बार 'युद्ध विराम' का श्रेय लिया, जिसके बारे में उनका कहना है कि उनके प्रशासन ने भारत और पाकिस्तान के बीच 'खराब परमाणु युद्ध' में लाखों लोगों की मौत को रोकने के लिए यह कदम उठाया था.

हालांकि, नई दिल्ली ने अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को खारिज कर दिया और जोर देकर कहा कि सीमा पार से हमले रोकने का प्रस्ताव 10 मई को इस्लामाबाद की ओर से आया था, जब भारत द्वारा मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण पाकिस्तान के एयरबेस और अन्य सैन्य प्रतिष्ठानों को भारी नुकसान पहुंचा था.

संघर्ष विराम कराने के बारे में ट्रंप  के दावे, तथा कश्मीर विवाद को सुलझाने में नई दिल्ली और इस्लामाबाद की मदद करने की उनकी पेशकश, भारत के इस रुख के विपरीत है कि पाकिस्तान के साथ 1972 के शिमला समझौते और 1999 के लाहौर घोषणापत्र ने दोनों दक्षिण एशियाई पड़ोसियों के बीच मुद्दों को सुलझाने में किसी तीसरे पक्ष की भूमिका निभाने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी थी.

हालांकि, ट्रंप की टिप्पणियों से संकेत मिलता है कि दक्षिण एशिया में परमाणु संघर्ष के डर ने ही अमेरिका को भारत और पाकिस्तान को सीमा पार सैन्य कार्रवाइयों को रोकने के लिए अपने प्रयासों को बढ़ाने के लिए प्रेरित किया. हालांकि, मोदी ने कहा कि कोई भी 'परमाणु ब्लैकमेल' अब पाकिस्तान द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ भारत की कड़ी प्रतिक्रिया को विफल नहीं कर पाएगा.

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