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कितने खास हैं B2 Bomber जिनका इस्तेमाल US ने ईरान पर हमले में किया? खूबियां हैरान कर देंगी

अमेरिका ने ईरान पर हमला कर दिया है. US ने अपने B2 Bomber से ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट्स पर बम गिराए. अमेरिकी राष्ट्रपति ने डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सबसे सुरक्षित न्यूक्लियर फेसिलिटी फोर्डो तबाह हो गया गया है.

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कितने खास हैं B2 Bomber जिनका इस्तेमाल US ने ईरान पर हमले में किया? खूबियां हैरान कर देंगी

ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने B2 Stealth Bomber का इस्तेमाल किया. (फोटो- screengrab from Reuters Video)

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ईरान और इज़राइल के बीच जब से युद्ध शुरू हुआ है तब से ही कयास लगाए जा रहे थे कि अमेरिका युद्ध में इजराइल की मदद करेगा. रविवार 22 जून को अमेरिका इस युद्ध में कूद गया और उसने ईरान की तीन न्यूक्लियर साइट्स पर बम गिराए. डोनाल्ड ट्रंप ने हमले का ऐलान करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान पर हमले के लिए दो B-2 Stealth Bombers का इस्तेमाल किया. इन दो B-2 Bombers से अमेरिका ने ईरान के सबसे सुरक्षित फोर्डो न्यूक्लियर बेस पर 6 बंकर बस्टर बम गिराए, वहीं नतांज़ और इसफहान पर हमले के लिए अमेरिका ने 30 टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल किया.

क्या हैं B-2 Bomber?

B-2 stealth bomber अमेरिकी वायुसेना के सबसे खास हथियारों में से एक है. stealth का मतलब होता है शोर न मचाने वाला. अमेरिका लंबे समय से इस तरह के ऑपरेशंस में अपनी stealth टेक्नोलॉजी का ही इस्तेमाल कर रहा है. B-2 stealth bomber साल 1989 से अमेरिकी वायुसेना का अभिन्न हिस्सा है. 

B-2 stealth bomber रडार में आसानी से डिटेक्ट नहीं होता है. आवाज़ कम होने की वजह से इसे डिटेक्ट करना मुश्किल होता है. यह किसी भी ऑल्टीट्यूड में उड़ सकता है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये सबसे एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम्स की नजर में आने से भी बच जाता है. यह इस तरीके से डिज़ाइन किया गया है कि किसी रडार में दिखने पर यह एक छोटे पक्षी जैसा लगता है. इसके साथ ही एक बार के फ्यूल रीफिल में यह हवा में 11 हजार किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है. 


ये भी पढ़ें- ईरान-इजराइल युद्ध में कूदा अमेरिका: ईरान की 3 न्यूक्लियर साइट्स पर गिराए बम, किया फोर्डो को तबाह करने का दावा


ट्रंप ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर क्यों किया हमला?

ईरान न्यूक्लियर हथियार बनाने की प्रक्रिया में था. अमेरिका इस कोशिश में था कि ईरान ऐसा न करे. इसे लेकर अमेरिका और ईरान के बीच न्यूक्लियर डील भी होने वाली थी. बीते रविवार यानी 15 जून को न्यूक्लियर डील को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच चर्चा भी होने वाली थी, हालांकि इससे पहले ही इज़राइल ने ईरान पर हमला कर दिया. इतना ही नहीं इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने दावा कर दिया कि इस लड़ाई में अमेरिका इजराइल का साथ देगा. इसके बाद ईरान ने न्यूक्लियर वार्ता को ये कहकर टाल दिया कि युद्ध की आशंका के बीच वो इस चर्चा का हिस्सा नहीं बन सकता है.

शुरुआत में ट्रंप को उम्मीद थी वो न्यूक्लियर डील के लिए ईरान को मना लेंगे, इसलिए वो दोहराते रहे कि ईरान जल्दी से न्यूक्लियर डील कर ले. इसके साथ ही वो ईरान को चेतावनी भी देते रहे कि ईरान ने अमेरिका पर किसी भी तरीके से हमला किया तो उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. माना जा रहा है कि ईरान के न्यूक्लियर प्रोग्राम को आगे बढ़ने से रोकने के लिए ट्रंप ने ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर अटैक करवाए.

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