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Sri Lanka Crisis: गोटबाया के इस्तीफा के बाद तीन-तरफा हुई राष्ट्रपति पद की लड़ाई, इन नेताओं ने ठोका दावा

Sri Lanka Crisis: गोटबाया राजपक्षे इस्तीफे के बाद रानिल विक्रमसिंघे, श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (SLPP) के सांसद डलेस अलहप्परुमा और विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा गुप्त का नाम राष्ट्रपति के लिए सामने आ रहा है.

Sri Lanka Crisis: गोटबाया के इस्तीफा के बाद तीन-तरफा हुई राष्ट्रपति पद की लड़ाई, इन नेताओं ने ठोका दावा

राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे ने दिया इस्तीफा

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डीएनए हिंदी: श्रीलंका में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे (Gotabaya Rajapaksa) के इस्तीफे के बाद राजनीतिक संकट और गहरा गया है. भारी संख्या में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और संसद की ओर मार्च कर रहे हैं. इसको देखते हुए श्रीलंका में आपातकाल (Emergency) लगा दिया गया है. खबर है कि वो श्रीलंका छोड़कर मालदीव की राजधानी माले पहुंच गए हैं. इस बीच श्रीलंका में राष्ट्रपति पद को लेकर भी सिसायत गर्मा गई है.  श्रीलंका के अगले राष्ट्रपति के चयन के लिए 20 जुलाई को संसद की मंजूरी मिलने के बाद तीन तरफा लड़ाई होने वाली है.

मीडिया रिपोट्स् के मुताबिक, प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, श्रीलंका पोदुजाना पेरामुना (SLPP) के सांसद डलेस अलहप्परुमा और विपक्ष के नेता साजिथ प्रेमदासा गुप्त मतदान में राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन पत्र जमा करने पर विचार कर रहे हैं. राष्ट्रपति का पद श्रीलंका के इतिहास में पहले बार तब खाली हुआ था जब 1 मई 1993 को राष्ट्रपति आर प्रेमदासा की हत्या हुई थी. डेली मिरर की रिपोर्ट के अनुसार, गोटाबाया राजपक्षे के इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति पद खाली हो गया है. नए राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए संसद 20 जुलाई को गुप्त मतदान करेगी. 

अलहप्परुमा का समर्थन 10 पार्टियां
डेली मिरर के सूत्रों के मुताबिक, विक्रमसिंघे वर्तमान राष्ट्रपति पद के बाकी कार्यकाल को पूरा के लिए इस पद के लिए चुनाव लड़ेंगे. एसएलपीपी का एक वर्ग उनका समर्थन करने की योजना बना रहा है, जबकि एसएलपीपी का एक अन्य गुट जिसमें 10-पार्टी गठबंधन भी शामिल है, अलहप्परुमा का समर्थन करने की ठान चुका है. डेली मिरर ने बताया कि इससे पहले समागी जन बालवेगया ने घोषणा की थी कि साजिथ प्रेमदासा इसके अध्यक्ष पद के उम्मीदवार होंगे.जनता विमुक्ति पेरामुन (जेवीपी) पार्टी का कहना है कि संसद के अध्यक्ष महिंदा यापा अभयवर्धने को नियुक्त किया जाना चाहिए.

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राजनीतिक संकट से जूझ रहा श्रीलंका
2 करोड़ 20 लाख की आबादी वाला श्रीलंका (Sri Lanka) पिछले कुछ महीनों से आर्थिक और राजनीतिक संकटों से जूझ रहा है. इस पड़ोसी देश में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को देश छोड़कर भागना पड़ा. साल 1948 में स्वतंत्रता मिलने के बाद से इस समय श्रीलंका सबसे खराब आर्थिक स्थिति से गुजर रहा है. देश में महंगाई के कारण बुनियादी चींजों की कीमतें आसमान छू रही हैं. विरोध प्रदर्शन भी इस तरह हिंसक होता जा रहा है कि प्रधानमंत्री के आवास को लोगों ने आग के हवाले कर दिया, जबकि राष्ट्रपति भवन पर प्रदर्शनकारियों ने कब्जा कर लिया. 

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