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Russia Ukraine War: आखिर वही हुआ जिसकी आशंका थी, रूसी सेना का चेर्नोबिल पर कब्जा 

रूसी सेना ने आज हमले के बाद चेर्नोबिल पर कब्जा कर लिया है. यूक्रेन के प्रधानमंत्री ने खुद इसकी पुष्टि की है. पहले से ही इसकी आशंका जताई जा रही थी.

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Russia Ukraine War: आखिर वही हुआ जिसकी आशंका थी, रूसी सेना का चेर्नोबिल पर कब्जा 
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डीएनए हिंदी: रूस की सेना ने हमले के बाद अब यूक्रेन में काफी अंदर तक घुस गई है. रूस के प्रधानमंत्री डेन्यस श्माएल (Denys Shmyhal) ने रूसी सेना के चेर्नोबिल इलाके पर कब्जा करने की पुष्टि की है. इस बात की आशंका पहले से ही जताई जा रही थी कि रूस चेर्नोबिल पर कब्जा कर सकता है. रूस के राष्ट्रपति ने तो इशारों में परमाणु हमले तक की धमकी दे दी है. 

यूक्रेन के राष्ट्रपति ने जताई थी आशंका 
बता दें कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पहले ही कहा था कि रूसी बल चेर्नोबिल परमाणु संयंत्र पर कब्जा करने की कोशिश करेगा. यह इलाका परमाणु संयंत्र होने की वजह से रणनीतिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है. 1986 में इसी संयंत्र में एक बहुत बड़ा हादसा हुआ था जिसमें 1.25 लाख लोग मारे गए थे. व्लादिमीर पुतिन इस वक्त बेहद आक्रामक रूख अपनाए हुए हैं. उन्होंने आज अमेरिका समेत यूरोपीय देशों को धमकी दे दी है कि अगर कोई भी रूस के हितों के खिलाफ जाने की कोशिश करेगा तो उसके परिणाम बहुत बुरे हो सकते हैं. 

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क्या मैक्रों की बात सच साबित होगी, बदल जाएगा रूस का इतिहास?
बता दें कि यूक्रेन के रूस पर हमले की निंदा करते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने कहा है कि यह यूरोप के इतिहास का टर्निंग प्वाइंट है. यूक्रेन ने भी रूस के चेर्नोबिल पर कब्जे के बाद कहा है कि यह भौगोलिक परिधि को बदलने का षड्यंत्र है. एक बार फिर से यह आशंका जताई जा रही है कि क्या यूक्रेन के 2 टुकड़े हो जाएंगे या रूस यूक्रेन पर कब्जा करके ही मानेगा. 2014 में रूस ने क्रीमिया का विलय किया था और एक बार फिर वैसी ही आक्रामकता दिखा रहा है. 

पीएम नरेंद्र मोदी ने की है पुतिन से बात 
रूस और यूक्रेन के हालात को लेकर आप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से 25 मिनट तक चर्चा की है. पीएम ने भारत की कूटनीति के अनुसार ही दोहराया कि नाटो से रूस के जो भी मतभेद हैं उसका शांतिपूर्ण समाधान निकालना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान दोहराया कि रूस और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) समूह के बीच मतभेदों को सिर्फ ‘‘ईमानदार और गंभीर’’ वार्ता से ही सुलझाया जा सकता है.

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