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रिपोर्ट्स में दिखा शेख हसीना का खूनी चेहरा, खुद के खिलाफ विरोध हिंसक हुआ तो जारी किया था फरमान- गोली मारो...

एक लीक फ़ोन कॉल के अनुसार, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों को छात्रों पर 'गोली चलाने' का आदेश दिया था. इस नए खुलासे के बाद शेख हसीना को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.

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रिपोर्ट्स में दिखा शेख हसीना का खूनी चेहरा, खुद के खिलाफ विरोध हिंसक हुआ तो जारी किया था फरमान- गोली मारो...
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बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना सुर्खियों में हैं. कारण बनी है एक ऐसी फोन कॉल की रिकॉर्डिंग, जो हमें शेख हसीना के एक अलग ही चेहरे को दिखाती हुई नजर आ रही है. दरअसल बीबीसी द्वारा प्रमाणित एक लीक फ़ोन कॉल के अनुसार, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने पिछले साल हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों को छात्रों पर 'गोली चलाने' का आदेश दिया था. रिकॉर्डिंग में, हसीना प्रदर्शनकारियों पर घातक हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति देते हुए सुनाई दे रही हैं और कह रही हैं, 'जहां भी वे उन्हें पाएंगे, गोली चला देंगे.'

ढाका स्थित अपने आधिकारिक आवास से 18 जुलाई 2024 को की गई इस फ़ोन कॉल में हसीना कह रही हैं, 'मैंने आज रात उन सभी को गिरफ़्तार करने का आदेश दिया है. सभी को सूचित कर दिया गया है, जहां भी वे मिलें, उन्हें पकड़ लें. मैंने खुला आदेश जारी कर दिया है. अब, वे घातक हथियारों का इस्तेमाल करेंगे. जहां भी वे उन्हें पाएंगे, गोली चला देंगे.'

सिविल सेवा नौकरियों में आरक्षण को लेकर शुरू हुए ये विरोध प्रदर्शन जल्द ही एक राष्ट्रव्यापी विद्रोह में बदल गए, जिसने अंततः हसीना को सत्ता से बेदखल कर दिया. संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं का कहना है कि इस दमनकारी कार्रवाई के दौरान लगभग 1,400 लोग मारे गए, जो 1971 के युद्ध के बाद से देश में राजनीतिक हिंसा की सबसे घातक लहर थी.

यह फ़ोन कॉल उस समय आया जब अशांति के माहौल में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों की हत्याओं को लेकर जनता का आक्रोश बढ़ रहा था और सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा हो रही थी.

बांग्लादेश के अभियोजक लीक हुए ऑडियो को हसीना के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों के लिए चल रहे मुकदमे में प्रमुख सबूत के तौर पर इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं, जो उनकी अनुपस्थिति में चल रहा है. यह बातचीत अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत है कि हसीना ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों, जिनमें से कई छात्र थे, पर सीधे तौर पर घातक बल प्रयोग की अनुमति दी थी.

सबसे भीषण नरसंहारों में से एक 5 अगस्त को ढाका के जत्राबाड़ी इलाके में हुआ, जहां  सेना के इलाके से हटने के बाद पुलिस ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी. नए खुलासे के अनुसार, कम से कम 52 लोग मारे गए, जो पहले की रिपोर्टों से कहीं ज़्यादा है.

हसीना पर मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोप हैं, जिनमें उकसावे, षड्यंत्र और सामूहिक हत्याओं को जन्म देने वाले आदेश जारी करना शामिल है. अपनी सरकार गिरने से ठीक पहले वह भारत भाग गई थीं. ढाका के अनुरोध के बावजूद, भारत ने उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया है, और कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि उनके मुकदमे का सामना करने के लिए वापस लौटने की संभावना नहीं है.

हसीना के साथ, पूर्व पुलिस और सरकारी अधिकारियों सहित 203 व्यक्तियों पर अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण (आईसीटी) ने अभियोग लगाया है, जिनमें से 73 हिरासत में हैं.

हसीना के अपदस्थ होने के बाद से, बांग्लादेश नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में एक अंतरिम प्रशासन के अधीन है, जो अब देश में राष्ट्रीय चुनावों की तैयारी कर रहा है.

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