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पाकिस्तान ने ड्रग्स तस्करी को बनाया हथियार, 'डीप स्टेट' नशा बेचकर कर रहा कमाई, इंटरनेशनल रिपोर्ट ने खोली पोल

एक इंटरनेशनल रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान में नशीले पदार्थों का नेटवर्क मुख्य रूप से अपराधी गिरोहों और गैंगस्टरों द्वारा चलाया जाता है और उन्हें खुफिया एजेंसियों का समर्थन प्राप्त होता है.

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पाकिस्तान ने ड्रग्स तस्करी को बनाया हथियार, 'डीप स्टेट' नशा बेचकर कर रहा कमाई, इंटरनेशनल रिपोर्ट ने खोली पोल

पाकिस्तान का डीप स्टेट नशीले पदार्थों की तस्करी में भी शामिल हो गया है. (AI इमेज)

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  • पाकिस्तान का डीप स्टेट नशीले पदार्थों की तस्करी में भी शामिल हो गया है.
  • पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र और मुजाहिदीन नेटवर्क अब संगठित गिरोह बन गया है.
  • ड्रग तस्करी के लिए समुद्री रास्ते का इस्तेमाल कर रहा पाकिस्तान.

पाकिस्तान अपने क्षेत्रीय विरोधियों को परेशान और कमजोर करने के लिए केवल आतंक का ही सहारा नहीं ले रहा है. अब इसका डीप स्टेट नशीले पदार्थों की तस्करी में भी शामिल हो गया है. परोक्ष रूप से लड़ी जाने वाली लड़ाई की रणनीति में पाकिस्तान ने नशीले पदार्थों का इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया है.  एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जब तक पाकिस्तान का 'डीप स्टेट' नशीले पदार्थों से होने वाली कमाई को एक जायज विकल्प मानता रहेगा, तब तक उपमहाद्वीप को संकट का सामना करना पड़ेगा.

किस रिपोर्ट ने खोली पाकिस्तान की पोल?

'यूरोपियन टाइम्स' की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 1980 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तानी सुरक्षा तंत्र और मुजाहिदीन नेटवर्क के बीच जो गठजोड़ बना था, वह अब एक संगठित कारोबार में बदल चुका है. इसमें हेरोइन, मेथामफेटामाइन, ड्रोन लॉजिस्टिक्स, हवाला फाइनेंस और अंतरराष्ट्रीय अपराधी गिरोहों का इस इलाके में सक्रिय आतंकवादी समूहों के साथ मेल-जोल शामिल है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर नीति-निर्माता हलकों में अब इस पैटर्न पर कोई विवाद नहीं है. संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय (UNODC) ने इसे दर्ज किया है और भारतीय एजेंसियों की चार्जशीट में इसकी पुष्टि हुई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि खुद पाकिस्तान के वरिष्ठ राजनेताओं ने भी अनजाने में इसे स्वीकार किया है.

पाकिस्तान में नशीले पदार्थों का नेटवर्क मुख्य रूप से अपराधी गिरोहों और गैंगस्टरों द्वारा चलाया जाता है और उन्हें स्थानीय सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों का समर्थन प्राप्त होता है. 'यूरोपियन टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, यह 'लेन-देन' का रिश्ता है, जिसमें पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र स्थानीय अपराधी नेटवर्क का इस्तेमाल ढाल के तौर पर करता है।. इसके ज़रिए पड़ोसी देशों और यूरोप में गैर-कानूनी ड्रग्स की तस्करी की जाती है ताकि अस्थिरता फैलाई जा सके, पैसा कमाया जा सके और उन देशों में स्थानीय नेटवर्क बनाए जा सकें.

ड्रग तस्करी के लिए समुद्री रास्ते का इस्तेमाल कर रहा पाकिस्तान

पाकिस्तान दूसरे देशों में गैर-कानूनी ड्रग्स की तस्करी के लिए जमीनी और हवाई रास्तों के साथ-साथ समुद्री रास्ते का इस्तेमाल करने की भी कोशिश कर रहा है. 'ग्लोबल इनिशिएटिव अगेंस्ट ट्रांसनेशनल ऑर्गनाइज़्ड क्राइम' के अनुसार, ड्रग्स की तस्करी में शामिल बिना देश के झंडे वाले जहाज़ों (स्टेटलेस वेसल्स) के क्रू सदस्य ज़्यादातर पाकिस्तानी होते हैं, और दस्तावेज़ों की कमी के कारण उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पाती है. 

पूर्वी अफ़्रीकी तट इस समुद्री ट्रैफ़िक का मुख्य केंद्र बन गया है. पहले भी इसी इलाके में कई पाकिस्तानी जहाजों को गैर-कानूनी ड्रग्स ले जाने के आरोप में पकड़ा गया था. श्रीलंकाई नौसेना ने एक जहाज से 605 किलोग्राम क्रिस्टल मेथ और 579 किलोग्राम केटामाइन ज़ब्त किया था, जिसमें नौ पाकिस्तानी क्रू सदस्य सवार थे. यूके बॉर्डर फोर्स और नेशनल क्राइम एजेंसी ने बताया है कि पाकिस्तान से सीधे आने वाले हेरोइन के पार्सल और कंटेनर लोड में बढ़ोतरी हुई है. इन खेपों को मिर्च पाउडर के पैकेट, सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट्स, तौलिए और बॉक्सिंग ग्लव्स में छिपाकर लाया जाता है.

'यूरोपियन टाइम्स' की रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तानी नार्को नेटवर्क का रणनीतिक असर क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर है. पाकिस्तान ने एक ऐसा कम लागत वाला और आसानी से नकारा जा सकने वाला जरिया  बनाया है जो एक ही समय में क्षेत्र में आतंकवाद को फंड करता है, हिंद महासागर के तटीय इलाकों के सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुंचाता है और यूरोप में सामाजिक नुकसान पहुंचाता है. पाकिस्तान अब सोची-समझी जब्ती की कार्रवाई के जरिए फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स और इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड के सामने नियमों के पालन का दिखावा भी करता है. 

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