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सिंधु समझौते को गाजा से जोड़ कैसे पाकिस्तान ने दिखाया अपना विकृत चेहरा? 

ताजिकिस्तान की यात्रा पर गए पाक पीएम ने कहा कि आज दुनिया गाजा में पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल के कारण ताजा जख्म देख रही है, जिसने गहरे घाव छोड़े हैं. पहलगाम में जो हुआ उसपर शाहबाज़ ने चुप्पी साधी। साथ ही उन्होंने भारत को बदनाम करने की झूठी साजिश की.

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सिंधु समझौते को गाजा से जोड़ कैसे पाकिस्तान ने दिखाया अपना विकृत चेहरा? 
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पाकिस्तान ने फिर एक बार विक्टिम कार्ड खेलते हुए दुनिया को अपना विक्षिप्त चेहरा दिखाया है. दरअसल हुआ कुछ यूं है कि पाकिस्तान के पीएम शाहबाज शरीफ ने अपनी अज्ञानता का परिचय देते हुए गाजा संकट की तुलना सिंधु जल समझौते से की जिसके बाद एक नए विमर्श को पंख मिल गए हैं. ताजिकिस्तान की यात्रा पर गए पाक पीएम ने अपनी बातों में गाजा संकट का जिक्र किया. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि आज दुनिया गाजा में पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल के कारण ताजा जख्म देख रही है, जिसने गहरे घाव छोड़े हैं.

डॉन में छपी एक रिपोर्ट पर नजर डालें तो मिलता है कि शहबाज शरीफ ने ताजिकिस्तान में जबरदस्त बड़बोलेपन का परिचय दिया है. शाहबाज  ने कहा है कि भारत पानी का हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. लेकिन पाकिस्तान भारत को सिंधु जल समझौते पर लाल रेखा पार करने नहीं देगा.

बताते चलें कि ये तमाम बातें शाहबाज ने ताजिकिस्तान की राजधानी दुशांबे में आयोजित ग्लेशियरों के संरक्षण पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान कहीं. मामले में रोचक यह देखना भी रहा कि पर्यावरण संरक्षण के इस बेहद गंभीर मसले को शहबाज  ने अपने देश की आतंकवाद प्रायोजित विदेश नीति से जोड़ा.

सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाहबाज ने कहा कि, 'सिंधु बेसिन के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करने वाली सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का ... एकतरफा और अवैध निर्णय अत्यंत खेदजनक है.' वहीं पहलगाम में जो कुछ भी हुआ उसपर शाहबाज ने चुप्पी साधना ही बेहतर समझा.

भारत पर झूठा आरोप लगाते हुए शाहबाज ने यह भी कहा कि, 'सिंधु बेसिन के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करने वाली सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का भारत का एकतरफा और अवैध निर्णय अत्यंत खेदजनक है.'

शहबाज शरीफ ने इजरायल और फिलीस्तीन के बीच विवाद की वजह से पैदा हुए गाजा जैसे संकट को भारत की ओर से सिंधु जल समझौते को स्थगित करने से जोड़ दिया और कहा कि, 'गाजा में पारंपारिक हथियारों के इस्तेमाल से जो ताजा जख्म पैदा हुए हैं, दुनिया उसकी साक्षी है. लगता है कि ये काफी नहीं था और अब हम पानी का एक निचले स्तर का हथियारों के रूप में इस्तेमाल देख रहे हैं. 

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