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Pakistan Crisis: लोग भूखे मर रहे, खाने को रोटी नहीं, पाकिस्तानी वित्त मंत्री बोले 'अल्लाह जिम्मेदार'

पाकिस्तान के वित्त मंत्री इसहाक डार ने कहा कि इस्लाम के नाम पर बनाए गए इस इकलौते देश की समृद्धि और विकास के लिए अल्लाह ही जिम्मेदार हैं.

Pakistan Crisis: लोग भूखे मर रहे, खाने को रोटी नहीं, पाकिस्तानी वित्त मंत्री बोले 'अल्लाह जिम्मेदार'

पाकिस्तान की आर्थिक संकट के लिए इसहाक डार ने अल्लाह को ठहराया जिम्मेदार

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डीएनए हिंदी: पाकिस्तान इन दिनों बड़े आर्थिक संकट (Pakistan Economic Crisis) से गुजर रहा है. महंगाई आसमान छू रही है. देश में आटे-दाल की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि थाली से रोटी गायब होती जा रही है. कर्ज के बोझ की तले दबे पाकिस्तान में विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. जिसकी वजह से देश भारी संकट से जूझ रहा है. इस बीच पाकिस्तान के वित्त मंत्री इसहाक डार का बयान सामने आया है. उन्होंने इस संकट के लिए 'अल्लाह' जिम्मेदार बताया है.

पाकिस्तान के वित्त मंत्री इसहाक डार ने शुक्रवार को कहा कि इस्लाम के नाम पर बनाए गए इस इकलौते देश की समृद्धि एवं विकास के लिए अल्लाह ही जिम्मेदार हैं. डार ने इस्लामाबाद में ग्रीन लाइन ट्रेन सेवा के उद्घाटन समारोह में कहा कि उन्हें पाकिस्तान की तरक्की को लेकर पूरा भरोसा है. उन्होंने कहा, "मेरे यकीन का कारण यह है कि पाकिस्तान इस्लाम के नाम पर बना था. अगर अल्लाह पाकिस्तान बना सकते हैं तो वह इसकी तरक्की और विकास के साथ इसे अमीर भी बना सकते हैं." 

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वित्त मंत्री ने कहा कि शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली सरकार पाकिस्तान की स्थिति सुधारने के लिए अपनी तरफ से पुरजोर कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि हमारी टीम चुनावों के पहले हालात को सुधारने की कोशिश कर रही है.' उन्होंने पाकिस्तान की मौजूदा बदहाली के लिए 5 साल पहले शुरू हुए 'नाटक' को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि यहां के लोगों को अब भी भुगतना पड़ रहा है.

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उन्होंने कहा कि इस नाटक के पहले 2013-17 के दौरान नवाज शरीफ के कार्यकाल में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अच्छी हालत में थी. नवाज के शासन में पाकिस्तान तरक्की की राह पर था लेकिन उसे पटरी से हटा दिया गया. लोग देख सकते हैं कि पिछले पांच साल में देश को कितनी बर्बादी का सामना करना पड़ा है. 

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बता दें कि विदेशी मुद्रा के अभाव में पाकिस्तान के सामने जरूरी चीजों की खरीद के लिए भी भुगतान करने लायक मुद्रा नहीं रह गई है. इस समस्या से निपटने के लिए वह अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष समेत कई संस्थानों से आर्थिक पैकेज की तलाश में है.

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