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North Korea ने इस महीने में सातवीं बार किया मिसाइल टेस्ट, 4 साल में सबसे घातक मिसाइलें थीं इस बार

नॉर्थ कोरिया ने रविवार को एक बार फिर घातक मिसाइलों का टेस्ट किया है. रिपोर्ट्स के अनुसार, यह टेस्ट पिछले 4 साल में सबसे घातक मिसाइलों का टेस्ट था.

North Korea ने इस महीने में सातवीं बार किया मिसाइल टेस्ट, 4 साल में सबसे घातक मिसाइलें थीं इस बार
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डीएनए हिंदी: नॉर्थ कोरिया ने रविवार को एक बार फिर मिसाइल टेस्ट किया है. अमेरिकी फ्लाइट डेटा में दावा किया गया है कि रविवार को किया गया टेस्ट  सबसे घातक मिसाइलों का टेस्ट था. पिछले 4 साल में किए सभी मिसाइलों में ये मिसाइल सबसे घातक हैं. अब तक की जानकारी के अनुसार, यह भी बैलिस्टिक मिसाइल टेस्ट था. 

इस साल 7 मिसाइल टेस्ट कर चुका है नॉर्थ कोरिया 
इस साल अब तक किम जोंग उन 7 मिसाइल टेस्ट कर चुके हैं. इनमें से ज्यादातर छोटी या कम दूरी की मिसाइलें थीं. रविवार को किए गए टेस्ट के बारे में कहा जा रहा है कि यह बहुत खतरनाक था. इस टेस्ट से अमेरिका और साउथ कोरिया के अलावा जापान को भी खतरा है. मीडिया में पहले से ही ऐसी खबरें हैं कि कोरोना महामारी के दौरान किम जोंग उन ने अपनी मिसाइल क्षमता को काफी बढ़ाया है.

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चीन के बॉर्डर पर किया गया टेस्ट
न्यूयॉर्क टाइम्स की स्पेशल रिपोर्ट के मुताबिक, नॉर्थ कोरिया ने रविवार को सुबह यह टेस्ट जगांग एरिया में किया है. यहां से चीन और नॉर्थ कोरिया की सीमाएं लगती हैं. साउथ कोरिया की मिलिट्री इंटेलिजेंस ने भी इस टेस्ट की पुष्टि की है. इसके बाद अमेरिका और साउथ कोरिया के अफसरों ने टेलिफोन पर बातचीत कर मौजूदा हालातों की समीक्षा की है.

साउथ कोरिया ने इसे तनाव बढ़ाने वाला बताया
साउथ कोरिया के मुताबिक रविवार को किया गया टेस्ट साफ तौर पर यूएन की गाइडलाइन के खिलाफ था. यह मिसाइल नॉर्थ कोरिया की समुद्री सीमा में गिराई गई है. 2017 के बाद पहली बार इतनी खतरनाक मिसाइल का टेस्ट किया गया है. साउथ कोरिया की ओर से आधिकारिक बयान में कहा गया कि नॉर्थ कोरिया को तनाव बढ़ाने वाली हरकतें बंद करनी चाहिए. यह पूरी दुनिया के लिए खतरनाक है.

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जापान और साउथ कोरिया को खतरा ज्यादा
नॉर्थ कोरिया पहले ही साफ कर चुका है कि वो परमाणु कार्यक्रम बंद नहीं करने जा रहा है. नॉर्थ कोरिया के मिसाइल बढ़ाने की सनक से सबसे ज्यादा मुश्किल जापान और साउथ कोरिया को है. बाइडन प्रशासन ने अब तक नॉर्थ कोरिया को लेकर कोई खास सक्रियता नहीं दिखाई है. अमेरिका के चुप बैठने की वजह से माना जा रहा है कि किम उसे भड़काने की कोशिश कर रहे है. जनवरी में बाइडन के सत्ता संभालने के पहले ही किम ने मिसाइल टेस्ट करके अपना मंसूबा जता दिया था.

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