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Shahpar-2 Drone: पाकिस्तान सेना को मिला स्वदेशी Predator Drone बनेगा खतरा, क्या है भारतीय तैयारी?

Predator Drone यानी हमला करने वाले UAV मौजूदा समय की सबसे बड़ी जरूरत है. भारत भी Ghatak Drone तैयार कर रहा है, जो स्टील्थ टेक्नोलॉजी पर है.

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Shahpar-2 Drone: पाकिस्तान सेना को मिला स्वदेशी Predator Drone बनेगा खतरा, क्या है भारतीय तैयारी?

Shahpar-2 ड्रोन से पाकिस्तानी सेना अपनी बढ़त बनने का दावा कर रही है.

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डीएनए हिंदी: पाकिस्तान के कराची में चल रही हथियारों की प्रदर्शनी ने भारत के लिए खतरे की घंटी बजा दी है. पाकिस्तान सरकार की कंपनी ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूसंश ने इसमें तुर्की और चीन के अटैक ड्रोन्स (Predator Drones) के बीच अपना खुद का स्वदेशी प्रिडेटर ड्रोन शाहपर-2 (Shahpar 2) पेश किया है, जो उसकी तीनों सेनाओं में शामिल किया जा चुका है. पाकिस्तान हमला करने में इस्तेमाल होने वाला स्वदेशी ड्रोन बनाने में भारत से आगे निकल गया है, जिसका स्टील्थ ड्रोन 'घातक' (Stealth Drone Ghatak) अभी DRDO की तरफ से ट्रायल प्रोसेस में चल रहा है और साल 2025 तक इसका फाइनल वर्जन भारतीय वायुसेना को मिलने की संभावना है. शाहपर-2 को प्रदर्शनी में पेश करने के पीछे पाकिस्तान का मकसद जहां इसके जरिये बिजनेस तलाशना है, वहीं पड़ोसी देश यानी भारत को अपनी बढ़ती हवाई ताकत का नजारा कराना भी है. पाकिस्तानी रक्षा विशेषज्ञों ने शाहपर-2 को इंडियन डिफेंस के लिए चुनौती बताया है, लेकिन क्या वास्तव में यह बात सही है? शाहपर-2 की क्या खूबियां हैं और भारत इस चुनौती से निपटने में कितना सक्षम है? आइए इस पर एक नजर डालते हैं.

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पाकिस्तान ने पहले बनाया था जासूस ड्रोन

पाकिस्तान ने अपना स्वदेशी ड्रोन बनाने की शुरुआत जासूसी UAV से की थी. साल 2018 में कराची में हुई हथियार प्रदर्शनी में ही POF ने पाकिस्तान का पहला स्वदेशी ड्रोन 'बराक' पेश किया था. वह ड्रोन वीडियो बनाने और हाई रिजोल्यूशन की तस्वीरें लेने का काम करता था यानी सीमा पर नजर रखने के लिए बखूबी फिट था. ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूसंश के सीईओ असद कमाल ने BBC HINDI से बताया कि इसके बाद हमला करने वाले ड्रोन की कवायद शुरू की गई ताकि दूसरे देश की तकनीक पर निर्भरता के साथ ही अपना खर्च भी घटाया जा सके. इसी कवायद में शाहपर-2 तैयार किया गया. उनका दावा है कि इस ड्रोन की बुनियादी तकनीक पूरी तरह पाकिस्तानी है.

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क्या है शाहपर-2 की खूबियां

  • 1,050 किमी तक उड़ान व 300 किमी डाटा लिंक रेंज है.
  • सैटलाइट से संपर्क साधकर खुद ही गाइडेंस ले सकता है.
  • दिन हो या रात, दोनों में समान हमला करने में सक्षम है.
  • 120 नॉट्स तक की अधिकतम गति से उड़ सकता है.
  • लेजर लॉक मिसाइल के जरिए टारगेट भेद सकता है.
  • उड़ान में इंजन को खुद ऑन-ऑफ कर सकता है.

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पाकिस्तान बना चुका है ये भी अटैक ड्रोन

भले ही शाहपर-2 को पाकिस्तान का पहला स्वदेशी अटैकिंग ड्रोन बताया जा रहा है, लेकिन इससे पहले भी पाकिस्तान हमला करने वाले कई ड्रोन बना चुका है. इनमें ग्लोबल इंडस्ट्रियल एंड डिफेंस सॉल्यूशंस कंपनी के शाहपर-1 और इकाब ड्रोन सीरीज शामिल हैं, जो हथियार ले जाने में सक्षम हैं. साथ ही पाकिस्तान ऑर्डिनेंस फैक्ट्री का अबाबील ड्रोन है. अबाबील पहले सर्विलांस ड्रोन था, लेकिन बाद में इसे 5 किलोग्राम तक वजन वाले दो मोर्टार गोल लेकर 30 किलोमीटर तक उड़ान भरने लायक बनाया गया है. अब इसका एडवांस वर्जन अबाबील 10 भी लाया गया है, जो 10 किलोग्राम वजनी हथियार ले जा सकता है.

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क्या भारत है पाकिस्तानी ड्रोन्स के सामने तैयार?

भारतीय सेना ने फ्यूचर वॉर प्रैक्टिस के तहत पहले ही ड्रोन विमानों की लड़ाई की तैयारियां शुरू कर रखी हैं. इसके तहत कुछ खरीद की जा चुकी हैं, जबकि कुछ खरीद चल रही हैं. साथ ही स्वदेशी स्तर पर भी ड्रोन्स से निपटने वाले हथियारों का डेवलपमेंट तेजी से किया जा रहा है. इसके लिए निजी क्षेत्र की भी मदद ली जा रही है. ड्रोन हमले से निपटने में निम्न तैयारियां भारत के काम आएंगी:

स्टील्थ ड्रोन घातक: भारतीय रक्षा अनुसंधान व विकास संगठन (DRDO) ने स्टील्थ ड्रोन 'घातक' तैयार किया जा रहा है, जिसकी पहली सफल ट्रायल उड़ान DRDO इस साल कर चुका है. इसे साल 2022 में भारतीय वायुसेना को दिया जाएगा. दावा है कि यह स्टील्थ यानी राडार की पकड़ में नहीं आ पाने के चलते अपने नाम की तरह ही घातक साबित होगा. 

Ghatak Drone

स्वार्म ड्रोन्स फ्लीट: भारतीय सेना ने कामिकाजे-स्टाइल अटैक (kamikaze-style attack) करने वाले स्वार्म ड्रोन्स (Swarm Drones) का भी दस्ता तैयार किया है. ये इस्राइली कामिकाजे ड्रोन्स (Israeli kamikaze drones) हैं, जो बेहद घातक माने जाते हैं. साल 2021 में सेना दिवस (Indian Army Day 2021) के मौके पर 75 स्वार्म ड्रोन्स के दस्ते को एकसाथ उड़ाकर उनसे टारगेट को सफल भेदने का डिमॉन्सट्रेशन भी किया गया था. फिलहाल भारतीय सेना एकसाथ 164 स्वार्म ड्रोन्स की HAROP Fleet संचालित कर सकती है. भारतीय सेना की तैयारी इस दस्ते को 1,000 ड्रोन्स तक ले जाने की है, जिसके लिए खरीद चल रही है. 

इंटेग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम: ड्रोन विमानों की पहले से ही पहचान कर उन्हें ठिकाने लगाने वाले इंटेग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम की खरीद की भारतीय सेना ने तैयारी शुरू की है. ऐसे 9 सिस्टम की खरीद के लिए 22 नवंबर को ही RFI भी जारी किया गया है. इसके अलावा 180 कैनिस्टर लॉन्च्ड एंटी-आर्मर लॉइटर एम्युनिशन (CALM) सिस्टम की खरीद के लिए भी RFI जारी किया गया है. इन दोनों सिस्टम में 60% स्वदेशी उपकरण होने की शर्त तय की गई है. 

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