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OIC बैठक में क्षेत्रीय शांति के लिए नेतन्याहू को किसने बताया बाधा? क्या हैं एर्दोआन के इरादे? 

पश्चिमी नेताओं पर इजरायल को 'बिना शर्त समर्थन' देने का आरोप लगाते हुए तुर्की नेता ने कहा कि उनका देश मध्य पूर्व की सीमाओं को ‘खून से’ दोबारा निर्धारित नहीं होने देगा.

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OIC बैठक में क्षेत्रीय शांति के लिए नेतन्याहू को किसने बताया बाधा? क्या हैं एर्दोआन के इरादे? 
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तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने कहा कि इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू 'क्षेत्रीय शांति के लिए सबसे बड़ी बाधा' हैं और अमेरिका के साथ परमाणु वार्ता के नए दौर से ठीक पहले ईरान पर इजरायल के हमलों का उद्देश्य वार्ता को विफल करना है. शनिवार को इस्तांबुल में इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) की बैठक के दौरान अरब लीग के राजनयिकों को संबोधित करते हुए, एर्दोगन ने इजरायल पर प्रभाव रखने वाले देशों से आग्रह किया कि वे उसके 'जहर' को न सुनें और व्यापक संघर्ष की अनुमति दिए बिना बातचीत के माध्यम से लड़ाई का समाधान खोजें.

एर्दोगन ने कहा कि ईरान पर इजरायल के हमले दिखाते हैं कि नेतन्याहू 'और उनकी सरकार ... नहीं चाहती कि कोई भी मुद्दा या कोई भी मामला कूटनीतिक रूप से हल हो.' उन्होंने कहा, 'नेतन्याहू की ज़ायोनी महत्वाकांक्षाओं का हमारे क्षेत्र और ... पूरी दुनिया को एक बड़ी आपदा में धकेलने के अलावा कोई और उद्देश्य नहीं है.'

एर्दोगन ने पश्चिमी नेताओं पर इजरायल को 'बिना शर्त समर्थन' देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि तुर्की मध्य पूर्व में सीमाओं को 'खून से' फिर से नहीं खींचने देगा.

उन्होंने ओआईसी की सभा में कहा, 'हमारे लिए इजरायल की डाकुओं की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिए अधिक एकजुटता दिखाना महत्वपूर्ण है – न केवल फिलिस्तीन में बल्कि सीरिया, लेबनान और ईरान में भी.'

1969 में स्थापित 57 सदस्यीय ओआईसी का कहना है कि इसका मिशन 'अंतर्राष्ट्रीय शांति और सद्भाव को बढ़ावा देने की भावना से मुस्लिम दुनिया के हितों की रक्षा करना और उनकी रक्षा करना' है.

एर्दोगन से पहले बोलते हुए, तुर्की के विदेश मंत्री हकान फ़िदान ने इजरायल पर ईरान पर हमला करके मध्य पूर्व को 'पूर्ण विनाश' की ओर ले जाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, 'इजरायल अब हमारे पड़ोसी ईरान पर हमला करके इस क्षेत्र को पूर्ण विनाश के कगार पर ले जा रहा है.'

कोई फिलिस्तीनी, लेबनानी, सीरियाई, यमनी या ईरानी समस्या नहीं है, लेकिन स्पष्ट रूप से एक इजरायली समस्या है'.

ध्यान रहे वर्तमान ओआईसी अध्यक्ष के रूप में तुर्किये खुद को इजरायल-ईरान संघर्ष का समाधान खोजने में मदद करने के लिए अच्छी स्थिति में देखता है.

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