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एनी की मृत्यु एक नाजी यातना कैंप में हुई थी. उस वक्त वो 15 साल की थीं. आज 77 साल बाद एनी, उनकी बहनों और मां की मृत्यु के केस में यह खुलासा हुआ है.
डीएनए हिंदी: Anne Frank द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अत्याचार के शिकार हुए लाखों यहूदियों में से एक हैं. एनी और उनका परिवार दो साल तक अपने पिता की दुकान के ऊपरी हिस्से में छुपा रहा. यहां छिपने के दौरान एनी ने एक डायरी लिखी जो कि उनकी मृत्यु के दो साल बाद छपी.
एनी की मृत्यु एक नाजी यातना कैंप में हुई थी. उस वक्त वो 15 साल की थीं. आज 77 साल बाद एनी, उनकी बहनों और मां की मृत्यु के केस में एक खुलासा हुआ है.
जांच में उस व्यक्ति के बारे में पता चला है जिसने एनी और उनके परिवार से धोखा किया. इस शख्स ने अपने परिवार को बचाने के लिए एनी के परिवार को दांव पर लगा दिया. जांच टीम जिसमें एक FBI एजेंट भी मौजूद है उसने बताया कि एम्सटर्डम में मौजूद एक यहूदी शख्श Arnold van den Bergh ने यह काम किया था.
इतिहासकारों और दूसरे एक्सपर्ट्स की टीम ने करीब 6 साल तक इस मामले में रिसर्च की. Van den Bergh एम्सटर्डम की यहूदी काउंसिल का सदस्य था. यह काउंसिल नाजियों की नीतियां लागू करने के लिए बनाई गई थी. 1943 में इसे खत्म कर दिया और इसके सदस्यों को यातना कैंप भेजा गया लेकिन van den Bergh एम्सटर्डम में ही रहा. उसे कैंप नहीं भेजा गया. वह आराम से अपनी जिंदगी जी रहा था.
FBI agent Vince Pankoke ने बताया, एक समय ऐसा आया जब van den Bergh कैंप में जाने से बचने के सभी तरीके आजमा चुका था. अब तक वह खबरें इधर-उधर कर खुद को बचाए हुए थे. अब उसके सारे पैंतरे खुल चुके थे. ऐसे में उसे नाजियों को एक ऐसी जानकारी देनी थी जिससे वह कैंप में जाने बच सके और सुरक्षित रह सके इसलिए उसने एक ऐसी खबर नाजियों तक पहुंचाने की सोची जिससे कि वह बच सके.
पिलछी इन्वेस्टिगेशन की फाइलों में भी एक नोट मिलता है जो दिखाता है कि van den Bergh ने ही एनी और उनके परिवार को धोखा दिया था.
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