दुनिया
India-US Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने यूएस प्रॉड्क्टस पर भारत में शुल्क नहीं घटने पर भारतीय उत्पादों पर मोटा टैरिफ लगाने की चेतावनी दी थी. इसके बाद से भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ डील चल रही है.
India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार पर लगने वाले टैरिफ को लेकर वार्ता अब फाइनल दौर में है. इसे लेकर वॉशिंगटन में आखिरी मोलभाव शुरू हो गया है. वार्ता से जुड़े सूत्रों का दावा है कि दोनों देशों के बीच ट्रेड एग्रीमेंट कैसा होगा और कितने टैरिफ रहेंगे, इसके संकेत अगले 48 घंटे के अंदर मिल जाएंगे. दावा है कि अगले 48 घंटे में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझौता (Mini Deal) सामने आ सकती है. कुछ मुद्दे हैं, जिन पर अभी सहमति नहीं बन रही है, लेकिन अमेरिका लगातार भारत पर उन मुद्दों पर भी सहमत होने के लिए दबाव बना रहा है. यह नई बात अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के उस दावे के बीच सामने आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि रूस से कच्चा तेल खरीदकर यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में सहयोग करने के लिए भारत के खिलाफ अमेरिकी सीनेट में एक बिल लाया जा रहा है, जिसमें भारत पर 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव है. उन्होंने इस बिल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हरी झंडी मिल जाने का दावा भी किया है.
चलिए आपको 5 पॉइंट्स में समझाते हैं कि क्या नया बदलाव हुआ है और कहां बात अटकी हुई है-
1. क्या सामने आया है अब तक
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत और अमेरिका के अधिकारियों के बीच वॉशिंगटन में ट्रेड डील पर आखिरी मोलभाव शुरू हो गया है. NDTV ने इस मीटिंग से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया कि अगले 48 घंटे में दोनों पक्ष एक अंतरिम समझौते पर सहमत हो सकते हैं. यह मिनी ट्रेड डील इसलिए की जाएगी, ताकि भारत 9 जुलाई को ट्रंप की तरफ से लगाए गए मोटे टैरिफ की 90 दिन की डेडलाइन खत्म होने पर भी कार्रवाई से बचे रहे. भारत अपने ऐसे उद्योगों के एक्सपोर्ट पर टैरिफ कन्सेशन के लिए दबाव बना रहा है, जिसमें बड़े पैमाने पर श्रमिकों की जरूरत होती है. इसमें जूते, कपड़े और लेदर प्रॉडक्ट जैसे उद्योग हैं, जिनसे बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होते हैं. नई दिल्ली का कहना है कि ऐसे ज्यादा रोजगार देने वाले उत्पादों पर टैरिफ कन्सेशन के बिना साल 2030 तक भारत-अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने का टारगेट अवास्तविक रहेगा.
2. अमेरिका की ये मांग बनी हुई है फाइनल एग्रीमेंट में रोड़ा
सूत्रों का कहना है कि अमेरिका की एक मांग दोनों देशों के बीच फाइनल एग्रीमेंट में रोड़ा बनी हुई है. अमेरिका भारत से जेनेटिकली मॉडिफाइड फसलों (GM फसलों) के लिए अपना मार्केट खोलने के लिए कह रहा है, लेकिन नई दिल्ली इसे अपने किसानों के खिलाफ मानकर लंबे समय से 'रेड लाइन' खींचे हुए है. अमेरिका की तरफ से भारतीय कृषि और दुग्ध उत्पाद सेक्टरों तक अपनी पहुंच खोलने के लिए नई दिल्ली पर दबाव बढ़ा रहा है, लेकिन भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और फूड सेफ्टी के लिए यह कदम नुकसानदेह हो सकता है. इसी कारण नई दिल्ली इस पर तैयार नहीं हो रहा है. यही मुद्दा दोनों के बीच अटका हुआ है.
3. भारत नहीं चाहता एकतरफा समझौता करना
NDTV प्रॉफिट की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली अमेरिका के साथ किसी भी ऐसे समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार नहीं है, जो उसके लिए एकतरफा साबित हो. इसका मतलब है कि समझौते में अमेरिका को तो लाभ हो, लेकिन भारतीय व्यापार को इसका कोई लाभ नहीं हो, ऐसा समझौता करने के लिए भारत तैयार नहीं है. भारत का फोकस समझौते की शर्तों में टैरिफ घटाने या हटाने पर है ताकि भारतीय निर्यात की क्षेत्रीय पहुंच को लाभ हो.
4. ट्रंप ने भी दो दिन पहले कहा था- जल्द होगी डील फाइनल
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील जल्द ही फाइनल होने का दावा डोनाल्ड ट्रंप भी मीडिया के सामने कर चुके हैं. मंगलवार को उन्होंने अपने एयरफोर्स वन विमान में रिपोर्टर्स से कहा था कि मेरे हिसाब से भारत के साथ डील होने जा रही है और यह बिल्कुल अलग तरह की डील होगी. यह ऐसी डील होगी, जिसमें हम वहां जाने और प्रतिस्पर्धा करने के लायक बनेंगे. अभी भारत किसी की अपने यहां एंट्री स्वीकार नहीं करता है. मेरे हिसाब से भारत ऐसा करेगा और यदि वे ऐसा करेंगे तो हमें बेहद कम टैरिफ रेट्स पर डील मिलने जा रही है.
5. भारत पर लगाया था ट्रंप ने 26 फीसदी टैरिफ
ट्रंप ने दोबारा राष्ट्रपति पद संभालने के बाद उन देशों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी, जो अमेरिकी उत्पादों पर उनके हिसाब से ज्यादा टैरिफ ठोकते हैं. इनमें ट्रंप ने भारत को भी शामिल किया था और भारतीय उत्पादों के अमेरिका में आने पर 26 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया था. हालांकि ट्रंप ने 2 अप्रैल को यह अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला 90 दिन के लिए टाल दिया था. इसके बदले भारत को अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौता (Bilateral Trade Agreement) करने के लिए कहा गया था, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार बराबर टैरिफ दरों पर हो. यह समझौता नहीं होने की स्थिति में 90 दिन बाद भारतीय उत्पादों पर बढ़ा हुआ टैरिफ खुद ब खुद लागू हो जाएगा. यह मियाद 9 जुलाई को खत्म हो रही है.
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