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इजरायल द्वारा मध्य पूर्व के अपने दुश्मनों से निपटने के लिए एक बड़ी रणनीतिक चाल चली गई है. खबर है कि इजरायल के सैन्य ख़ुफ़िया निदेशालय ने सभी अधिकारियों और सैनिकों के लिए, चाहे उनकी विशेषज्ञता कुछ भी हो, अनिवार्य इस्लामी और अरबी शिक्षा की घोषणा की है.
7 अक्टूबर को हमास के हमले में उजागर हुई ख़ुफ़िया नाकामियों के बाद एक रणनीतिक बदलाव के तहत, इज़राइल के सैन्य ख़ुफ़िया निदेशालय (AMAN) ने सभी अधिकारियों और सैनिकों के लिए, चाहे उनकी विशेषज्ञता कुछ भी हो, अनिवार्य इस्लामी और अरबी शिक्षा की घोषणा की है. इज़राइली मीडिया में आई खबरों के अनुसार, यह निर्देश AMAN प्रमुख मेजर जनरल श्लोमी बिंदर द्वारा जारी किया गया है, जिसका उद्देश्य उस खाई को पाटना है जिसे अधिकारी अब अपने ख़ुफ़िया अभियानों में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और भाषाई अंतर मानते हैं.
नई नीति के तहत, सभी सैन्य ख़ुफ़िया कर्मियों को अनिवार्य इस्लामी अध्ययन और अरबी भाषा का प्रशिक्षण लेना होगा, भले ही उनकी विशिष्ट भूमिकाएं सीधे मध्य पूर्वी मामलों से जुड़ी न हों. सभी रैंकों के लिए बुनियादी अरबी पाठ्यक्रम अनिवार्य होंगे, जबकि दीर्घकालिक योजनाओं का उद्देश्य अधिकारियों में इस्लाम में प्रवाह और गहरी समझ विकसित करना होगा.
बताया जा रहा है कि अमन के भीतर एक नया शैक्षिक प्रभाग स्थापित किया जाएगा, जो इस्लाम और अरबी में संरचित पाठ्यक्रम पर केंद्रित होगा. यहां तक कि अनुवादित खुफिया जानकारी को संसाधित करने वाले कर्मियों से भी अब विश्लेषणात्मक सटीकता बढ़ाने के लिए मूल भाषा सीखने की अपेक्षा की जाएगी.
कहा ये भी जा रहा है कि अगले साल तक, सभी खुफिया कर्मचारी इस्लामी शिक्षा शुरू कर देंगे, और कम से कम आधे को अरबी प्रशिक्षण भी मिलेगा. ये फैसला क्यों लिया गया है? जिक्र यदि इसपर हो तो इसका लक्ष्य है कि अधिकारी कुछ ही वर्षों में धाराप्रवाह अरबी बोल सकें और इस्लामी विचारों को गहराई से समझ सकें.
इसके अलावा, अमन की योजना टेलेम विभाग को फिर से खोलने की है, जिसे छह साल पहले बजट कटौती के कारण बंद कर दिया गया था. विभाग प्रारंभिक क्षेत्रीय जागरूकता और विशेषज्ञता को बढ़ावा देने के लिए इज़राइली माध्यमिक और उच्च विद्यालयों में मध्य पूर्वी अध्ययन को एक बार फिर बढ़ावा देगा.
गौरतलब है कि यमनी और इराकी अरबी सहित क्षेत्रीय बोलियों पर केंद्रित नए पाठ्यक्रम भी शुरू किए जाएंगे, ताकि अमन कर्मियों की क्षेत्र में विभिन्न स्रोतों और संचार को समझने की क्षमता में सुधार हो सके.
अमन के एक वरिष्ठ अधिकारीके मुताबिक, 'अब तक, हम संस्कृति, भाषा और इस्लाम में उतने अच्छे नहीं थे. हमें इन क्षेत्रों में खुद को बेहतर बनाने की ज़रूरत है.हम अपने सैनिकों को गांव में पले-बढ़े अरब बच्चों में नहीं बदल सकते, लेकिन हम उन्हें भाषा और संस्कृति सिखा सकते हैं ताकि उनमें संशयवाद और गहन अवलोकन कौशल विकसित हो सकें.'