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गाजा में नरसंहार पर Israeli genocide scholar ने कहा कुछ ऐसा, नेतन्याहू पर टूट सकता है मुसीबतों का पहाड़!

प्रमुख इजरायली नरसंहार विद्वान डॉ. शमूएल लेदरमैन ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि गाजा में इजरायल की कार्रवाई नरसंहार है. गाज़ा में नरसंहार पर अपना पक्ष रखते हुए लेदरमैन ने ऐसी तमाम बातें की हैं जो बेंजामिन नेतन्याहू को मुसीबत में डाल सकती हैं.

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गाजा में नरसंहार पर Israeli genocide scholar ने कहा कुछ ऐसा, नेतन्याहू पर टूट सकता है मुसीबतों का पहाड़!
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एक प्रमुख इज़राइली नरसंहार विद्वान डॉ. शमूएल लेदरमैन ने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि गाजा में इज़राइल की कार्रवाई नरसंहार का गठन करती है. लेदरमैन ने इजरायल को लेकर जो बयान दिया, उससे इतना साफ़ हो गया है कि, सामूहिक अत्याचारों का अध्ययन करने वाले विशेषज्ञों के बीच इजरायल को लेकर एक बड़ा बदलाव आया है. और जैसी सोच अब विद्वान विकसित कर रहे हैं उससे राष्ट्र के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भविष्य में चुनौतियों का सामना कर सकते हैं.  

जिक्र लेदरमैन का हुआ है तो बताना जरूरी है कि लेदरमैन की स्थिति 2024 में गाजा में विनाश बढ़ने के साथ विकसित हुई. उन्होंने कहा, 'इजरायल ने गाजा में जो कुछ किया है उसका संचित प्रभाव मूल रूप से एक समूह के रूप में गाजावासियों को हुए नुकसान के संदर्भ में नरसंहार था.' 

उन्होंने ये भी कहा कि, '2024 के मध्य तक यह कहना कुछ हद तक संभव था कि इज़राइल जो कर रहा है वह नरसंहार नहीं है, लेकिन समय के साथ, गाजा को बस नष्ट किया जा रहा था.  वर्ष के अंत तक, 'अस्पतालों, स्कूलों और सांस्कृतिक स्थलों का निरंतर विनाश - नरसंहार था. 

लेदरमैन का तर्क है कि नरसंहार की कानूनी परिभाषा रोकथाम में बाधा बन गई है. 'नरसंहार के विद्वान लंबे समय से एक ऐसे विमर्श में लगे हुए हैं जो कानूनी परिभाषा की आलोचना करता है क्योंकि यह बहुत संकीर्ण है और आंशिक रूप से इसे तैयार करने वाले राज्यों के राजनीतिक हितों से उत्पन्न हुआ है.'

1948 के नरसंहार सम्मेलन में किसी समूह को नष्ट करने के लिए विशिष्ट इरादे के प्रमाण की आवश्यकता होती है.

लेदरमैन का तर्क है कि,एक बार जब आप किसी समूह का इस तरह से विनाश कर लेते हैं, तो इसे नरसंहार कहा जाना चाहिए, इरादे की परवाह किए बिना. 'नरसंहार की कानूनी परिभाषा वास्तव में हमें नरसंहार को रोकने से रोकती है जब यह वास्तव में होता है - जैसे कि इज़राइल और गाजा के मामले में देखने को मिला.

अपने देश की आलोचना करने वाले एक इजरायली यहूदी के रूप में, लेडरमैन को अनूठी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है.

'हमें इजरायल की आलोचना, चाहे कितनी भी कठोर क्यों न हो, और यहूदी-विरोधी के बीच बहुत स्पष्ट रूप से अंतर करने की आवश्यकता है,' वे जोर देते हैं. 'यहूदी-विरोधी कुछ पूर्वाग्रहों, रूढ़ियों, सामान्यीकरण, यहूदियों के शैतानीकरण के बारे में है - एक संप्रभु राज्य की आलोचना नहीं. '

वे कहते हैं कि उनकी पहचान कुछ सुरक्षा प्रदान करती है. 'मैं एक इजरायली यहूदी हूं, इसलिए मुझे यहूदी-विरोधी के रूप में आलोचना करना कठिन है... एक निश्चित विशेषाधिकार है.' हालांकि, वे चेतावनी देते हैं कि 'बहुत बार, लोगों को यहूदी-विरोधी कहना उन्हें चुप कराने का एक तरीका है क्योंकि वे इजरायल की आलोचना करते हैं.'

ध्यान रहे कि लेदरमैन की आलोचना सरकारी नीति से परे इजरायली समाज तक फैली हुई है. वे कहते हैं, 'इजरायली समाज के अधिकांश लोगों ने या तो इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया या इसे वैधता प्रदान की. 'यहां तक ​​कि सरकार के आलोचकों के बीच भी, 'नेतन्याहू की आलोचना करने वाले अधिकांश इजरायली राजनेता नैतिक आधार पर ऐसा नहीं कर रहे हैं - वे बंधकों या सामरिक विफलताओं के बारे में बात कर रहे हैं.'

लेडरमैन ने ये भी स्पष्ट किया कि, सबसे अधिक चिंताजनक बात इजरायली युवाओं पर पड़ने वाला प्रभाव है.  'फिलिस्तीनियों का अमानवीयकरण और शैतानीकरण इजरायल में लंबे समय से चल रहा है - खासकर जब बात गाजा की आती है.' वह चेतावनी देते हैं कि 'कई युवाओं के लिए, गाजा में पीड़ितों का मजाक उड़ाना लगभग मनोरंजन, बदला लेने का एक तरीका है.'

लेडरमैन आलोचना को केवल इज़राइल तक सीमित नहीं रखते. अपनी बातों में लेडरमैन ने डंके की चोट पर इस बात को कहा कि, 'अमेरिकी समर्थन के बिना, इज़राइल वह नहीं कर सकता था जो उसने किया.

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