दुनिया
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 में दो करोड़ 50 लाख बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (डीटीपी) के खिलाफ बुनियादी टीका नहीं मिला.
डीएनए हिंदी: संयुक्त राष्ट्र के पीएमएनसीएच संगठन ने कहा कि दुनियाभर में बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य को जलवायु परिवर्तन और कोविड-19 से खतरा है. सरकारों को इससे निपटने के लिए गंभीर कदम उठाने की जरूरत है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ (Unicef) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में 2.5 करोड़ से ज्यादा बच्चे कई बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं.
दरअसल, महिलाओं, बच्चों के स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े संगठन ‘पार्टनरशिप फॉर मैटर्नल, न्यूबॉर्न एंड चाइल्ड हेल्थ (PMNCH) एकाउंटेबिलिटी ब्रेकफास्ट’ ने एक बयान में कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और यूनिसेफ के आंकड़ों से पता चलता है कि दुनियाभर में सिर्फ 2021 में दो करोड़ 50 लाख बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (डीटीपी) के खिलाफ बुनियादी टीका नहीं मिला.
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27.4 करोड़ लोगों को मदद की जरूरत
बयान में कहा गया कि 2021 में कम से कम एक करोड़ 80 लाख बच्चों को डीटीपी की एक भी खुराक नहीं मिली. इसमें कहा गया कि इनमें से अधिकतर बच्चे निम्न और मध्यम आय वाले देशों में रहते हैं. जिनमें भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, इथियोपिया और फिलीपीन में इनकी सबसे अधिक संख्या है. रिपोर्ट के अनुसार, 2022 में 27.4 करोड़ लोगों को मानवीय सहायता और सुरक्षा की आवश्यकता होगी. यह संख्या एक साल पहले के 23.5 करोड़ लोगों के आंकड़े की तुलना में काफी अधिक है.

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भूख से हर 5 सेंकड में मर रहा एक बच्चा
वहीं, इस संकट के बीच दुनिया में भूखा सोने वालों की संख्या रोजाना तेजी से बढ़ रही है. इससे भी ज्यादा तेजी से भूख के कारण मरने वालों का आंकड़ा बढ़ रहा है. संयुक्त राष्ट्र के वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) के कार्यकारी निदेशक डेविड बेस्ली (David Beasley) के मुताबिक, दुनिया में हर 5 सेकेंड मे एक बच्चा भूख से मर रहा है. उन्होंने बताया कि उन्होंने खाड़ी देशों और दुनिया के अरबपतियों से कहा है कि भूखों को खाना खिलाना उनका 'नैतिक दायित्व' है, जिसके लिए उन्हें अपना कुछ दिन का मुनाफा दान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस दान से उर्वरक आपूर्ति के मौजूदा संकट और अगले साल होने वाली खाद्यान्न की कमी से निपटा जा सकता है.

दुनिया में 40% खाना हो जाता है बर्बाद
क्या आप जानते हैं कि दुनिया भर में कुल उत्पादन का करीब 40% खाद्यान्न बर्बाद हो जाता है, जिससे 3,00 करोड़ लोगों का पेट भरा जा सकता है. एक आंकड़े के अनुसार, भारत ही में हर साल औसतन एक व्यक्ति प्रतिदिन 137 ग्राम भोजन बर्बाद करता है. देश में सालाना करीब 92,000 करोड़ रुपये के बराबर का खाना बरबाद होता है.यूनाइटेड नेशन के आंकड़ों के हिसाब से लगभग 190 मिलियन भारतीय कुपोषित हैं. UN रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सालाना लगभग 68.7 मिलियन टन खाना बर्बाद होता है.
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