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ट्रंप की सिक्योरिटी ने डस्टबिन में क्यों फेंका चाइनीज फोन? जानिए क्या होते हैं ‘बर्नर फोन’ और क्यों दुनिया इससे डरती है

सोचिए, कोई व्यक्ति एयरपोर्ट पर पहुंचे और फ्लाइट में बैठने से पहले अपना मोबाइल सीधे कूड़ेदान में फेंक दे. आम इंसान ऐसा करे तो अजीब लगेगा, लेकिन जब यही काम पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा टीम से जुड़े लोगों ने किया, तो पूरी दुनिया में चर्चा शुरू हो गई.

ऋतु सिंह | May 16, 2026, 10:23 AM IST

1. साइबर निगरानी के डर से इन फोन का इस्तेमाल होता है

 साइबर निगरानी के डर से इन फोन का इस्तेमाल होता है
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बर्नर फोन ऐसे अस्थायी मोबाइल होते हैं जिन्हें सीमित समय और खास मकसद के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ट्रंप की सुरक्षा टीम द्वारा इन्हें उपयोग करने और बाद में फेंक देने की चर्चा ने डिजिटल सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है. चीन जैसे देशों में साइबर निगरानी के डर से इन फोन का इस्तेमाल ज्यादा चर्चा में रहता है, असल सवाल फोन फेंकने का नहीं, बल्कि उस खास तरह के फोन का है जिसे “बर्नर फोन” कहा जाता है. ये वही फोन हैं जिन्हें जासूसी, हाई-प्रोफाइल सिक्योरिटी ऑपरेशन और संवेदनशील यात्राओं में इस्तेमाल किया जाता है. अब सवाल उठ रहा है कि आखिर इन फोन में ऐसा क्या खास होता है कि इस्तेमाल के बाद इन्हें तुरंत खत्म कर दिया जाता है?
 

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2.क्या होते हैं बर्नर फोन?

क्या होते हैं बर्नर फोन?
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बर्नर फोन ऐसे मोबाइल होते हैं जिन्हें सीमित समय के लिए इस्तेमाल किया जाता है. इनका मकसद केवल कॉल, मैसेज या जरूरी संपर्क करना होता है, न कि लंबे समय तक निजी डेटा स्टोर करना.

आमतौर पर ये सस्ते, बेसिक फीचर वाले फोन होते हैं जिनमें ज्यादा ऐप्स, क्लाउड सिंक या पर्सनल डेटा नहीं रखा जाता. जरूरत खत्म होते ही इन्हें बंद कर दिया जाता है, फेंक दिया जाता है या नष्ट कर दिया जाता है ताकि कोई भी व्यक्ति उनका डेटा ट्रैक न कर सके. इसी वजह से इन्हें “बर्नर” यानी इस्तेमाल करके खत्म कर देने वाला फोन कहा जाता है. (फोटो एआई)

3.ट्रंप की सुरक्षा टीम ने इन्हें क्यों इस्तेमाल किया?

ट्रंप की सुरक्षा टीम ने इन्हें क्यों इस्तेमाल किया?
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रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप की सुरक्षा टीम और कई अमेरिकी अधिकारियों को संवेदनशील विदेशी दौरों के दौरान बर्नर फोन दिए गए थे. खासकर उन देशों में जहां साइबर निगरानी और डिजिटल जासूसी का खतरा ज्यादा माना जाता है.

ऐसे फोन इस्तेमाल करने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि अगर डिवाइस हैक भी हो जाए, तो उसमें बहुत सीमित जानकारी होती है. इससे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी अहम जानकारी सुरक्षित रहती है. फ्लाइट में चढ़ने से पहले फोन फेंकने की बात इसलिए चर्चा में आई क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां अक्सर इस्तेमाल के बाद ऐसे डिवाइस को दोबारा उपयोग में नहीं लातीं. इससे ट्रैकिंग या डेटा रिकवरी का खतरा कम हो जाता है. (फोटो एआई)

4.चीन में बर्नर फोन की चर्चा ज्यादा क्यों होती है?

चीन में बर्नर फोन की चर्चा ज्यादा क्यों होती है?
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चीन दुनिया के सबसे एडवांस्ड डिजिटल सर्विलांस सिस्टम वाले देशों में गिना जाता है. वहां इंटरनेट, ऐप्स और डिजिटल कम्युनिकेशन पर काफी निगरानी रखी जाती है. यही वजह है कि कई विदेशी बिजनेस एग्जीक्यूटिव, पत्रकार, राजनयिक और सुरक्षा अधिकारी चीन यात्रा के दौरान अलग फोन इस्तेमाल करते हैं.

कई साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि संवेदनशील डेटा वाले पर्सनल फोन को ऐसी यात्राओं में साथ न ले जाया जाए. इसकी जगह अस्थायी या बर्नर फोन इस्तेमाल किए जाते हैं ताकि निजी जानकारी, बैंकिंग डिटेल, ईमेल या कॉर्पोरेट डेटा सुरक्षित रहे. (फोटो एआई)
 

5.सिर्फ जासूसों के लिए नहीं, आम लोगों के लिए भी क्यों जरूरी हो सकते हैं?

सिर्फ जासूसों के लिए नहीं, आम लोगों के लिए भी क्यों जरूरी हो सकते हैं?
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बर्नर फोन का नाम सुनते ही लोगों को फिल्मों वाले जासूस याद आते हैं, लेकिन आज डिजिटल दुनिया में इनकी जरूरत आम लोगों तक भी पहुंच चुकी है.

उदाहरण के लिए, कई लोग ऑनलाइन खरीद-बिक्री, अस्थायी बिजनेस डील, यात्रा या प्राइवेसी बचाने के लिए अलग नंबर और अलग फोन इस्तेमाल करते हैं. साइबर फ्रॉड और डेटा लीक बढ़ने के बाद डिजिटल सुरक्षा अब केवल सरकारों का मुद्दा नहीं रह गई है.  यही कारण है कि टेक एक्सपर्ट अब “डिजिटल हाइजीन” पर जोर दे रहे हैं, यानी कौन-सी जानकारी किस डिवाइस में रखनी चाहिए, यह समझना जरूरी हो गया है. (फोटो एआई)
 

6.बर्नर फोन की सबसे बड़ी खासियत क्या होती है?

बर्नर फोन की सबसे बड़ी खासियत क्या होती है?
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इन फोन की सबसे बड़ी ताकत उनकी सादगी होती है. इनमें कम फीचर्स होते हैं, इसलिए हैकिंग का खतरा अपेक्षाकृत कम माना जाता है. कई बार इनमें GPS, क्लाउड बैकअप या सोशल मीडिया ऐप्स भी नहीं होते. कुछ एजेंसियां ऐसे फोन में केवल सीमित कॉन्टैक्ट और एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन सिस्टम रखती हैं. जरूरत पूरी होते ही सिम कार्ड नष्ट कर दिया जाता है. यानी यह फोन स्मार्ट कम और सुरक्षित ज्यादा बनाए जाते हैं. (फोटो एआई)
 

7.क्या बर्नर फोन पूरी तरह सुरक्षित होते हैं?

क्या बर्नर फोन पूरी तरह सुरक्षित होते हैं?
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विशेषज्ञ मानते हैं कि कोई भी डिवाइस 100 प्रतिशत सुरक्षित नहीं होता. अगर कोई व्यक्ति लापरवाही करे या असुरक्षित नेटवर्क का इस्तेमाल करे, तो खतरा बना रहता है, लेकिन हां, सामान्य स्मार्टफोन की तुलना में बर्नर फोन डेटा एक्सपोजर कम कर सकते हैं. यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां, पत्रकार और कई कॉर्पोरेट अधिकारी आज भी इनका इस्तेमाल करते हैं. (फोटो एआई)
 

8.डिजिटल दुनिया का नया डर

डिजिटल दुनिया का नया डर
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आज लोगों की पूरी जिंदगी फोन में कैद है, बैंक अकाउंट, निजी फोटो, ऑफिस ईमेल, लोकेशन और सोशल मीडिया तक. ऐसे में अगर फोन हैक हो जाए, तो नुकसान केवल डेटा का नहीं बल्कि पहचान और सुरक्षा का भी हो सकता है. बर्नर फोन की चर्चा इसी डर को सामने लाती है कि आने वाले समय में डिजिटल प्राइवेसी सबसे बड़ा हथियार और सबसे बड़ी कमजोरी दोनों बन सकती है. (फोटो एआई)

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