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कभी भी ज्वालामुखी में जलकर खाक हो सकते हैं दुनिया के ये 6 शहर, एक विस्फोट से मच जाएगी भारी तबाही

आज हम आपको दुनिया के उन शहरों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कभी भी ज्वालामुखियों की वजह से तबाह हो सकती हैं. यहां खतरा सिर्फ लावा से नहीं है बल्कि ज्वालामुखी की राख, जहरीली गैसें और ज्वालामुखी की कीचड़ भी कई किलोमीटर दूर तक भारी तबाही मचा सकती है.

Jaya Pandey | Jul 02, 2026, 10:08 AM IST

1.ज्वालामुखी के साए में हैं धरती के ये 6 शहर

ज्वालामुखी के साए में हैं धरती के ये 6 शहर
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ज्वालामुखी धरती की सबसे शक्तिशाली प्राकृतिक भूवैज्ञानिक शक्तियों में से एक हैं. इन्हीं ज्वालामुखियों ने दुनिया के कई हिस्सों में उपजाऊ मिट्टी, प्राकृतिक बंदरगाह, पहाड़ और ऐसे भू-भाग बनाए हैं, जहां सदियों से लोग खेती और व्यापार करते आ रहे हैं. लेकिन जिन ज्वालामुखियों ने इन इलाकों को समृद्ध बनाया, वही कभी भी इनके विनाश का कारण भी बन सकती हैं. वर्ल्ड एटलस लिस्ट के मुताबिक, आज हम आपको दुनिया के उन शहरों के बारे में बताने जा रहे हैं जो कभी भी ज्वालामुखियों की वजह से तबाह हो सकती हैं. यहां खतरा सिर्फ लावा से नहीं है बल्कि ज्वालामुखी की राख, जहरीली गैसें और ज्वालामुखी की कीचड़ भी कई किलोमीटर दूर तक भारी तबाही मचा सकती है.
(All Image Credit: Wikimedia Commons)

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2.ऑर्टिंग, अमेरिका

ऑर्टिंग, अमेरिका
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अमेरिका के वॉशिंगटन राज्य का ऑर्टिंग शहर सक्रिय ज्वालामुखी माउंट रेनियर का सबसे संवेदनशील इलाका माना जाता है. यह शहर उन नदी घाटियों में बसा है, जहां भविष्य में ज्वालामुखी कीचड़ तेजी से गुजर सकता है. अगर माउंट रेनियर पर बड़ी ज्वालामुखीय घटना होती है तो यह कीचड़ लगभग एक घंटे के अंदर ऑर्टिंग तक पहुंच सकता है. इस वजह से यहां रेगुलर साइरन टेस्ट होता है और स्कूलों और दफ्तरों में ऊंचे जगहों पर पहुंचने के लिए अभ्यास कराए जाते हैं. 

3.टाउटल, अमेरिका

टाउटल, अमेरिका
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वॉशिंगटन का टाउटल माउंट सेंट हेलेंस की वजह से दुनियाभर में मशहूर है. साल 1980 में हुए इसके विनाशकारी विस्फोट ने पूरे इलाके की तस्वीर बदल दी थी. लाखों पेड़ नष्ट हो गए, पुल बह गए और भारी मात्रा में राख और ज्वालामुखीय मलबे ने नदी घाटियों को भर दिया था. आज भी इस इलाके में नदियां ज्वालामुखीय तलछट नीचे की ओर लाती रहती हैं. इस खतरे को कम करने के लिए यहां सेटिमेंट रिटेंशन स्ट्रक्चर जैसी खास संरचना बनाई गई है. इसका मकसद ज्वालामुखीय मलबे को आबादी वाले इलाके तक पहुंचने से रोकना है. 

4.मैमथ लेक्स, अमेरिका

मैमथ लेक्स, अमेरिका
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अमेरिका के कैलिफोर्निया में स्थित मैमथ लेक्स उत्तरी अमेरिका की सबसे बड़े एक्टिव ज्वालामुखीय प्रणालियों में से एक लॉन्ग वैली काल्डेरा के किनारे बसा है. यहां की सबसे बड़ी समस्या जमीन से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड गैस है. कई जगहों पर तो यह गैस जमीन की दरारों से निकलकर निचले इलाकों में जमा हो जाती है जिससे ऑक्सीजन की मात्रा बेहद कम हो जाती है. इस वजह से यहां हजारों पेड़ भी सूख चुके हैं. 

5.कागोशिमा, जापान

कागोशिमा, जापान
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जापान का कागोशिमा शहर सकुराजिमा ज्वालामुखी की छाया में बसा है. यह दुनिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है और यहां अक्सर छोटे-छोटे विस्फोट  होते रहते हैं. कई बार ज्वालामुखी की राख शहर तक पहुंच जाती है. यहां के लोग इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा मान चुके हैं. मौसम विभाग राख के फैलाव का पूर्वानुमान भी जारी करता है जिससे लोग पहले से तैयारी कर सकें. नगर प्रशासन लोगों को राख को इकट्ठा करने के लिए बैग भी उपलब्ध कराता है. कई स्कूलों में ज्वालामुखी गतिविधियां बढ़ने पर बच्चों को हेलमेट पहनने की सलाह दी जाती है. 

6.नेपल्स, इटली

नेपल्स, इटली
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इटली का नेपल्स दुनिया के सबसे जोखिम वाले बड़े शहरों में शामिल है. इसके पास एक नहीं बल्कि दो सक्रिय ज्वालामुखीय प्रणालियां मौजूद हैं. शहर के पूर्व में माउंट वेसुवियस और पश्चिम में विशाल कैम्पी फ्लेग्रेई ज्वालामुखीय क्षेत्र स्थित है. 79 ईस्वी में वेसुवियस के भीषण विस्फोट ने पोम्पेई और हरकुलेनियम जैसे प्राचीन रोमन शहरों को राख और ज्वालामुखीय मलबे के नीचे दफन कर दिया था. वेसुवियस का आखिरी बड़ा विस्फोट साल 1944 में हुआ था. भविष्य में यहां ज्वालामुखीय गतिविधियां होने की संभावना है जिसके लिए इटली की सरकार ने तैयारियां भी कर ली हैं. 

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