दुनिया
Kusum Lata | May 20, 2026, 04:05 PM IST
1.क्यों है मेलोडी की चर्चा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की PM जॉर्जिया मेलोनी के सरनेम यानी मेलोनी और मोदी को जोड़कर दोनों के लिए लोग Melody नाम का इस्तेमाल करते हैं. पीएम मोदी अपने 5 स्टेट विजिट के आखिरी पड़ाव में इटली पहुंचे हैं. वहां, उन्होंने मेलोनी को पारले की मेलोडी चॉकलेट का एक पैकेट गिफ्ट में दिया है. इसके बाद से मेलोडी चॉकलेट की चर्चा शुरू हो गई है.
2.क्या है मेलोडी बनाने वाली पारले की कहानी?

पारले की शुरुआत एक छोटी सी मिठाई की दुकान से हुई थी. 1929 में मुंबई के विले पारले इलाके में मोहन लाल दयाल ने 12 लोगों के साथ एक मिठाई की दुकान शुरू की. विले पारले से शुरू हुई कंपनी का नाम पारले रखा गया. टीन शेड के नीचे कंपनी की पहली फैक्ट्री स्थापित हुई. शुरुआत में पारले मिठाई और ऑरेंज गोलियां बनाती थी.
3.Parle G आया और बदल गई तस्वीर

Parle की शुरुआत के लगभग 10 साल बाद 1939 में Parle Gluco बिस्किट लॉन्च किया गया. शुरुआत में पारले को केवल ब्रिटिश आर्मी के लिए बिस्किट सप्लाई करने का लाइसेंस दिया गया. आज़ादी के बाद इसे ब्रिटिश ग्लूकोज़ बिस्किट्स के सस्ते ऑल्टरनेट के तौर पर प्रचारित किया गया. यह बिस्किट खूब पसंद किया गया. 1982 में पारले ने इस बिस्किट को पारले ग्लूको की जगह Parle-G नाम से रीब्रांड किया. यह कंपनी के लिए एक बड़ा टर्निंग पॉइंट था. G माने जीनियस टैग लाइन आया और साल 2003 में नीलसन ने कहा कि पारले जी दुनिया का सबसे ज्यादा बिकने वाला बिस्किट है. पारले जी को भारत का सबसे आइकॉनिक बिस्किट माना जाता है.
4.Monaco, Poppins और Crack Jack ने मार्केट पर किया कब्ज़ा

पारले जी की सफलता के बाद कंपनी को लगा कि उन्हें उन ग्राहकों को भी केटर करना चाहिए जो मीठा कम पसंद करते हैं. कंपनी ने 1942 में नमकीन बिस्कुट मोनैको लॉन्च किया. यह सॉल्टी और क्रंची बिस्किट खूब पसंद किया गया. इसके बाद कंपनी ने चीसलिंग्स, पॉपिन्स, पारले टॉफी, डब्बों में आने वाला पारले जेफ और फिर 1972 में पारले ने क्रैक जैक लॉन्च किया. इनमें से मोनैको, पॉपिन्स, पारले टॉफी और क्रैक जैक की आज भी मार्केट में जबरदस्त पकड़ है.आपके घर में अगर बच्चे हैं, तो इस बात की पूरी गैरंटी है कि आपके घर में पारले का सामान आता ही होगा. फ्रूटी, हाइड एंड सीक, कच्चा आम, मैंगो बाइट ये सब पारले के ही प्रोडक्ट्स हैं. पारले भारत के सबसे ज्यादा रिकॉल वैल्यू वाले ब्रांड्स में से एक है.
5.पारले ने ही भारत को दिया Thums Up

पारले ने एक लंबे समय तक बिस्किट, टॉफी, स्नैक्स के बिजनेस में ही काम किया. हालांकि, 1977 में जब मोरारजी देसाई की सरकार ने भारत से कोका-कोला को बैन किया तो पारले को सॉफ्ट ड्रिंक बिजनेस में बड़ा स्कोप दिखा. कंपनी ने फ्रूटी, गोल्ड स्पॉट और थम्स अप लॉन्च किया. फ्रूटी आज भी कंपनी की सबसे पॉपुलर मैंगो ड्रिंक है. वहीं, 1993 में उदारीकरण के बाद जब कोका-कोला भारत में वापस आई, तो पारले ने थम्स अप को कोका-कोला को बेच दिया.
6.Melody की कहानी

मेलोडी भारत की एक पॉपुलर चॉकलेट कैंडी है. 1983 में पारले ने मेलोडी लॉन्च की. उस दौर में चॉकलेट बार भारत के ज्यादातर बच्चों की पहुंच से बाहर थे. इस गैप को भरने के लिए पारले ने मेलोडी लॉन्च की. यह एक दो लेयर की चॉकलेट है, जिसके आउटर लेयर में कैरेमल होता है और बीच में चॉकलेट फिलिंग होती है. मेलोडी की फेमस पंच लाइन- ये मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है, खूब हिट हुई.
7.अब कौन संभालता है पारले?

पारले की शुरुआत मोहनलाल चौहान ने अपने पांच बेटों मानेक लाल, पीताम्बर, नरोत्तम, कांति लाल और जयंतीलाल के साथ मिलकर की थी. बाद में सबसे छोटे भाई जयंतीलाल ने इस बिजनेस से बंटवारा ले लिया. इस बंटवारे में पारले प्रोडक्ट्स चार बड़े भाइयों के पास रहा और पारले का बेवरेज बिजनेस पारले बिसलेरी जयंतीलाल को मिला. बाद में जयंती लाल के बेटे प्रकाश ने पारले एग्रो लॉन्च किया. अब पारले की तीन प्रमुख कंपनियां हैं- पारले प्रोडक्ट्स, पारले एग्रो और पारले बिसलेरी. पारले प्रोडक्ट्स को अभी भी बड़े चार भाईयों के बच्चे संभालते हैं. वहीं, पारले एग्रो को जयंती लाल के बड़े बेटे प्रकाश चौहान और पारले बिसलेरी को उनके छोटे बेटे जयंतीलाल चौहान संभालते हैं. तीनों ही बिजनेस पारले के ट्रेडमार्क के साथ अपना सामान बेचते हैं, तीनों के बीच समझौता है कि वो एक-दूसरे के कॉम्पिटीटिव प्रोडक्ट्स लॉन्च नहीं करेंगे.