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दुनिया का अनोखा पेड़ जिसे कभी जेल की तरह किया जाता था इस्तेमाल, डेड बॉडी दफनाने में भी आता था काम!

दुनियाभर में अजीबोगरीब पेड़ मौजूद हैं लेकिन आज हम आपको उस पेड़ के बारे में बताएंगे जिसे कभी जेल की तरह इस्तेमाल किया जाता था और इसमें कैदियों को कैद किया जाता था.

Jaya Pandey | May 14, 2026, 06:04 PM IST

1.कभी जेल की तरह इस्तेमाल होता था ये पेड़

कभी जेल की तरह इस्तेमाल होता था ये पेड़
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दुनियाभर में कई ऐसे पेड़ मौजूद हैं, जो अपने आकार, उम्र या अनोखी बनावट के कारण लोगों को हैरान कर देते हैं. लेकिन ऑस्ट्रेलिया में एक ऐसा पेड़ भी है, जिसके बारे में लंबे समय तक यह माना जाता रहा कि उसे कभी जेल की तरह इस्तेमाल किया जाता था. यह मशहूर पेड़ डर्बी बाओबाब प्रिजन ट्री के नाम से जाना जाता है. 
(Image Credit: Wikimedia Commons)

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2.कहां है यह रहस्यमयी पेड़?

कहां है यह रहस्यमयी पेड़?
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यह पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के डर्बी शहर से करीब 6 किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक विशाल और खोखला बाओबाब पेड़ है, जिसका साइंटिफिक नाम Adansonia gregorii है. यह पेड़ लगभग 1,500 साल पुराना है और इसका इतना विशाल आकार है कि इसका घेरा करीब 14.7 मीटर का है. कहा जाता है 1890 के दशक में इस खोखले पेड़ का इस्तेमाल कैदियों के लॉकअप के रूप में किया जाता था. जब उन्हें डर्बी में सजा सुनाने या दूसरी जगह ले जाने की तैयारी होती थी, तब उन्हें यहां बंद रखा जाता था. हालांकि, इतिहासकारों का कहना है कि इस दावे का ठोक ऐतिहासिक सबूत नहीं है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)

3.बोआब पेड़ों का महत्व

बोआब पेड़ों का महत्व
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यह पेड़ पश्चिमी किम्बरली क्षेत्र के आदिवासी समुदायों के लिए सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व भी रखता है. न्युलन्युलन भाषाओं में बोआब पेड़ों को लार्गाडिय या लार्गाडी कहा जाता है और इन्हें सम्मान की नजर से देखा जाता है. स्थानीय आदिवासी समुदाय इन प्राचीन पेड़ों को केवल प्राकृतिक संरचना नहीं, बल्कि एक जीवित विरासत और पौराणिक महत्व वाले अस्तित्व के रूप में मानते रहे हैं. कई बार इन्हें समुदाय की कहानियों, परंपराओं और आध्यात्मिक विश्वासों से भी जोड़ा जाता है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)

4.कभी कब्र की तरह भी होता था इस पेड़ का इस्तेमाल

कभी कब्र की तरह भी होता था इस पेड़ का इस्तेमाल
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इस पेड़ का शुरुआती दस्तावेजीकरण 1916 में मानवविज्ञानी हर्बर्ट बेसेडो ने किया था. उन्होंने किम्बरली क्षेत्र की यात्रा के दौरान इस विशाल पेड़ की तस्वीर ली और अपने लेखों में उल्लेख किया कि स्थानीय आदिवासी लोग इसके खोखले हिस्से का इस्तेमाल रहने और कभी-कभी कब्र के रूप में करते थे. बेसेडो ने इसे एक सूखी और सुरक्षित प्राकृतिक झोपड़ी जैसा बताया था. उन्होंने पेड़ के आसपास मानव अवशेष मिलने का भी जिक्र किया, जिससे संकेत मिलता है कि दो सकता है कि इसका इस्तेमाल अस्थियों को सुरक्षित रखने या अंतिम संस्कार के लिए भी किया जाता था.
(Image Credit: Wikimedia Commons)

5.आज पर्यटन स्थल बन चुका है यह पेड़

आज पर्यटन स्थल बन चुका है यह पेड़
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आज डर्बी का यह विशाल बोआब पेड़ पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया का एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन चुका है. इसे Aboriginal Heritage Act 1972 के तहत संरक्षित किया गया है. हाल के सालों में पेड़ के चारों ओर सुरक्षा बाड़ भी लगाई गई है, जिससे लोग इसकी सतह को खराब न कर सकें.  यह पेड़ आज केवल एक रहस्यमयी कहानी का हिस्सा नहीं, बल्कि इतिहास, संस्कृति और प्रकृति के अनोखे मेल का प्रतीक बन चुका है.
(Image Credit: Wikimedia Commons)

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