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AK-47, ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर से लैस बनी हशीश कबीला उतरा मैदान में, हूतियों के समर्थन से यमन में बढ़ा संकट!

बनी हशीश का हूतियों से सबसे महत्वपूर्ण टकराव 2008-09 के आसपास देखने को मिला था. उस समय हूती लड़ाकों और बनी हशीश के कुछ हिस्सों के बीच गंभीर लड़ाई हुई थी.

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AK-47, ग्रेनेड और रॉकेट लॉन्चर से लैस बनी हशीश कबीला उतरा मैदान में, हूतियों के समर्थन से यमन में बढ़ा संकट!

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यमन की सुलगती रेत पर एक बार फिर मध्यकालीन युद्धों जैसी तस्वीरें उभरने लगी हैं. राजधानी सेना के पास पहाड़ों से नीचे उतरता हथियारबंद लोगों का एक विशाल कारवां सीधे मारिब शहर की तरफ बढ़ रहा है. कंधों पर लटके रॉकेट प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG), हाथों में थामी AK-47 और पारंपरिक पोशाक में नजर आ रहे इन लड़ाकों का तेवर साफ बता रहा है कि यमन का संघर्ष एक नये और खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है. इस शक्ति प्रदर्शन ने क्षेत्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है.

पहाड़ों से मैदान तक कबीलाई युद्ध 

यमन की भौगोलिक बनावट और वहां की संस्कृति में कबीलों की ताकत हमेशा से निर्णायक रही है. राजधानी के ठीक पूर्व में बसा 'बनी हाशिश' कबीला रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्थिति में है. इस कबीले के लड़ाकों का हूती विद्रोहियों के साथ आना कोई सामान्य घटना नहीं है. सदियों पुरानी परंपराओं को निभाते हुए, जब ये आदिवासी लड़ाके आधुनिक हथियारों के साथ खुले मैदान में उतरते हैं, तो यह सिर्फ एक सैन्य मोर्चा नहीं बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की सोची-समझी रणनीति बन जाती है.

तेल, गैस और सत्ता की असली जंग

आखिर इस पूरे सैन्य प्रदर्शन का केंद्र बिंदु 'मारिब' ही क्यों है. इसकी वजह इस क्षेत्र के भूगोल और आर्थिक संसाधनों हैं. मारिब यमन का वह आखिरी बड़ा शहरी गढ़ है, जो लंबे समय से सरकार समर्थक ताकतों के नियंत्रण में है. इसके साथ ही यह क्षेत्र तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडारों से समृद्ध है. अगर हूती समर्थक कबीले इस सामरिक क्षेत्र पर पकड़ मजबूत करने में कामयाब होते हैं, तो इससे विद्रोहियों की आर्थिक और रणनीतिक ताकत में कई गुना बढ़ोतरी हो जाएगी.

सऊदी अरब की बढ़ी मुश्किलें और सुरक्षा चिंताएं

यमन के इन अंदरूनी घटनाक्रमों का सबसे सीधा असर पड़ोसी देश सऊदी अरब पर पड़ता है. मारिब का इलाका सऊदी सीमा और राजधानी सना के बीच एक अहम गलियारा है. कबीलाई लड़ाकों की इस अग्रिम चाल से सऊदी समर्थित बलों की रक्षा पंक्तियां दबाव में आ रही हैं. जानकारों का मानना है कि यदि हूतियों को मारिब के मोर्चे पर बढ़त मिलती है, तो सऊदी अरब की सीमाओं के नजदीक सुरक्षा जोखिम और अधिक गंभीर हो जाएंगे.

हाई टेक्नोलॉजी और हथियारों का मेल

इस युद्ध की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आधुनिक गैजेट्स और पारंपरिक लड़ाकू तौर-तरीकों का अनूठा मिश्रण दिखता है. एक तरफ जहां अत्याधुनिक ड्रोन और मिसाइलें इस युद्ध का हिस्सा हैं, वहीं दूसरी तरफ रेगिस्तानी रास्तों पर भारी हथियारों से लैस टोयोटा पिकअप ट्रक का यह बेड़ा इस बात का प्रमाण है कि विषम परिस्थितियों में स्थानीय ताकतें किस कदर प्रभावी साबित होती हैं. फिलहाल, दोनों पक्षों के बीच छिड़ी इस रस्साकशी ने यमन की शांति की उम्मीदों को और दूर धकेल दिया है.

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