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हूतियों ने सऊदी अरब के सैन्य ठिकानों, तेल रिफाइनरियों और रेड सी में जहाजों पर ड्रोन व मिसाइल हमले तेज कर दिए हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच तो तनातनी को सुलझाने की कोशिशें चल ही रही थीं, लेकिन इस बीच मिडिल ईस्ट में एक और जंग की आग भड़क उठी है. यमन के हूती विद्रोहियों, जिन्हें ईरान का समर्थन हासिल है, उन्होंने सऊदी अरब के अहम सैन्य ठिकानों और तेल के कुओं पर हमले तेज कर दिए हैं.
हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के बीच यह लड़ाई अब तक के सबसे खतरनाक दौर में पहुंच गई है. साल 2022 में संयुक्त राष्ट्र की पहल पर शांति समझौता हुआ था, जिससे 8 साल से चली आ रही भयानक जंग पर ब्रेक लगा था. लेकिन अब वह शांति पूरी तरह खत्म होती दिख रही है.
इस बीच, सऊदी अरब पर हुए हमलों के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या वह मुस्लिम नाटो (Muslim NATO) को मैदान में उतारेगा? यह पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की का एक सुरक्षा गठबंधन है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने भी इशारा किया है कि जरूरत पड़ने पर ऐसा किया जा सकता है.
तनाव की शुरुआत तब हुई जब यमन की सरकारी सेना ने हूती कब्जे वाले सना एयरपोर्ट पर हमला कर दिया. सेना का मकसद ईरान से आ रहे एक प्लेन को उतरने से रोकना था. इसके तुरंत बाद हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी का ऐलान कर दिया. उन्होंने लाल सागर में सऊदी के तेल टैंकरों, हवाई अड्डों और रिफाइनरियों पर ड्रोन और मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए.
इसके बाद दोनों तरफ से हमलों का सिलसिला तेज हो गया. बात तब और बिगड़ गई जब हूती विद्रोहियों ने ताइज और हुदैदा शहरों से होते हुए मोचा बंदरगाह और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य की तरफ बढ़ने के लिए बड़ा सैन्य अभियान शुरू कर दिया. ये विद्रोही असल में ईरान के राजनीतिक और युद्ध रणनीतियों को फायदा पहुंचाने के लिए लाल सागर में व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं.
सऊदी अरब का कहना है कि सोमवार को उसके दक्षिण-पश्चिमी शहरों (अभा, खमीस मुशैत, जीज़ान और नजरान) के सैन्य और तेल ठिकानों पर हुए हूती हमलों में महिलाओं और बच्चों समेत 73 नागरिक घायल हो गए. सऊदी सरकार ने अब इसका करारा जवाब देने की कसम खाई है.
दूसरी तरफ, हूतियों का दावा है कि उन्होंने यमन सरकार की सेना के हथियार ले जा रहे कई ट्रकों को तबाह कर दिया है. उन्होंने सऊदी अरब पर यमन की एक जेल पर बमबारी करने का भी आरोप लगाया है, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई.
ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, यमन के ताइज, अल-बायदा, अल-धालिया और अल-हुदैदा प्रांतों में सरकारी सेना और हूतियों के बीच भीषण झड़पें जारी हैं, जिसमें कई लोग मारे गए हैं. बाब अल-मंडेब के पास मोचा बंदरगाह को हूतियों के कब्जे से बचाने के लिए और ज्यादा सेना तैनात की गई है.
इस भीषण लड़ाई से डर पैदा हो गया है कि यमन एक बार फिर पूरी तरह से गृहयुद्ध की दलदल में धंस जाएगा. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, सिर्फ 23 अगस्त से 5 सितंबर के बीच ही कम से कम 194 लोग मारे गए और 880 से ज्यादा घायल हुए. इस पूरे संघर्ष में अब तक करीब 1.5 लाख लोग अपनी जान गंवा चुके हैं.
सितंबर 2014 में हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था, जिससे यह जंग शुरू हुई. सऊदी अरब को लगा कि हूतियों का उभार उसकी खुद की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है. इसलिए 2015 में सऊदी ने यूएई, कतर, कुवैत और मिस्र जैसे देशों को मिलाकर एक सैन्य गठबंधन बनाया और यमन सरकार की मदद के लिए हमला बोल दिया, हालांकि उन्हें पूरी सफलता नहीं मिली.
आज हालात यह हैं कि यमन की सरकारी सेना को सऊदी अरब से हथियार मिलते हैं, जबकि हूतियों को ईरान से मदद मिलती है. अगर यह जंग और फैली, तो लाल सागर से गुजरने वाले दुनिया भर के व्यापारिक जहाजों और तेल के सप्लाई रूट पर बहुत बुरा असर पड़ेगा.
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