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चांकाय समाज में ममी के अंतिम संस्कार में सिंदूर का क्यों होता था इस्तेमाल? अमेरिका के म्यूजियम में मिले मास्क ने दुनिया को किया हैरान

अमेरिका के बाल्टीमोर के वाल्टर्स आर्ट म्यूजियम में मौजूद पेरू के चांकाय समाज से जुड़ा एक खास मुखौटा दुनिया को हैरान कर रहा है, जानें इसमें ऐसा क्या अनोखा है...

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चांकाय समाज में ममी के अंतिम संस्कार में सिंदूर का क्यों होता था इस्तेमाल? अमेरिका के म्यूजियम में मिले मास्क ने दुनिया को किया हैरान

पेरू की ममी का अनोखा मास्क (Image credit: The Walters Art Museum/Wikimedia Commons)

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  • पेरू का अनोखा चांकाय समाज
  • वाल्टर्स आर्ट म्यूजियम में मिला चांकाय समाज का अनोखा मुखौटा
  • असली बाल और सिंदूर से सजाया गया है इसे
  • इंका साम्राज्य के उदय से कई सदी पहले अस्तित्व में था चांकाय समाज

ममी हमेशा से इंसानों को आकर्षित करती रही हैं. मिस्र के पिरामिडों और वहां दफनाई गई ममियों की कहानियां तो पूरी दुनिया में मशहूर हैं. लेकिन ममी बनाने और मृतकों को खास तरीके से सजाने की परंपरा सिर्फ मिस्र तक सीमित नहीं थी. दक्षिण अमेरिका के पेरू में भी कई प्राचीन संस्कृतियों में मृतकों के शरीर को खास तरीके से तैयार कर दफनाने की परंपरा थी. इस परंपरा से जुड़ा करीब हजार साल पुराना एक अनोखा मुखौटा अब लोगों का ध्यान खींच रहा है. लकड़ी का यह मुखौटा इंसानी बालों और कपड़ों की पट्टियों से सजाया गया था. 

चांकाय संस्कृति क्या थी?

यह मुखौटा चांकाय संस्कृति से जुड़ा है. यह संस्कृति इंका साम्राज्य के उदय से कई सदियों पहले पेरू के मध्य तटीय इलाके में विकसित हुई थी. चांकाय संस्कृति का समय लगभग 1000 से 1450 ईस्वी के बीच माना जाता है. यह समाज पेरू की मध्य तटरेखा और उसकी नदी घाटियों में रहता था. चांकाय लोग अपनी खास मिट्टी की मूर्तियों, बर्तनों, कपड़ों और अनोखी अंतिम संस्कार की परंपराओं के लिए जाने जाते थे. उनके समाज और संस्कृति के बारे में जानकारी आर्कियोलॉजिकल साइट से मिले कब्रों, कपड़ों, सिरेमिक और दूसरी कलाकृतियों से मिलती है. 

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चांकाय समाज की अंतिम संस्कार की खास परंपरा

चांकाय समाज में मृतकों को दफनाने की एक खास परंपरा थी. इसमें मृत शरीर को कपड़ों, रस्सियों, पौधों से बनी सामग्री और कभी-कभी दूसरे जैविक वस्तुओं की कई परतों में लपेटा जाता था. शरीर को अक्सर बैठी या भ्रूण जैसी स्थिति में रखा जाता था और फिर उसे कपड़े की परतों से बांधकर एक बड़ा बंडल तैयार किया जाता था. इस बंडल के साथ कब्र में भोजन, औजार, बर्तन, मूर्तियां और दूसरी वस्तुएं भी रखी जाती थीं. इन चीजों का संबंध मृत व्यक्ति की सामाजिक स्थिति, उसके जीवन या मृत्यु के बाद की मान्यताओं से था.

इन बंडलों की एक विशेषता यह थी कि कभी-कभी उनके ऊपर एक अलग से सिर या मुखौटा लगाया जाता था. इस नकली सिर को लकड़ी या कपड़े से बनाया जाता था. बंडल को कई परतों में लपेटने के बाद यह पता ही नहीं चलता था कि आखिर मृतक का सिर किस दिशा में है. ऐसे में यह मुखौटा मृत व्यक्ति की पहचान और स्मृति को प्रतीकात्मक रूप से दिखाने का काम करता था.

पेरू से मिला मुखौटा क्या बयां करता है?

पेरू से मिला यह खास मुखौटा अमेरिका के बाल्टीमोर के वाल्टर्स आर्ट म्यूजियम में मौजूद है. यह लगभग असली इंसानी चेहरे जैसा लगता है. इसकी ऊंचाई करीब 30.5 सेंटीमीटर और चौड़ाई करीब 20.3 सेंटीमीटर है. मुखौटे का चेहरा बेहद सरल तरीके से बनाया गया है. इसमें हीरे के आकार जैसी आंखें, त्रिकोणीय नाक और एक मुस्कान दिखाई देती है. चांकाय काल के ऐसे मुखौटों में किसी इंसान के असली चेहरे की नकल नहीं की जाती थी बल्कि चेहरे की पहचान योग्य विशेषताओं को सरल और प्रतीकात्मक रूप में दिखाया जाता था.

इस मुखौटे पर लगाया गया बाल असली इंसानी बाल है. मुखौटे को लाल रंग देने के लिए सिनाबार या सिंदूर का इस्तेमाल किया गया था. सिनाबार पारे के सल्फाइड से बना एक विषैला चमकीला लाल खनिज है जिसे प्राचीन की कई संस्कृतियों में रंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता था. चांकाय संस्कृति को इंका सभ्यता की तुलना में कम जाना जाता है, लेकिन पुरातात्विक खोजों ने इस समाज के बारे में कई अहम जानकारी दी है. 

चांकाय समाज के अंतिम संस्कार की जगहों से मिले मानव अवशेषों पर किए गए रिसर्च से उनके शरीर पर बने टैटू और दूसरे सजावटी परंपराओं के बारे में भी जानकारी मिली है. इन खोजों से संकेत मिलता है कि चांकाय समाज में कला केवल रोजमर्रा की चीजों तक सीमित नहीं थी, बल्कि धार्मिक विश्वासों, सामाजिक पहचान और मृतकों से जुड़ी परंपराओं का भी महत्वपूर्ण हिस्सा थी.

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