Advertisement

India Nuclear Power: भारत के बढ़ते परमाणु जखीरे के पीछे क्या है राज? टेंशन में चीन-पाक

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने अपने परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ाकर 180 कर ली है, जो पाकिस्तान की परमाणु संख्या से ज्यादा है. भारत ने केवल परमाणु बमों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि तकनीक और तैनाती की क्षमता में भी उन्नति की है.

Latest News
India Nuclear Power: भारत के बढ़ते परमाणु जखीरे के पीछे क्या है राज? टेंशन में चीन-पाक

India increased the number of nuclear bombs

Add DNA as a Preferred Source

स्वीडन स्थित प्रतिष्ठित थिंक टैंक SIPRI (स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत के पास अब 180 परमाणु हथियार हैं. पाकिस्तान की संख्या जहां तीन साल से 170 पर स्थिर बनी हुई है, वहीं भारत ने 2023 में 164 से बढ़ाकर 2025 की शुरुआत तक यह संख्या 180 कर ली है.

केवल संख्या नहीं, तकनीक में भी बढ़त

भारत ने केवल परमाणु बमों की संख्या ही नहीं बढ़ाई, बल्कि तकनीक और तैनाती की क्षमता में भी बढ़ोतरी की है. MIRV (Multiple Independently Targetable Re-entry Vehicles) और कैनिस्टराइज्ड मिसाइल टेक्नोलॉजी ने भारत की न्यूक्लियर रेस्पॉन्स को अधिक सटीक और तेज़ बना दिया है.

पहले भारत के कम हथियार रखने के कारण

भारत ने वर्षों तक पाकिस्तान से कम परमाणु हथियार रखे, जिसके पीछे तीन प्रमुख वजहें थीं.

1. 'नो फर्स्ट यूज' नीति: भारत ने 1998 से ही स्पष्ट किया है कि वह पहले हमला नहीं करेगा.
2. भूगोल: पाकिस्तान का छोटा क्षेत्रफल संतुलन के लिए कम हथियारों को पर्याप्त बनाता है.
3. गुणवत्ता पर ध्यान: भारत ने संख्या से अधिक तकनीकी दक्षता को तरजीह दी.

अब फोकस चीन पर बढ़ता खतरा

चीन के पास वर्तमान में लगभग 600 परमाणु हथियार हैं और वह हर साल करीब 100 और तैयार कर रहा है. SIPRI के अनुसार, चीन ने हाल ही में कई हथियार "ऑपरेशनल अलर्ट" पर तैनात किए हैं. यह भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती बन गया है.


अग्नि-6 और लंबी दूरी की तैयारी

भारत अब अग्नि-6 मिसाइल विकसित कर रहा है, जिसकी रेंज 6,000–8,000 किमी तक हो सकती है, जिससे चीन के अधिकांश हिस्सों को टारगेट किया जा सकेगा. चीन के फैलाव के कारण भारत को ज्यादा संख्या में सटीक और लंबे रेंज के हथियारों की जरूरत है.

रणनीति: दोहरे मोर्चे के लिए तैयार

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की रणनीति अब दोहरे मोर्चे पाकिस्तान और चीन से एक साथ निपटने की ओर बढ़ रही है. "नो फर्स्ट यूज" नीति बरकरार है, लेकिन अब इसका समर्थन ज्यादा सशक्त प्रतिरोध क्षमता से किया जा रहा है.

भारत की वैश्विक परमाणु स्थिति

भारत की परमाणु नीति अब भी 'न्यूनतम लेकिन विश्वसनीय प्रतिरोध' (Minimum Credible Deterrence) पर केंद्रित है. रूस और अमेरिका के मुकाबले भारत की गिनती सीमित लेकिन रणनीतिक रूप से सक्षम देशों में होती है.

 

अपनी राय और अपने इलाके की खबर देने के लिए जुड़ें हमारे गूगलफेसबुकx,   इंस्टाग्रामयूट्यूब और वॉट्सऐप कम्युनिटी से.

    Read More
    Advertisement
    Advertisement
    Advertisement