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नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की को केयरटेकर पीएम बनाया गया है, जानें कौन हैं कार्की और अपने किन फैसलों की वजह से वह जनता के बीच हुईं लोकप्रिय...
नेपाल के पूर्व पीएम केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद राजनीतिक अनिश्चितता के बीच पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनने पर हामी भर दी है. वह बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा रही हैं, ऐसे में उनका इस अहम पद पर आसीन होना निश्चित तौर पर भारत और नेपाल के संबंधों में काफी गति देगी.
सुशीला कार्की नेपाल के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं क्योंकि वे सुप्रीम कोर्ट की पहली महिला चीफ जस्टिस रह चुकी हैं. उन्होंने जुलाई 2016 से जून 2017 तक सेवा की. 1970 के दशक के अंत में अपना कानूनी करियर शुरू करने के बाद साल 2009 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और 2010 में स्थायी न्यायाधीश के रूप में उनकी नियुक्ति की पुष्टि हुई.
सुशाली कार्की को भ्रष्टाचार के प्रति अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति और साहसिक फैसले देने की प्रतिष्ठा के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है. उनके एक ऐतिहासिक फैसले ने महिलाओं को अपने बच्चों को नागरिकता के अधिकार हस्तांतरित करने में सक्षम बनाया, जो नेपाल में लैंगिक समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
इसके अलावा उन्होंने संसद में महाभियोग की कार्यवाही का सामना करने वाली नेपाल की पहली मुख्य न्यायाधीश बनकर भी इतिहास रचा. बाद में जनता के आक्रोश और न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद यह प्रस्ताव वापस ले लिया गया.
अपने कार्यकाल के दौरान कार्की अपनी स्वतंत्रता के लिए जानी जाती थीं और अक्सर शक्तिशाली राजनीतिक और संस्थागत हितों को चुनौती देती थीं. कार्यवाहक पीएम नेता के रूप में उनके उदय को लोग नेपाल के राजनीतिक संकट के दौरान तटस्थता सुनिश्चित करने और शासन में विश्वास बहाल करने के प्रयास के रूप में देख रहे हैं.
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