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शेख रशीद अहमद ने दावा कि जब वह अमेरिका में थे तो उनके फोन में हाफिद सईद का नंबर मिल गया था, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने उन्हें देश से बाहर निकाल दिया.
Sheikh Rasheed Ahmed: बेतुके और भड़काऊ भाषण के लिए मशहूर पाकिस्तान के पूर्व गृहमंत्री शेख रशीद अहमद एक बार फिर चर्चाओं में हैं. इस बार उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी के साथ मंच शेयर किया और खुलेआम मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद की शान में खूब कसीदे भी पढ़े हैं.
शेख रशीद अहमद की हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा के साथ लिंक होने की पहले भी खबरें आती रही हैं. इस बार तो उन्होंने खुद को हाफिद सईद का 'गुलाम' ही बता दिया. उन्होंने कहा, 'मैं हाफिज साहब का गुलाम हूं.' कार्यक्रम के वीडियो में शेख रशीद अहमद के साथ मंच पर खालिद मसूद संधु और कारी मुहम्मद याकूब शेख बैठे नजर आ रहे हैं. संधू की पहचान लश्कर के सीनियर कमांडर और पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (PMML) के अध्यक्ष के रूप में हुई है.
शेख रशीद अहमद ने आतंकियों के साथ अपनी इस तकरीर में भारत के खिलाफ भी खूब जहर उगला. उन्होंने गीदड़भभकी देते हुए कहा कि अगर भारत ने पाकिस्तान की तरफ आंख उठाकर भी देखा तो अल्लाह उसे तबाह कर देगा. वह यहां नहीं रुके अपनी बेतुकी बयानबाजी में आगे कहा, 'भारत में न तो कोई परिंदा चहचहाएगा और न ही किसी मंदिर में घंटियां बजेंगी. हम पाकिस्तान के साथ हैं, हम हाफिज सईद के साथ हैं.' उन्होंने यह दावा भी किया कि जब वह अमेरिका में थे तो उनके फोन में हाफिद सईद का नंबर मिल गया था, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने उन्हें देश से बाहर निकाल दिया.
शेख रशीद अहमद पाकिस्तान की राजनीति का बड़ा चेहरा हैं. छह बार लगातार नेशनल असेंबली के मेंबर रहे और तीन बार केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं. अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों की नांव में बैठकर उन्होंने अपना राजनीतिक सफर तय किया है. पूर्व पाक आर्मी चीफ आयूब खान के खिलाफ आंदोलन से राजनीति में एंट्री लेने वाले रशीद अहमद परवेज मुशर्रफ के शासनकाल से इमरान खान तक पाकिस्तान सरकार में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं. आइए इनके जन्म से पॉलिटिकल करियर पर करीब से नजर डालते हैं-
शेख रशीद अहमद का जन्म 6 नवंबर, 1950 को रावलपिंडी में हुआ था. उन्होंने गॉर्डन कॉलेज से ग्रेजुएशन के बाद लाहौर के लॉ कॉलेज में पढ़ाई की और इसी दौरान उनका राजनीतिक सफर भी शुरू हो गया. छात्र राजनीति के दौरान वह पाकिस्तान के पूर्व तानाशाह राष्ट्रपति और पाक सेना के प्रमुख रहे अयूब खान के खिलाफ आंदोलन में शामिल थे.
1985 में जिया उल हक के शासन में पहली बार रशीद अहमद ने रावलपिंडी से चुनाव लड़ा और पाक नेशनल असेंबली पहुंचे. इसके बाद उन्होंने इस्लामिक जहूरी इत्तेहाद, पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-कैद अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर चुनाव लड़ा और लगातार तीन बार जीते, लेकिन 2008 में जब फिर से पीएमएल-एन का हाथ थामकर वह चुनावी मैदान में उतरे तो हार गए. 2008 का चुनाव हारने के बाद उन्होंने खुद की पार्टी आवामी मुस्लिम लीग पाकिस्तान (AMLP) बना ली. शेख रशीद अहमद अलग-अलग सरकारों में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं. आखिरी बार वह इमरान खान सरकार में केंद्रीय मंत्री थे.
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